झारखण्ड

Jharkhand School Winter Vacation News 2026: जानलेवा पाले ने रोक दी सांसे, मौसम ने तोड़ा रिकॉर्ड

Jharkhand School Winter Vacation News 2026: झारखंड में कड़ाके की ठंड और हड्डियों को गला देने वाली शीतलहर ने एक बार फिर शिक्षा व्यवस्था की रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया है। रांची जिला प्रशासन ने गिरते पारे के बीच बच्चों की सेहत को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए एक बड़ा फैसला लिया है। ताजा (official school closure orders) के मुताबिक, रांची जिले में कक्षा 1 से 6 तक के सभी सरकारी और निजी स्कूल अब 14 जनवरी तक पूरी तरह बंद रहेंगे। यह आदेश उन अभिभावकों के लिए बड़ी राहत बनकर आया है, जो सुबह के घने कोहरे में अपने नन्हे-मुन्नों को स्कूल भेजने के जोखिम से डरे हुए थे।

Jharkhand School Winter Vacation News 2026
Jharkhand School Winter Vacation News 2026

कक्षा 7 से 12 तक के लिए बदली गई समय की सुई

भले ही छोटे बच्चों के लिए छुट्टी का ऐलान हुआ हो, लेकिन बड़ी कक्षाओं के विद्यार्थियों के लिए पढ़ाई का सिलसिला जारी रहेगा। हालांकि, प्रशासन ने उनके लिए भी (revised academic timings) लागू कर दिए हैं। अब कक्षा 7 से 12 तक के छात्रों के लिए स्कूल की घंटी सुबह जल्दी नहीं बल्कि 10 बजे बजेगी। यह बदलाव इसलिए किया गया है ताकि किशोर छात्र सूरज की थोड़ी गर्माहट निकलने के बाद ही घर से बाहर निकलें और सुबह की उस बर्फीली हवा से बच सकें जो फेफड़ों और श्वसन तंत्र पर सीधा असर डालती है।

बार-बार बढ़ती छुट्टियों की तारीख और कुदरत की जिद

झारखंड में ठंड का यह कहर इतना अप्रत्याशित रहा है कि प्रशासन को बार-बार अपने फैसले बदलने पड़ रहे हैं। सबसे पहले स्कूलों को 8 जनवरी तक बंद रखने का निर्देश दिया गया था, जिसे बाद में (winter holiday extension logic) के तहत 10 जनवरी तक बढ़ाया गया। लेकिन जब मौसम विभाग ने तापमान में भारी गिरावट की चेतावनी दी, तो अब इसे 14 जनवरी तक खींचना पड़ा है। लगातार बदलती ये तारीखें साफ संकेत दे रही हैं कि इस बार की सर्दी पिछले कई सालों के रिकॉर्ड तोड़ने पर आमादा है।

आईएमडी का येलो अलर्ट और छह जिलों पर मंडराता खतरा

भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने झारखंड के लिए कोई राहत भरी खबर नहीं दी है। मौसम विभाग ने राज्य के कई जिलों में 13 जनवरी से 16 जनवरी तक शीतलहर को लेकर ‘येलो अलर्ट’ जारी कर दिया है। उत्तर-पश्चिमी बर्फीली हवाओं के कारण (meteorological yellow alert warning) का असर मुख्य रूप से गढ़वा, पलामू, चतरा, लातेहार, लोहरदगा और गुमला जैसे जिलों में देखने को मिलेगा। हजारीबाग में भी 14 जनवरी के बाद कनकनी बढ़ने की संभावना जताई गई है, जिससे जनजीवन और भी ज्यादा प्रभावित होने वाला है।

गुमला में 2.8 डिग्री: जब पारा जमा देने की हद तक गिरा

झारखंड के तापमान के आंकड़े किसी बर्फीले हिल स्टेशन की याद दिला रहे हैं। रविवार की सुबह राज्य के आठ जिलों में न्यूनतम तापमान 10 डिग्री सेल्सियस के नीचे दर्ज किया गया। इसमें सबसे भयावह स्थिति गुमला की रही, जहां पारा गिरकर (record minimum temperature) के स्तर यानी 2.8 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया। पलामू के डालटनगंज में 4.9 डिग्री और खूंटी में 5.6 डिग्री तापमान ने यह साफ कर दिया है कि पूरा प्रदेश इस वक्त एक नेचुरल ‘आइस बॉक्स’ में तब्दील हो चुका है।

बर्फीली हवाओं का टॉर्चर और स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियां

मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तर-पश्चिम से आने वाली शुष्क और ठंडी हवाएं झारखंड के मैदानी इलाकों में गलन बढ़ा रही हैं। इस (severe cold wave impact) के कारण न केवल सामान्य जनजीवन ठप पड़ा है, बल्कि स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने निमोनिया और वायरल फीवर के प्रति भी आगाह किया है। खासकर बच्चों के लिए 10 डिग्री से नीचे का तापमान काफी जोखिम भरा होता है। प्रशासन का छुट्टियों को आगे बढ़ाने का निर्णय इसी मेडिकल इमरजेंसी की आशंका को कम करने के लिए लिया गया है।

अलाव और रैनबसेरों के सहारे कटती रातें

राजधानी रांची से लेकर सुदूर ग्रामीण इलाकों तक, लोग अब पूरी तरह से अलाव के भरोसे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में (rural community survival) के लिए लकड़ियां और पराली ही एकमात्र सहारा बची हैं। शीतलहर के इस येलो अलर्ट के बीच प्रशासन ने रैनबसेरों में भी सुविधाओं को बढ़ाने के निर्देश दिए हैं ताकि सड़कों पर रहने वाले बेसहारा लोग इस कयामत की ठंड का शिकार न बनें। गिरता हुआ पारा यह सवाल भी खड़ा कर रहा है कि क्या 14 जनवरी के बाद स्थिति सामान्य हो पाएगी या छुट्टियों का यह दौर और आगे बढ़ेगा?

आने वाले चार दिन: सतर्कता ही एकमात्र बचाव

मौसम विभाग की भविष्यवाणी को देखें तो 16 जनवरी तक झारखंड के लोगों को कनकनी से कोई खास निजात मिलती नहीं दिख रही है। ऐसे में (precautionary measures for winter) को अपनाना बेहद जरूरी है। प्रशासन ने अपील की है कि लोग गर्म पानी का सेवन करें और बिना जरूरत घर से बाहर न निकलें। स्कूलों के समय में बदलाव और छोटी क्लासों की छुट्टी एक बचाव का रास्ता है, लेकिन कड़ाके की इस ठंड का मुकाबला करने के लिए व्यक्तिगत स्तर पर सजगता ही सबसे बड़ी ढाल साबित होगी।

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