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BrahMos Missile Deal: विकास का नया दौर शुरू, भारत-इंडोनेशिया के बीच आज तय हो सकता है ब्रह्मोस सौदा

BrahMos Missile Deal: इंडोनेशिया के रक्षा मंत्री, सजाफरी सजामसोएद्दीन, तीन दिवसीय महत्वपूर्ण दौरे के लिए बुधवार शाम नई दिल्ली पहुंचे। उनका यह दौरा भारत और इंडोनेशिया के बीच बढ़ते रणनीतिक संबंधों को दर्शाता है। गुरुवार को, वह भारतीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के साथ तीसरे भारत-इंडोनेशिया रक्षा मंत्री संवाद की सह-अध्यक्षता करेंगे। इस संवाद का मुख्य केंद्र बिंदु रक्षा सहयोग और क्षेत्रीय स्थिरता (Geopolitics) को मजबूत करना है।

BrahMos Missile Deal
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इंडोनेशिया की ब्रह्मोस में ‘जबरदस्त’ दिलचस्पी

 

इस दौरे का सबसे बड़ा आकर्षण इंडोनेशिया द्वारा भारत की प्रतिष्ठित ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल प्रणाली को खरीदने में दिखाई गई गहरी रुचि है। इस बहुचर्चित खरीद को लेकर दोनों देशों के बीच सैन्य और कूटनीतिक स्तर पर व्यापक बातचीत पहले ही हो चुकी है। रक्षा मंत्रालय ने पुष्टि की है कि दोनों मंत्री बैठक के दौरान क्षेत्रीय सुरक्षा के साथ-साथ तमाम अंतरराष्ट्रीय मुद्दों और द्विपक्षीय रक्षा सहयोग को और गहरा करने के उपायों पर भी गहन चर्चा करेंगे।


सौदे पर सस्पेंस खत्म? राजनाथ सिंह ने दिए थे संकेत

 

सूत्रों के अनुसार, रक्षा मंत्री सजामसोएद्दीन का यह दौरा ब्रह्मोस मिसाइल खरीद सौदे पर स्थिति को स्पष्ट करने में निर्णायक (Procurement) साबित हो सकता है। भारतीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने पिछले महीने लखनऊ में ब्रह्मोस केंद्र से मिसाइलों की पहली खेप रवाना करते समय इसके मजबूत संकेत दिए थे। उन्होंने तब कहा था कि फिलीपींस के साथ सौदा होने के बाद, आने वाले समय में अन्य मित्र देशों के साथ भी सहयोग की अच्छी संभावनाएं हैं।


मिसाइल एकीकरण: सुखोई पर ब्रह्मोस की तैयारी

 

सीडीएस जनरल अनिल चौहान ने भी 28 अक्टूबर को अपनी जकार्ता यात्रा के दौरान सजामसोएद्दीन के साथ इस सौदे पर चर्चा की थी। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, भारत ने इंडोनेशिया के रूसी-निर्मित सुखोई-27 विमानों को ब्रह्मोस मिसाइलों के साथ सफलतापूर्वक एकीकृत करने की रणनीतिक पेशकश की है। हालाँकि, इस एकीकरण के लिए कुछ महत्वपूर्ण तकनीकी  (Technology) बदलाव करने पड़ सकते हैं, लेकिन दोनों देशों के बीच ब्रह्मोस सौदे पर बातचीत एक अग्रिम चरण में पहुँच चुकी है।

अंतिम मुहर: क्यों जरूरी है रूस की अनुमति?

 

समझौते पर अंतिम हस्ताक्षर से पहले, खासकर यदि इसमें विमानों के साथ मिसाइल एकीकरण शामिल है, तो रूस की मंजूरी अनिवार्य है। ब्रह्मोस मिसाइल भारत और रूस का एक संयुक्त उद्यम है। यह साझेदारी रक्षा क्षेत्र  (Clearance) में एक जटिल लेकिन महत्वपूर्ण पहलू है। इससे पहले, इस साल जनवरी में इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो की भारत यात्रा के दौरान भी दोनों देशों ने रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने पर सहमति जताई थी, जो इस दौरे के लिए मज़बूत आधार तैयार करती है।

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