उत्तराखण्ड

Rishikesh Mob Violence Over Forest Land Survey: सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर सर्वे करने पहुंची टीम पर खूनी संघर्ष, पत्थरबाजी में सीओ समेत कई जवान घायल

Rishikesh Mob Violence Over Forest Land Survey: तीर्थनगरी ऋषिकेश में पिछले दो दिनों से चल रहा वन भूमि का सर्वे रविवार को हिंसक संघर्ष में तब्दील हो गया। स्थानीय निवासियों का गुस्सा उस समय फूट पड़ा जब वन विभाग की टीम भारी पुलिस बल के साथ घनी आबादी वाले क्षेत्रों में पैमाइश करने पहुंची। इस (Public Unrest in Uttarakhand) की लहर इतनी तीव्र थी कि गुस्साई भीड़ ने मनसा देवी तिराहे के पास हरिद्वार-ऋषिकेश रेलवे ट्रैक को पूरी तरह जाम कर दिया। देखते ही देखते स्थिति नियंत्रण से बाहर हो गई और शांतिपूर्ण वार्ता की कोशिशें पथराव में बदल गईं। स्थानीय लोगों के मन में अपनी जमीन और घर छिनने का डर इस कदर हावी था कि उन्होंने कानून को अपने हाथ में लेने में भी संकोच नहीं किया।

Rishikesh Mob Violence Over Forest Land Survey
Rishikesh Mob Violence Over Forest Land Survey

रेलवे ट्रैक पर चार घंटे तक रहा हाई वोल्टेज ड्रामा

जैसे ही भीड़ ने रेलवे ट्रैक पर कब्जा किया, ऋषिकेश से हरिद्वार और अन्य शहरों की ओर जाने वाली ट्रेनों के पहिए थम गए। स्थिति को संभालने के लिए आरपीएफ, जीआरपी और स्थानीय पुलिस के जवान मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों को समझाने और (Railway Track Blockade Impact) को खत्म करने का प्रयास किया। चार घंटे की लंबी जद्दोजहद के बाद जब पुलिस ने ट्रैक खाली कराने के लिए सख्ती दिखाई, तो भीड़ हिंसक हो उठी। अचानक हुई इस पत्थरबाजी से सुरक्षाबलों में भगदड़ मच गई और जवानों को अपनी जान बचाने के लिए रेलवे ट्रैक से हाईवे की ओर दौड़ना पड़ा।

सीओ डॉ. पूर्णिमा गर्ग पर भी हुआ जानलेवा हमला

पत्थरबाजों का तांडव यहीं नहीं रुका, उन्होंने पुलिस को खदेड़ते हुए हरिद्वार-ऋषिकेश हाईवे तक पहुंचा दिया। इस हिंसक झड़प में क्षेत्राधिकारी (CO) डॉ. पूर्णिमा गर्ग सहित कई वरिष्ठ अधिकारी बाल-बाल बचे। भीड़ ने जवानों पर ताबड़तोड़ पत्थर बरसाए, जिससे (Assault on Police Personnel) की इस घटना में पांच पुलिसकर्मी गंभीर रूप से घायल हो गए। हाईवे पर मची इस अफरा-तफरी के कारण घंटों तक वाहनों की आवाजाही ठप रही। बाद में अतिरिक्त पुलिस बल ने मोर्चा संभाला और भीड़ को खदेड़कर वापस गलियों की तरफ भेजा, तब जाकर स्थिति थोड़ी सामान्य हो सकी।

ठप रहा ट्रेनों का संचालन और यात्री हुए बेहाल

वन भूमि सर्वे के विरोध में हुए इस बवाल ने रेलवे यातायात की कमर तोड़ दी। आधा दर्जन से अधिक एक्सप्रेस और पैसेंजर ट्रेनें विभिन्न स्टेशनों पर घंटों खड़ी रहीं। चंदौसी-ऋषिकेश पैसेंजर ट्रेन को बीच रास्ते से ही हरिद्वार वापस भेज दिया गया। योगनगरी ऋषिकेश से रवाना होने वाली (Yoga Express Train Delay) ने यात्रियों की मुश्किलें बढ़ा दीं। बाड़मेर एक्सप्रेस और गंगा नगर एक्सप्रेस में सवार यात्री पानी और भोजन की किल्लत से जूझते रहे। छोटे बच्चों और बुजुर्गों के लिए ट्रैक पर ट्रेनों का रुकना किसी दुस्वप्न से कम नहीं था, क्योंकि दहशत के माहौल के बीच उन्हें यह समझ नहीं आ रहा था कि सफर कब शुरू होगा।

