Bihar waterway transport: हार में जलमार्ग से माल ढुलाई की नई पहल से परिवहन व्यवस्था में बदलाव
Bihar waterway transport: बिहार में माल ढुलाई की पारंपरिक व्यवस्था में जल्द ही बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। अब बालू, सीमेंट और अन्य भारी निर्माण सामग्री की ढुलाई सड़क या रेल के बजाय जलमार्ग के माध्यम से करने की योजना पर तेजी से काम किया जा रहा है। राज्य सरकार ने गंगा और कोसी नदी सहित सात घोषित राष्ट्रीय जलमार्गों के विकास का रोडमैप तैयार किया है, जिससे परिवहन लागत घटेगी और व्यापारिक गतिविधियों को नई गति मिलेगी।

जलमार्ग विकास को लेकर हुई अहम बैठक
परिवहन मंत्री श्रवण कुमार ने केरल के कोच्चि में आयोजित इनलैंड वाटरवेज डेवलपमेंट काउंसिल की तीसरी बैठक में बिहार की जलमार्ग संभावनाओं को विस्तार से रखा। इस बैठक में उन्होंने बताया कि राज्य में नदियों के माध्यम से माल ढुलाई को बढ़ावा देने के लिए ठोस रणनीति बनाई जा रही है। उनका कहना था कि बिहार की भौगोलिक संरचना जल परिवहन के लिए बेहद अनुकूल है और इसका पूरा लाभ उठाने की आवश्यकता है।
कम लागत में अधिक लाभ का विकल्प
बैठक के दौरान मंत्री ने परिवहन लागत से जुड़े आंकड़े भी साझा किए। उन्होंने बताया कि जलमार्ग से माल ढुलाई की औसत लागत लगभग 1.3 रुपये प्रति टन किलोमीटर है, जो रेल मार्ग से काफी कम है। वहीं सड़क मार्ग से यह लागत और भी अधिक पड़ती है। जल परिवहन के सस्ते होने से उद्योगों को सीधा लाभ मिलेगा और निर्माण कार्यों की कुल लागत में भी कमी आएगी।
सड़कों पर ट्रैफिक और दबाव होगा कम
जलमार्ग के इस्तेमाल से केवल आर्थिक लाभ ही नहीं होगा, बल्कि सामाजिक और पर्यावरणीय फायदे भी सामने आएंगे। मंत्री के अनुसार यदि भारी माल ढुलाई का बड़ा हिस्सा नदियों के जरिए होने लगे तो सड़कों पर ट्रैफिक का दबाव 30 से 40 प्रतिशत तक कम हो सकता है। इससे सड़क दुर्घटनाओं में कमी आएगी, पुलों पर भार घटेगा और सड़कों की उम्र भी बढ़ेगी।
प्रमुख नदियों से बढ़ेगी भारी माल की ढुलाई
गंगा, गंडक, कोसी और सोन जैसी नदियों को इस योजना का मुख्य आधार बनाया गया है। इन नदियों के जरिए बालू, सीमेंट, स्टोन चिप्स और बिजली संयंत्रों से जुड़ी भारी सामग्रियों की ढुलाई की जाएगी। जलमार्ग इस तरह के भारी और थोक माल के लिए सबसे किफायती और सुरक्षित विकल्प माना जाता है, जिससे उद्योगों को लंबी दूरी तक माल भेजने में आसानी होगी।
रोजगार और व्यापार को मिलेगा बढ़ावा
जलमार्ग आधारित परिवहन व्यवस्था के विस्तार से राज्य में रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। जहाज संचालन, टर्मिनल प्रबंधन, लॉजिस्टिक सेवाओं और भंडारण से जुड़े क्षेत्रों में स्थानीय लोगों को काम मिलेगा। इसके साथ ही अंतर्देशीय व्यापार को मजबूती मिलेगी और बिहार एक महत्वपूर्ण लॉजिस्टिक हब के रूप में उभर सकता है।
इनलैंड वाटर ट्रांसपोर्ट टर्मिनल की योजना
सरकार ने नदियों के किनारे संभावित स्थानों पर इनलैंड वाटर ट्रांसपोर्ट टर्मिनल विकसित करने की योजना बनाई है। इन टर्मिनलों के आसपास औद्योगिक गतिविधियां भी बढ़ेंगी। इससे राज्य से सीधे निर्यात और आयात की सुविधा विकसित होगी। इसके अलावा इन टर्मिनलों को नेपाल सीमा से जोड़ने की संभावना भी तलाशी जा रही है, जिससे अंतरराष्ट्रीय व्यापार को भी बढ़ावा मिल सकेगा।
सोनपुर के कालुघाट टर्मिनल की खासियत
राज्य सरकार के अनुसार सोनपुर के कालुघाट पर विकसित मल्टीमॉडल टर्मिनल इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इस टर्मिनल की वार्षिक क्षमता लगभग 77 हजार कंटेनर लोड और अनलोड करने की है। यहां एक साथ दो मालवाहक जहाजों के ठहरने की सुविधा उपलब्ध है। कंटेनरों की सुरक्षा, वजन मापन और जल, रेल व सड़क मार्ग को जोड़ने की व्यवस्था भी यहां की गई है।
लॉजिस्टिक पार्क से बढ़ेगी स्टोरेज सुविधा
कालुघाट क्षेत्र में लॉजिस्टिक पार्क की बुनियादी संरचना का निर्माण कार्य जारी है। इसके पूरा होने के बाद सुरक्षित भंडारण की सुविधा भी उपलब्ध हो जाएगी। इससे माल के रखरखाव और वितरण की प्रक्रिया और अधिक सुगम हो जाएगी, जो आने वाले समय में बिहार की अर्थव्यवस्था को मजबूत आधार प्रदान करेगी।
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