उत्तर प्रदेश

UP Police Constable Marriage Case Moradabad: खाकी की धौंस की निकली हवा, घुटनों पर आया बिन ब्याही मां को धोखा देने वाला सिपाही

UP Police Constable Marriage Case Moradabad: उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने रिश्तों की गरिमा और खाकी की साख दोनों को चर्चा में ला दिया है। मझोला थाना क्षेत्र की रहने वाली एक युवती ने जब अपनी अस्मत और बच्चे के हक के लिए आवाज उठाई, तो पूरा तंत्र हिल गया। एक सिपाही ने प्यार का नाटक कर युवती को (Betrayal in Romantic Relationships) इस कदर छला कि वह बिन ब्याही मां बन गई। समाज की बंदिशों और प्रेमी के इनकार के बीच फंसी इस पीड़िता ने जब हार नहीं मानी, तो अंततः कानून के रक्षक को ही कानून के कटघरे में खड़ा होना पड़ा।

UP Police Constable Marriage Case Moradabad
UP Police Constable Marriage Case Moradabad

शादी का झांसा और शारीरिक शोषण का काला खेल

युवती की आपबीती किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं है। करीब दो साल पहले उसकी मुलाकात अमरोहा के कुआंखेड़ा निवासी एक युवक से हुई थी, जो बाद में उत्तर प्रदेश पुलिस में सिपाही के पद पर चयनित हुआ। युवक ने शादी का झूठा वादा कर (Legal Action Against Fraud) पीड़िता के साथ लगातार शारीरिक संबंध बनाए। इस दौरान जब युवती गर्भवती हो गई, तो सिपाही और उसके रसूखदार परिवार का असली चेहरा सामने आ गया। उन्होंने न केवल शादी से इनकार कर दिया, बल्कि पीड़िता पर गर्भपात कराने का मानसिक दबाव भी बनाया।

डीएनए रिपोर्ट का फर्जी ड्रामा और पुलिसिया जांच

मामला तब और पेचीदा हो गया जब सिपाही के प्रशिक्षण के दौरान युवती ने एक बच्चे को जन्म दिया। सिपाही के पिता ने एक निजी लैब की कथित डीएनए रिपोर्ट पेश कर (DNA Profiling for Paternity) यह दावा कर दिया कि बच्चा उनके बेटे का नहीं है। इस क्रूर मजाक ने पीड़िता को मानसिक रूप से तोड़ दिया था। हालांकि, मुरादाबाद पुलिस और एसपी सिटी कुमार रणविजय सिंह ने मामले की गंभीरता को समझा और जैसे ही सरकारी स्तर पर डीएनए जांच और गिरफ्तारी की तलवार लटकी, आरोपी पक्ष के पैर उखड़ने लगे।

एफआईआर दर्ज होते ही बदला सिपाही का सुर

मुरादाबाद के मझोला थाने में 24 दिसंबर को जब सिपाही और उसके परिवार के 9 सदस्यों के खिलाफ संगीन धाराओं में मुकदमा दर्ज हुआ, तो खाकी की हनक दिखाने वाला प्रेमी (Criminal FIR Impact) तुरंत बैकफुट पर आ गया। जेल जाने के डर और नौकरी जाने के खतरे ने सिपाही को अपनी गलती मानने पर मजबूर कर दिया। जो परिवार कुछ दिन पहले तक बच्चे को अपनाने से इनकार कर रहा था, वही अब सुलह के लिए गिड़गिड़ाने लगा। पुलिस की सख्ती ने यहां न्याय की उम्मीद जगा दी।

पंचायत की शर्त और दो बीघा जमीन का बैनामा

सुलह की प्रक्रिया के दौरान युवती के पक्ष ने अपनी शर्तों को मजबूती से सामने रखा। समाज में युवती और उसके बच्चे के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए (Property Registration for Security) यह शर्त रखी गई कि शादी से पहले सिपाही को दो बीघा जमीन युवती के नाम करनी होगी। आरोपी पक्ष के पास अब कोई विकल्प नहीं बचा था। कानूनी कार्रवाई से बचने के लिए उन्होंने आनन-फानन में जमीन का बैनामा पीड़िता के नाम किया, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि भविष्य में वह और उसका बच्चा दर-दर न भटकें।

कोर्ट मैरिज और मंदिर में सात फेरों का मिलन

जमीन की रजिस्ट्री के बाद अमरोहा में इस प्रेम कहानी का एक सुखद अंत देखने को मिला। आरोपी सिपाही ने पहले युवती के साथ (Civil Marriage Documentation) कोर्ट में जाकर कानूनी तौर पर शादी के कागजों पर हस्ताक्षर किए। इसके तुरंत बाद, परिजनों की मौजूदगी में मंदिर में विधि-विधान से सात फेरे लेकर उसने युवती को पत्नी स्वीकार किया। वह अपने नवजात बेटे और पत्नी को सम्मान के साथ अपने घर ले गया, जिसे देखकर इलाके में पुलिस प्रशासन की जमकर तारीफ हो रही है।

एसपी सिटी का कड़ा रुख और वैधानिक चेतावनी

इस पूरे प्रकरण में एसपी सिटी कुमार रणविजय सिंह और मझोला पुलिस की भूमिका अत्यंत सराहनीय रही। उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल शादी कर लेना ही (Legal Verification of Marriage) इस मामले का अंत नहीं है। पुलिस ने सिपाही और उसके परिजनों से शादी के तमाम असली दस्तावेज और मैरिज सर्टिफिकेट की मांग की है। दस्तावेजों की सघन जांच के बाद ही पुलिस इस मामले में अपनी फाइनल रिपोर्ट लगाएगी, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि युवती के साथ दोबारा कोई छल न हो।

समाज के लिए एक बड़ा सबक और न्याय की जीत

मुरादाबाद की यह घटना समाज के उन लोगों के लिए एक कड़ा संदेश है जो महिलाओं की भावनाओं के साथ खिलवाड़ करते हैं। तकनीक और कानून के इस युग में (Womens Rights and Justice) अब किसी का शोषण कर बच निकलना मुमकिन नहीं है। यह जीत उस बिन ब्याही मां की है जिसने समाज के तानों के बावजूद अपने बच्चे के हक के लिए जंग लड़ी। साथ ही, यह पुलिस विभाग के उस मानवीय चेहरे को भी दर्शाता है जिसने कानून की मर्यादा को ध्यान में रखते हुए एक परिवार को उजड़ने से बचा लिया और न्याय सुनिश्चित किया।

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