Bhagalpur Abhishek Murder Case Reveal: मामा ने ही रची थी भांजे को मौत के घाट उतारने की खौफनाक साजिश, विश्वासघाती रिश्तों का हुआ खूनी अंत
Bhagalpur Abhishek Murder Case Reveal: बिहार के भागलपुर जिले से रिश्तों के कत्ल की एक ऐसी वारदात सामने आई है, जिसने मानवीय संवेदनाओं को झकझोर कर रख दिया है। नाथनगर के मसकन बरारी में रहने वाले अभिषेक की तीन टुकड़ों में कटी लाश मिलने के बाद पूरे इलाके में दहशत का माहौल है। पुलिस की तफ्तीश में जो तथ्य सामने आए हैं, वे किसी (Gory Murder Mystery in Bihar) की तरह चौंकाने वाले हैं। पता चला है कि सगे मामा ने ही अपने भांजे को रास्ते से हटाने के लिए पेशेवर अपराधियों को सुपारी दी थी। यह हत्या केवल संपत्ति के विवाद में नहीं, बल्कि अवैध संबंधों और ब्लैकमेलिंग के पेचीदा जाल के कारण की गई।

अवैध संबंध और ब्लैकमेलिंग का घातक खेल
पुलिस जांच में यह बात निकलकर सामने आई है कि मृतक अभिषेक और उसके मामा संतोष के बीच एक ही लड़की को लेकर गहरा विवाद चल रहा था। संतोष का दो लड़कियों से अवैध संबंध था, जिसमें से एक लड़की के साथ अभिषेक भी जुड़ा हुआ था। अभिषेक इस राज का फायदा उठाकर (Illicit Relationship and Blackmailing) के जरिए अपने मामा को लगातार धमका रहा था। वह मामा को डराता था कि वह इन संबंधों की जानकारी मामी को दे देगा। इसी ब्लैकमेलिंग से तंग आकर संतोष ने अपने ही भांजे को खत्म करने का खौफनाक फैसला ले लिया।
दो लाख की सुपारी और नशे का हैवानियत भरा तांडव
भागलपुर के सिटी एसपी शुभांक मिश्रा ने प्रेस वार्ता में खुलासा किया कि संतोष ने अभिषेक की हत्या के लिए तीन अपराधियों को दो लाख रुपये की सुपारी दी थी। हत्या की इस वारदात को अंजाम देने वाले आरोपी (Contract Killing Execution Details) के दौरान ब्राउन शुगर के भारी नशे में थे। नशे की हालत में उन्होंने अभिषेक की हत्या की और फिर उसके शरीर को तीन टुकड़ों में काट दिया। हैवानियत का आलम यह था कि सिर और पैर को धड़ से अलग करने में आरोपियों को दो घंटे से भी अधिक का समय लगा। पुलिस ने मौके से नशे के इस्तेमाल से जुड़े सबूत भी बरामद किए हैं।
साइबर ठगी के काले कारोबार का कनेक्शन
अभिषेक और उसके मामा के बीच विवाद केवल रिश्तों तक सीमित नहीं था। जांच में यह भी पता चला है कि संतोष और उसके साथी बड़े पैमाने पर साइबर ठगी के धंधे में शामिल थे। अभिषेक अपने मामा के इस (Cyber Crime Money Dispute) को मुंशी के तौर पर संभालता था। धीरे-धीरे अभिषेक व्यापार के पैसों और पूरे कारोबार पर अपना वर्चस्व स्थापित करने की कोशिश करने लगा। पैसों के बंटवारे और वर्चस्व की इस लड़ाई ने संतोष के भीतर नफरत की आग भर दी, जिसने अंततः इस वीभत्स हत्याकांड का रूप ले लिया।
खुद अभिषेक के पैसों से खरीदा गया मौत का सामान
इस हत्याकांड की सबसे विडंबनापूर्ण बात यह रही कि हत्यारों ने अभिषेक की जान लेने के लिए जिस आरी पत्ती, चाकू और पन्नी का इस्तेमाल किया, उसे अभिषेक के ही पैसों से खरीदा गया था। आरोपियों ने (Online Money Transfer Evidence) के जरिए अभिषेक के मोबाइल से पैसे अपने खातों में ट्रांसफर करवाए थे। पकड़े गए हत्यारों ने बताया कि उन्होंने गर्दन और पैर काटने से पहले फर्श पर पन्नी बिछा दी थी ताकि खून बहकर दूर तक न जाए और कोई सुराग न छूटे। यह योजनाबद्ध तरीका दर्शाता है कि हत्या कितनी ठंडे दिमाग से की गई थी।
एडवांस के पैसे और आरोपियों की गिरफ्तारी
पुलिस ने अब तक इस मामले में संतोष सहित चार मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। पूछताछ के दौरान पता चला कि संतोष ने (Contract Killers Advance Payment) के रूप में 10 हजार रुपये हत्यारों को दिए थे। इसमें से खर्च के बाद बचे हुए 4500 रुपये पुलिस ने बरामद कर लिए हैं। हालांकि मामा संतोष शुरुआत में पुलिस को गुमराह करने की कोशिश कर रहा था, लेकिन पकड़े गए अन्य आरोपियों रितिक, राधे और आयुष की निशानदेही और गवाही ने उसका झूठ बेनकाब कर दिया।
कटा हुआ सिर और पैर बरामद, परिजनों में कोहराम
रविवार दोपहर को नाथनगर पुलिस ने अभिषेक का कटा हुआ सिर और पैर बरामद कर लिया। जैसे ही इसकी खबर परिजनों को मिली, परिवार में चीख-पुकार मच गई। पुलिस ने (Body Recovery and Forensic Evidence) की प्रक्रिया पूरी करने के बाद शव को अंतिम संस्कार के लिए परिजनों को सौंप दिया। अभिषेक का धड़ पहले ही मिल चुका था, लेकिन अंगों की तलाश जारी थी। इस घटना के बाद भागलपुर की सुरक्षा व्यवस्था और अपराधियों के बढ़ते मनोबल पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
नम आंखों से गंगा घाट पर हुआ अंतिम संस्कार
रविवार देर शाम करीब सात बजे भागलपुर के कहलगांव गंगा घाट पर अभिषेक का अंतिम संस्कार किया गया। श्मशान घाट पर मौजूद हर शख्स की आंखें नम थीं जब (Cremation of Murder Victim) के दौरान मृतक के कटे हुए सिर और पैरों को धड़ से जोड़कर मुखाग्नि की प्रक्रिया पूरी की गई। अभिषेक के छोटे भाई अमरदेव ने बड़े भाई के पार्थिव शरीर को मुखाग्नि दी। एक मामा द्वारा अपने ही भांजे के साथ की गई इस दरिंदगी ने समाज में रिश्तों की पवित्रता पर एक गहरा घाव छोड़ दिया है।



