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Iran protests international reaction: ईरान में कत्लेआम के बीच ट्रंप ने लगाई ललकार, तेहरान की सड़कों पर छिड़ी अंतिम जंग

Iran protests international reaction: ईरान इस वक्त अपने इतिहास के सबसे खौफनाक दौर से गुजर रहा है, जहां सरकार विरोधी प्रदर्शनों ने अब एक हिंसक गृहयुद्ध का रूप ले लिया है। मानवाधिकार संगठनों की रिपोर्ट रूह कंपा देने वाली है, जिसमें दावा किया गया है कि अब तक 2,000 से अधिक प्रदर्शनकारी अपनी जान गंवा चुके हैं। सड़कों पर उतरती इस (Rising death toll in Iran) ने पूरी दुनिया को हिलाकर रख दिया है, लेकिन ईरानी प्रशासन इसे बाहरी ताकतों की साजिश करार दे रहा है। जैसे-जैसे मौतों की संख्या बढ़ रही है, अंतरराष्ट्रीय बिरादरी की चिंताएं भी उतनी ही गहरी होती जा रही हैं।

Iran protests international reaction
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अली लारीजानी का अमेरिका और इजरायल पर सीधा वार

ईरान के राष्ट्रीय सुरक्षा प्रमुख अली लारीजानी ने इस पूरे रक्तपात के लिए सीधे तौर पर बाहरी दुश्मनों को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने एक बेहद आक्रामक बयान जारी करते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को ईरानी जनता का मुख्य कातिल घोषित कर दिया है। लारीजानी का आरोप है कि (Foreign interference in sovereign nations) के जरिए ईरान की संप्रभुता को चोट पहुंचाई जा रही है और प्रदर्शनकारियों को उकसाकर देश में अराजकता का माहौल पैदा किया जा रहा है। तेहरान का मानना है कि यह सब कुछ सत्ता परिवर्तन की एक सोची-समझी साजिश का हिस्सा है।

ट्रंप का ‘ट्रुथ सोशल’ पर धमाका और देशभक्तों को संदेश

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए ईरान की आग में घी डालने का काम किया है। उन्होंने ईरानी प्रदर्शनकारियों को ‘देशभक्त’ बताते हुए उन्हें अपने सरकारी संस्थानों पर कब्जा करने के लिए उकसाया है। ट्रंप ने अपने संदेश में (Encouraging anti government demonstrations) का स्पष्ट रुख अपनाते हुए कहा कि ईरानी जनता को अब पीछे नहीं हटना चाहिए क्योंकि ‘मदद आ रही है’। हालांकि, ट्रंप ने यह साफ नहीं किया कि यह मदद सैन्य होगी या कूटनीतिक, लेकिन उनके इस बयान ने तेहरान के सत्ता गलियारों में खलबली मचा दी है।

फांसी की सजा पर अमेरिका की कड़ी सैन्य चेतावनी

ईरान में प्रदर्शनकारियों को दी जाने वाली मौत की सजा पर ट्रंप प्रशासन ने अपना रुख बेहद सख्त कर लिया है। एक हालिया इंटरव्यू में डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि अगर ईरान ने मासूम लोगों को फांसी देना बंद नहीं किया, तो अमेरिका मूकदर्शक बनकर नहीं बैठेगा। इस तरह की (Threat of US military action) ने दोनों देशों के बीच तनाव को चरम पर पहुंचा दिया है। ट्रंप ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक सड़कों पर खून बहना बंद नहीं होता और मानवाधिकारों का सम्मान नहीं किया जाता, तब तक बातचीत की हर मेज और हर दरवाजा बंद रहेगा।

बैठकों का दौर रद्द और कूटनीतिक संबंधों में खटास

एक समय था जब चर्चा थी कि ईरान और अमेरिका बातचीत के जरिए अपने विवाद सुलझा सकते हैं, लेकिन अब वे संभावनाएं पूरी तरह खत्म होती नजर आ रही हैं। ट्रंप ने ईरानी अधिकारियों के साथ होने वाली सभी प्रस्तावित बैठकों को तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया है। कूटनीतिक स्तर पर (Cancellation of diplomatic talks) की यह घटना दर्शाती है कि अमेरिका अब ईरान की वर्तमान सत्ता को कोई रियायत देने के मूड में नहीं है। वाशिंगटन ने साफ कर दिया है कि वे केवल उन्हीं के साथ बात करेंगे जो अपनी जनता की आवाज सुनने को तैयार हैं।

आर्थिक बदहाली और सत्ता परिवर्तन की गूंज

ईरान में इस व्यापक असंतोष की जड़ें वहां की चरमराती अर्थव्यवस्था और गिरती मुद्रा में छिपी हैं। महंगाई और बेरोजगारी से त्रस्त जनता ने अब सीधे सत्ता के शीर्ष नेतृत्व को चुनौती देना शुरू कर दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि (Economic crisis and regime change) की यह मांग अब केवल आर्थिक सुधारों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ईरानी शासन की बुनियादी नीतियों के खिलाफ एक जनाक्रोश है। सरकारी टेलीविजन ने भी पहली बार दबे स्वर में स्वीकार किया है कि देश में कई ‘शहीद’ हुए हैं, जो स्थिति की गंभीरता को बयां करता है।

आयात शुल्क की मार और ईरान की घेराबंदी

डोनाल्ड ट्रंप केवल जुबानी जंग तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उन्होंने ईरान की आर्थिक घेराबंदी के लिए नए वित्तीय हथियारों का इस्तेमाल शुरू कर दिया है। उन्होंने घोषणा की है कि जो भी देश ईरान के साथ व्यापारिक संबंध बनाए रखेगा, अमेरिका उस पर 25 प्रतिशत का भारी आयात शुल्क लगाएगा। इस (Global trade sanctions impact) के कारण ईरान पूरी दुनिया में अलग-थलग पड़ सकता है। यह कदम ईरान के राजस्व के स्रोतों को सुखाने और वहां की सरकार पर आंतरिक दबाव बढ़ाने की एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

क्या गृहयुद्ध की ओर बढ़ रहा है ईरान?

अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों का मानना है कि अगर हिंसा का यह दौर नहीं रुका, तो ईरान में पूर्ण पैमाने पर गृहयुद्ध छिड़ सकता है। कुछ सूत्रों का तो यहां तक दावा है कि मरने वालों की वास्तविक संख्या सरकारी आंकड़ों से कहीं ज्यादा, यानी 12,000 से भी अधिक हो सकती है। इस (Internal conflict and instability) के माहौल में आम नागरिक सबसे ज्यादा पिस रहे हैं। अब देखना यह होगा कि क्या ईरानी नेतृत्व बातचीत का रास्ता चुनता है या फिर बाहरी दबाव और आंतरिक विद्रोह मिलकर तेहरान की सत्ता का तख्तापलट करने में सफल होते हैं।

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