West Singhbhum Elephant Attack: कोल्हान के जंगलों में फैला दंतैल हाथी का खौफ, पल भर में मौत की नींद सो गया पूरा परिवार
West Singhbhum Elephant Attack: झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले से एक ऐसी हृदयविदारक घटना सामने आई है जिसने पूरे राज्य को झकझोर कर रख दिया है। गोईलकेरा प्रखंड के सोवां गांव में सोमवार की काली रात एक हंसते-खेलते परिवार के लिए काल बनकर आई। झुंड से बिछड़े एक दंतैल हाथी ने सो रहे परिवार पर हमला कर दिया, जिसमें पिता और उनके दो मासूम बच्चों की मौके पर ही मौत हो गई। (Human-Wildlife Conflict in Jharkhand) की यह भयावह तस्वीर बताती है कि ग्रामीण इलाकों में हाथियों का आतंक किस कदर बढ़ गया है।

एक झोपड़ी और उजड़ गए कई अरमान
घटना के वक्त कुंदरा बहंदा अपनी पत्नी और चार बच्चों के साथ अपनी कच्ची झोपड़ी में गहरी नींद में सो रहे थे। अचानक दंतैल हाथी ने झोपड़ी को तहस-नहस करना शुरू कर दिया। इस (Elephant Attack on Village) में कुंदरा बहंदा और उनकी दो बेटियों—कोदमा और सामू की कुचलकर मौत हो गई। कुंदरा की पत्नी ने अदम्य साहस का परिचय देते हुए अपनी दूधमुंही बच्ची को सीने से लगाकर भागकर जान बचाई, जबकि एक अन्य बेटी गंभीर रूप से घायल है और अस्पताल में जिंदगी की जंग लड़ रही है।
पांच दिनों में दस शिकार और वन विभाग पर सवाल
कोल्हान क्षेत्र में सक्रिय यह दंतैल हाथी पिछले पांच दिनों में दस लोगों को अपना शिकार बना चुका है। ग्रामीणों का आरोप है कि (Forest Department Negligence) के कारण हाथियों का आतंक कम होने का नाम नहीं ले रहा है। पिछले एक महीने के आंकड़ों पर नजर डालें तो हाथी के हमले में 14 लोगों की जान जा चुकी है। ग्रामीण अब रात-रात भर जागकर (Ratjaga in Villages) अपनी और अपने परिवार की सुरक्षा कर रहे हैं, क्योंकि वन विभाग की गश्ती टीमें उन्हें नाकाफी लग रही हैं।
गुजरात के ‘वनतारा’ से मांगी गई मदद
हाथी के बढ़ते उग्र स्वभाव को देखते हुए झारखंड वन विभाग ने अब अंतरराष्ट्रीय स्तर के विशेषज्ञों की मदद लेने का फैसला किया है। आरसीसीएफ स्मिता पंकज ने जानकारी दी है कि गुजरात की प्रसिद्ध (Vantara Team Support) और पश्चिम बंगाल की एक्सपर्ट टीमों से संपर्क किया गया है। इन टीमों का मुख्य उद्देश्य दंतैल हाथी को सुरक्षित रूप से ट्रेंकुलाइज कर घने जंगलों में ‘ट्रांसलोकेट’ करना है। इसके लिए जिले के सभी क्यूआरटी (QRT) जवानों को अलर्ट मोड पर रखा गया है।
कोल्हान प्रमंडल में दहशत का साया
आरसीसीएफ और डीएफओ स्तर के अधिकारियों ने मंगलवार को प्रभावित इलाकों का दौरा कर स्थिति का जायजा लिया। अधिकारियों ने स्वीकार किया कि कोल्हान वन प्रमंडल में एक अकेला हाथी घूम रहा है जो असामान्य रूप से हिंसक हो गया है। (RCCF Smita Pankaj Statement) के अनुसार, मृतकों के परिजनों को तत्काल सरकारी नियमानुसार मुआवजा प्रदान किया जाएगा। हालांकि, ग्रामीणों का कहना है कि मुआवजा जान की कीमत नहीं हो सकता, उन्हें हाथियों के आतंक से स्थायी मुक्ति चाहिए।
हाथी के हमलों का खौफनाक कैलेंडर
पिछले एक महीने में हाथियों के हमले की शिकार हुई जिंदगियों की सूची लंबी होती जा रही है। 5 दिसंबर 2025 को आनंदपुर में सैम लुगुन की मौत से शुरू हुआ यह सिलसिला 6 जनवरी 2026 को सोवां गांव में एक साथ तीन मौतों तक पहुँच गया है। (Elephant Attack Death Statistics) दर्शाते हैं कि गोईलकेरा, आनंदपुर, मनोहरपुर और टोटो प्रखंड हाथियों के निशाने पर हैं। जग मोहन सवैयां और चंपा कुई जैसे कई नाम अब केवल वन विभाग की फाइलों में दर्ज होकर रह गए हैं।
बेकाबू हाथी को जंगल खदेड़ने की चुनौती
वन विभाग के लिए सबसे बड़ी चुनौती दंतैल हाथी को बिना नुकसान पहुंचाए जंगल के अंदरूनी हिस्सों में भेजना है। चाईबासा और टोंटो के इलाकों में हाथी की मौजूदगी ने रेल सेवाओं को भी प्रभावित किया है। (Elephant Translocation Process) काफी जटिल होती है, जिसके लिए विशेषज्ञों की भारी टीम और संसाधनों की आवश्यकता होती है। ग्रामीणों का गुस्सा चरम पर है और वे जल्द से जल्द ठोस कार्रवाई की मांग कर रहे हैं ताकि सोवां गांव जैसी घटना दोबारा न हो।
ग्रामीण जीवन और हाथियों का आतंक
झारखंड के इन जंगलों में हाथियों और इंसानों के बीच बढ़ता संघर्ष (Man-Elephant Conflict Solutions) की तत्काल आवश्यकता की ओर इशारा करता है। झोपड़ियों का टूटना, फसलों की बर्बादी और असमय मौतों ने आदिवासियों के जीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है। जब तक वनतारा और अन्य टीमें पहुँचती हैं, तब तक ग्रामीणों को सतर्क रहने और हाथियों के रास्ते में न आने की सलाह दी गई है। यह देखना बाकी है कि अत्याधुनिक तकनीक और विशेषज्ञ टीमें कोल्हान के इस ‘किलर एलिफेंट’ पर कब तक काबू पाती हैं।



