PGI Lucknow: हाईटेक क्वार्टनरी सेंटर से बदलेगा गंभीर बीमारियों के इलाज का भविष्य, जानें कैसे मिलेगा लाभ…
PGI Lucknow: लखनऊ स्थित संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (PGI) एक बार फिर देश के हेल्थकेयर मैप पर बड़ी छलांग लगाने जा रहा है। डिप्टी सीएम एवं स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक ने ऐलान किया है कि पीजीआई में गंभीर और दुर्लभ रोगों से पीड़ित मरीजों के लिए क्वार्टनरी हेल्थकेयर सेंटर की स्थापना की जाएगी। यह केंद्र उन मरीजों के लिए वरदान साबित होगा, जिनका इलाज अब तक केवल देश के चुनिंदा या विदेशों के अस्पतालों में संभव था। (Quaternary-care)

जटिल बीमारियों को मिलेगा विश्वस्तरीय इलाज
इस नए केंद्र में लिवर, हार्ट, किडनी और अन्य अंगों के फेल होने से जूझ रहे मरीजों को उच्चस्तरीय चिकित्सा (Advanced-treatment) सुविधा मिलेगी। यहां जटिल से जटिल ऑपरेशन किए जाएंगे, जिनके लिए अब तक मरीजों को बड़े निजी अस्पतालों या विदेशों का रुख करना पड़ता था। सरकार का लक्ष्य है कि आम नागरिक को किफायती और उन्नत इलाज एक ही छत के नीचे उपलब्ध कराया जाए।
प्रोटॉन से लेकर ECMO तक मिलेगी अत्याधुनिक तकनीक
डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने बताया कि इस क्वार्टनरी सेंटर में प्रोटॉन थेरेपी, सेल्युलर थेरेपी, ECMO, एडवांस न्यूरो-इंटरवेंशनल और प्रिसिजन ऑन्कोलॉजी जैसी अत्याधुनिक सुविधाएं (High-end-technology) उपलब्ध होंगी। ये तकनीकें कैंसर, गंभीर हार्ट और न्यूरोलॉजिकल बीमारियों के इलाज में गेम-चेंजर साबित होंगी। इससे पीजीआई को देश के शीर्ष चिकित्सा संस्थानों की श्रेणी में और मजबूत स्थान मिलेगा।
इलाज, जांच और सर्जरी में बढ़ेगा AI का इस्तेमाल
पीजीआई में आने वाले समय में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI-healthcare) की भूमिका और मजबूत होगी। जांच, ऑपरेशन और उपचार की प्रक्रिया में AI आधारित सिस्टम अपनाए जाएंगे, जिससे बीमारी की पहचान ज्यादा सटीक और इलाज ज्यादा प्रभावी हो सकेगा। ब्रजेश पाठक ने कहा कि तकनीक के सही इस्तेमाल से मरीजों को समय पर और बेहतर परिणाम मिलेंगे।
स्पोक-हब मॉडल से जुड़ेगा पूरा प्रदेश
पीजीआई को प्रदेश के सभी मेडिकल कॉलेजों से स्पोक-हब मॉडल के तहत जोड़ा जाएगा। टेली मेडिसिन के जरिए पीजीआई के विशेषज्ञ डॉक्टर दूर-दराज के मेडिकल कॉलेजों में भर्ती मरीजों को परामर्श और उन्नत इलाज की सुविधा देंगे। यह सुविधा प्रदेश के छह मेडिकल कॉलेजों में पहले ही शुरू हो चुकी है, जिससे हजारों मरीजों को सीधा लाभ मिल रहा है।
क्रिटिकल केयर मेडिसिन में बेड की संख्या तीन गुना
डिप्टी सीएम ने बताया कि पीजीआई के क्रिटिकल केयर (Critical-care) मेडिसिन (CCM) विभाग में बेड की संख्या 40 से बढ़ाकर 100 की जाएगी। इसके साथ ही इमरजेंसी मेडिसिन विभाग में भी बेड की क्षमता दोगुनी करने पर काम चल रहा है। वर्तमान में करीब 100 बेड पर मरीजों का इलाज किया जा रहा है, जिसे जल्द और विस्तार दिया जाएगा।
पीजीआई पर बढ़ता भरोसा, निजी अस्पतालों से लौट रहे मरीज
ब्रजेश पाठक ने कहा कि पीजीआई ने आम लोगों का भरोसा (Public-trust) जीता है। निजी अस्पतालों में महंगे इलाज से परेशान लोग पीजीआई में इलाज के लिए सिफारिश करवाते हैं। यह भरोसा संस्थान की गुणवत्ता, डॉक्टरों की विशेषज्ञता और किफायती इलाज का परिणाम है। सरकार का प्रयास है कि यह भरोसा और मजबूत हो।
रक्तदान शिविर और शैक्षणिक गतिविधियां भी रहीं खास
ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन विभाग द्वारा आयोजित स्वैच्छिक रक्तदान शिविर में 62 रक्तदाताओं ने रक्तदान (Blood-donation) किया। सभी रक्तदाताओं को सम्मानित किया गया। इसके साथ ही संस्थान परिसर में पौधरोपण कार्यक्रम आयोजित हुआ। इमरजेंसी मेडिसिन विभाग की डॉ. अलका वर्मा और एनेस्थेसियोलॉजी की डॉ. दिव्या द्वारा लिखित पुस्तक का भी विमोचन किया गया।
नवाचार आधारित चिकित्सा शिक्षा से बदलेगा भविष्य
नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) के अध्यक्ष डॉ. अभिजात चंद्रकांत सेठ ने कहा कि चिकित्सा शिक्षा (Medical-education) को समाज की जरूरतों के अनुसार ढाला जा रहा है। पढ़ाई में व्यावहारिक प्रशिक्षण पर अधिक जोर दिया जा रहा है और नवाचार आधारित चिकित्सा शिक्षा प्रणाली लागू की गई है। इसका सीधा लाभ भविष्य में मरीजों को बेहतर इलाज के रूप में मिलेगा।
मरीजों को पूरी जानकारी देना डॉक्टरों की जिम्मेदारी
राज्य मंत्री चिकित्सा शिक्षा मयंकेश्वर शरण सिंह ने कहा कि डॉक्टरों को मरीजों को उनकी बीमारी के बारे में पूरी और स्पष्ट जानकारी देनी चाहिए। इससे मरीज और तीमारदार दोनों का डॉक्टर (Doctor-patient) पर विश्वास बढ़ता है। उन्होंने डॉक्टरों के वेतन बढ़ाने का समर्थन करते हुए कहा कि इससे डॉक्टरों का पलायन रुकेगा और प्रदेश को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिलेंगी।
स्वास्थ्य व्यवस्था में ऐतिहासिक बदलाव की ओर उत्तर प्रदेश
पीजीआई लखनऊ में प्रस्तावित यह क्वार्टनरी हेल्थ सेंटर (Healthcare-reform) उत्तर प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था में ऐतिहासिक बदलाव साबित होगा। अत्याधुनिक तकनीक, AI आधारित इलाज, टेली मेडिसिन और मजबूत इमरजेंसी सेवाओं के साथ पीजीआई न सिर्फ प्रदेश बल्कि देशभर के मरीजों के लिए उम्मीद की नई किरण बनकर उभरेगा।



