Heart Attack Survival Tips When Alone: अगर आप घर में अकेले हैं और सीने में दर्द उठे, तो जान बचाने के लिए तुरंत अपनाएं ये स्टेप्स
Heart Attack Survival Tips When Alone: आज के दौर में हृदय संबंधी बीमारियां किसी महामारी की तरह फैल रही हैं। भारत में विशेष रूप से युवाओं के बीच हार्ट अटैक (Cardiac arrest cases) के मामले जिस तेजी से बढ़े हैं, उसने स्वास्थ्य विशेषज्ञों को चिंता में डाल दिया है। आधुनिक जीवनशैली, अत्यधिक तनाव, जंक फूड का सेवन और शारीरिक सक्रियता की कमी हमारे दिल को समय से पहले बूढ़ा बना रही है। ऐसी स्थिति में सतर्कता ही बचाव है, क्योंकि दिल की बीमारी कभी भी दस्तक दे सकती है।

मेडिकल इमरजेंसी: जब हर एक सेकंड कीमती हो
हार्ट अटैक एक ऐसी स्थिति है जहां समय ही जीवन है। डॉक्टरों का मानना है कि अटैक आने के शुरुआती कुछ मिनट ‘गोल्डन ऑवर’ कहलाते हैं। यदि मरीज को सही समय पर (Emergency medical aid) मिल जाए, तो उसकी जान बचने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है। लेकिन समस्या तब विकट हो जाती है जब व्यक्ति घर में अकेला हो और उसे मदद मांगने का मौका भी न मिले। ऐसी आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए मानसिक तैयारी और सही जानकारी होना अनिवार्य है।
डॉ. जुबैर अहमद की सलाह: अकेले होने पर क्या करें?
प्रसिद्ध विशेषज्ञ डॉ. जुबैर अहमद ने हाल ही में एक इंस्टाग्राम पोस्ट के जरिए अकेले में हार्ट अटैक आने पर बचाव के तरीके साझा किए हैं। उनका कहना है कि घबराहट में अक्सर लोग (Panic management) नहीं कर पाते, जिससे स्थिति और बिगड़ जाती है। यदि आपको अचानक सीने में तेज दर्द, भारीपन या बायीं बाजू में झुनझुनी महसूस हो, तो सबसे पहले खुद को शांत रखने की कोशिश करें और बिना वक्त गंवाए अपनी जान बचाने के उपायों पर ध्यान केंद्रित करें।
मदद के लिए तुरंत कॉल करें और दरवाजा खोलें
जैसे ही आपको लक्षणों का अनुभव हो, सबसे पहले एम्बुलेंस या किसी करीबी रिश्तेदार को फोन करें। इसके तुरंत बाद, अपने घर का मुख्य दरवाजा (Home safety access) खोल दें। यह कदम इसलिए जरूरी है क्योंकि यदि आप बेहोश हो जाते हैं, तो मदद के लिए आने वाले लोग बिना दरवाजा तोड़े आप तक पहुंच सकें। फोन पर बात करते समय अपनी सटीक लोकेशन बताना न भूलें ताकि पैरामेडिक्स को आप तक पहुंचने में देरी न हो।
जोर-जोर से खांसना: क्या यह कारगर है?
अक्सर सोशल मीडिया पर ‘कफ सीपीआर’ की सलाह दी जाती है, लेकिन डॉ. जुबैर अहमद जैसे विशेषज्ञ कुछ खास परिस्थितियों में ही इसे आजमाने की बात कहते हैं। यदि आपको लग रहा है कि आप (Consciousness loss) की ओर बढ़ रहे हैं, तो लंबी सांस लेकर जोर-जोर से खांसना शुरू करें। यह क्रिया फेफड़ों में ऑक्सीजन बढ़ाती है और हृदय की धड़कन को नियंत्रित करने में कुछ समय तक मदद कर सकती है, जिससे आपको अतिरिक्त कीमती सेकंड मिल सकते हैं।
एस्पिरिन का सेवन: खून के थक्के को रोकने में मददगार
अगर आपके घर में एस्पिरिन की टैबलेट उपलब्ध है, तो उसे तुरंत चबाकर खा लें। एस्पिरिन खून को पतला करने का काम करती है और (Blood clot prevention) में सहायक होती है, जिससे हार्ट ब्लॉकेज का असर कुछ कम हो सकता है। ध्यान रहे कि गोली को पानी के साथ निगलने के बजाय चबाकर खाना ज्यादा असरदार होता है क्योंकि यह सीधे रक्तप्रवाह में तेजी से घुलती है। हालांकि, यह केवल एक अस्थाई उपाय है।
लेटने के बजाय बैठने की सही मुद्रा अपनाएं
हार्ट अटैक के लक्षणों के दौरान कभी भी सीधा नहीं लेटना चाहिए। इसके बजाय, फर्श पर या दीवार के सहारे (Comfortable sitting posture) में बैठ जाएं और अपने घुटनों को ऊपर की ओर मोड़ लें। इस मुद्रा में बैठने से हृदय पर दबाव कम पड़ता है और सांस लेना थोड़ा आसान हो जाता है। शांत रहें और गहरी सांसें लेते रहें जब तक कि मदद आपके पास न पहुंच जाए। किसी भी प्रकार की शारीरिक मेहनत जैसे सीढ़ियां चढ़ना या भागना बिल्कुल न करें।
बचाव के लिए जीवनशैली में बदलाव है अनिवार्य
आपातकालीन उपायों के साथ-साथ यह भी जरूरी है कि हम अपने दिल की सेहत का पहले से ख्याल रखें। सही नींद लेना, स्ट्रेस कम करना और (Cardiovascular health maintenance) के लिए नियमित व्यायाम करना दिल की बीमारियों के जोखिम को काफी हद तक कम कर देता है। नियमित चेकअप कराते रहें और अपने कोलेस्ट्रॉल व ब्लड प्रेशर को नियंत्रण में रखें। याद रखें, आपका दिल आपकी जान है, इसकी हिफाजत आपकी प्राथमिकता होनी चाहिए।