पुलिसकर्मियों पर घंटेभर तक बरसे पत्थर

घटनास्थल पर करीब एक घंटे तक पत्थरबाजी और अफरा-तफरी का माहौल बना रहा। ऋषिकेश-हरिद्वार हाईवे और बाईपास मार्ग युद्ध का मैदान नजर आ रहे थे। पत्थरबाजी की इस (Violent Clash in Rishikesh) घटना ने न केवल पुलिस को घायल किया बल्कि ट्रेनों में सवार अन्य राज्यों के पर्यटकों को भी डरा दिया। शाम करीब छह बजे जब एसएसपी अजय सिंह भारी बल के साथ मौके पर पहुंचे, तब जाकर भीड़ छंटनी शुरू हुई। एसएसपी ने खुद अमितग्राम और अन्य संवेदनशील इलाकों में फ्लैग मार्च किया ताकि स्थानीय निवासियों के बीच कानून का इकबाल कायम किया जा सके।

218 प्रदर्शनकारियों के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा

शनिवार को हाईवे जाम करने और सरकारी कार्य में बाधा डालने के आरोप में पुलिस ने अब तक 218 लोगों के खिलाफ कानूनी शिकंजा कसा है। इनमें से 8 मुख्य आरोपियों को नामजद किया गया है। एसएसआई मनवर सिंह नेगी की तहरीर पर (Legal Action against Protesters) शुरू कर दी गई है। पुलिस का कहना है कि वे सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का पालन कर रहे थे और किसी भी नागरिक को कानून हाथ में लेने की इजाजत नहीं दी जा सकती। नामजद आरोपियों में स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं और मोहल्ला प्रभारियों के नाम शामिल हैं, जिनकी गिरफ्तारी के लिए दबिश दी जा रही है।

महिला रेंजर के साथ अभद्रता और मारपीट का आरोप

इस पूरे विवाद के बीच एक और शर्मनाक घटना सामने आई जब सर्वे टीम के साथ मौजूद एक महिला रेंजर ने छेड़खानी और अभद्रता की शिकायत दर्ज कराई। गुमानीवाला क्षेत्र में जांच के दौरान (Harassment of Forest Officials) की इस घटना ने प्रशासन को और भी सख्त कर दिया है। पीड़ित रेंजर के मुताबिक, अज्ञात लोगों ने न केवल उनकी वर्दी पकड़ी बल्कि टीम के साथ मारपीट भी की। पुलिस ने इस मामले में छेड़खानी और सरकारी कार्य में बाधा डालने की अलग से एफआईआर दर्ज की है और वीडियो फुटेज के आधार पर आरोपियों की पहचान की जा रही है।

बेघर होने का डर और सुप्रीम कोर्ट का आदेश

इस पूरे विवाद की जड़ में वह सर्वे है जिसे सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर अंजाम दिया जा रहा है। वन विभाग ऋषिकेश के आबादी क्षेत्रों में (Forest Land Survey Conflict) के जरिए उन भूखंडों की पहचान कर रहा है जो रिकॉर्ड में वन भूमि के रूप में दर्ज हैं। वर्षों से इन जमीनों पर काबिज लोगों को डर है कि उनके आशियाने उजाड़ दिए जाएंगे। स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्होंने अपनी जीवन भर की कमाई लगाकर ये प्लॉट खरीदे और घर बनाए, अब अचानक उन्हें अतिक्रमणकारी घोषित करना सरासर अन्याय है।

प्रशासन और जनता के बीच बढ़ता संवादहीनता का संकट

स्थानीय निवासियों का मुख्य आरोप यह है कि वन विभाग ने इस कार्रवाई से पहले कोई पूर्व सूचना या नोटिस नहीं दिया। निवासियों का कहना है कि (Lack of Administrative Communication) के कारण ही यह भ्रम और गुस्सा फैला है। शिवाजीनगर और अमितग्राम की महिलाओं का कहना है कि अगर विभाग को सर्वे करना था तो पहले सार्वजनिक मुनादी करानी चाहिए थी। सीधे गलियों में फोर्स लेकर घुसने से लोगों में दहशत फैल गई। फिलहाल ऋषिकेश में तनावपूर्ण शांति बनी हुई है और भारी पुलिस बल की तैनाती के बीच सर्वे की प्रक्रिया को लेकर संशय बरकरार है।

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