Indian cricket team selection controversy: टीम इंडिया में ‘खिचड़ी’ पक रही है या साजिश, आकाश चोपड़ा ने चयनकर्ताओं की सरेआम ले ली क्लास
Indian cricket team selection controversy: भारतीय क्रिकेट गलियारों में इस वक्त हलचल तेज है क्योंकि न्यूजीलैंड के खिलाफ जारी वनडे सीरीज के बीच में ही टीम इंडिया को एक बड़ा बदलाव करना पड़ा है। स्टार ऑलराउंडर वॉशिंगटन सुंदर के चोटिल होकर बाहर होने के बाद चयनकर्ताओं ने आयुष बडोनी को टीम में शामिल किया है। हालांकि, इस फैसले से ज्यादा चर्चा उस सवाल की हो रही है जो पूर्व क्रिकेटर आकाश चोपड़ा ने उठाया है। चोपड़ा ने सीधे तौर पर (BCCI selection committee transparency) पर उंगली उठाते हुए पूछा है कि क्या टीम के कोच, कप्तान और चयनकर्ताओं के बीच वाकई कोई बातचीत होती है या सब अपनी ढपली अपना राग अलाप रहे हैं।

नीतीश कुमार रेड्डी और टीम मैनेजमेंट के बीच फंसी पहेली
आकाश चोपड़ा की नाराजगी के केंद्र में युवा ऑलराउंडर नीतीश कुमार रेड्डी हैं, जिन्हें पिछले काफी समय से टीम के साथ एक ‘टूरिस्ट’ की तरह रखा जा रहा है। चोपड़ा का मानना है कि 22 साल के इस प्रतिभावान खिलाड़ी को हर फॉर्मेट के स्क्वाड में जगह तो मिल रही है, लेकिन प्लेइंग इलेवन में उनकी जगह (National team squad rotation) की भेंट चढ़ रही है। नीतीश को टीम में शामिल करना चयनकर्ताओं की पसंद है, लेकिन उन्हें मैदान पर उतारना कोच गौतम गंभीर और कप्तान शुभमन गिल के हाथ में है, और यहीं पर दोनों पक्षों के बीच की खाई नजर आने लगती है।
दक्षिण अफ्रीका दौरा और वडोदरा वनडे की अनदेखी
चोपड़ा ने अपने सोशल मीडिया वीडियो में कई ऐसे उदाहरण दिए जहां नीतीश रेड्डी का इस्तेमाल किया जा सकता था। दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ सीरीज में जब ओस के कारण स्पिनर्स बेअसर हो रहे थे, तब भी नीतीश को (Bowling opportunities for youngsters) नहीं दी गईं। वडोदरा में हुए मैच में भी यही कहानी दोहराई गई। आकाश का सवाल जायज है कि अगर चयनकर्ता उन्हें एक बैलेंस प्रदान करने वाले ऑलराउंडर के रूप में देख रहे हैं, तो मैनेजमेंट उन्हें केवल बेंच गर्म करने के लिए क्यों बुलाता है?
हार्दिक पांड्या का बैकअप या सिर्फ एक नाम
नीतीश कुमार रेड्डी को भविष्य के लिए हार्दिक पांड्या के विकल्प के रूप में तैयार करने की बातें अक्सर होती रहती हैं। लेकिन चोपड़ा का तर्क है कि जब हार्दिक टीम में नहीं होते, तब भी नीतीश को (Backup players in cricket) के तौर पर वह महत्व नहीं मिलता जिसके वे हकदार हैं। या तो उनसे केवल बल्लेबाजी कराई जाती है या फिर बहुत कम गेंदबाजी, जिससे उनकी ऑलराउंड क्षमता को परखने का मौका ही नहीं मिल पाता। ऐसे में खिलाड़ी के आत्मविश्वास पर बुरा असर पड़ना लाजमी है।
गंभीर-अगरकर और गिल के बीच तालमेल की भारी कमी
आकाश चोपड़ा ने कोच गौतम गंभीर और मुख्य चयनकर्ता अजीत अगरकर की सोच के बीच के अंतर को सरेआम उजागर कर दिया है। उन्होंने पूछा कि क्या (Coaching staff vs selectors) की इस जंग में युवा खिलाड़ियों का करियर दांव पर लगा है? चयनकर्ता टीम का संतुलन बनाने के लिए ऑलराउंडर भेजते हैं, लेकिन टीम मैनेजमेंट तीन स्पिनर्स के साथ जाने की अपनी जिद पर अड़ा रहता है। यह असंगति दिखाती है कि भारतीय क्रिकेट के भविष्य को लेकर शीर्ष स्तर पर कोई एक राय नहीं बन पा रही है।
विजय हजारे ट्रॉफी या टीम इंडिया की बेंच
एक प्रतिभावान खिलाड़ी के लिए मैच प्रैक्टिस सबसे ज्यादा जरूरी होती है, लेकिन नीतीश रेड्डी के मामले में ऐसा नहीं हो रहा है। आकाश चोपड़ा ने कहा कि अगर नीतीश को प्लेइंग इलेवन का हिस्सा नहीं बनाना है, तो उन्हें (Domestic cricket participation benefits) के लिए विजय हजारे ट्रॉफी में खेलने देना चाहिए था। टीम के साथ यात्रा करने और मैच न खेलने से बेहतर है कि खिलाड़ी मैदान पर जाकर रन बनाए और विकेट ले, जिससे उसकी लय बनी रहे।
आंकड़ों में नीतीश रेड्डी का अब तक का सफर
अगर नीतीश कुमार रेड्डी के अंतरराष्ट्रीय करियर पर नजर डालें, तो उन्होंने अब तक केवल 2 वनडे और 4 टी20 मैच खेले हैं। हैरानी की बात यह है कि वह पिछले करीब एक साल से लगभग हर (Indian cricket squad selection) का हिस्सा रहे हैं। इतने लंबे समय तक मुख्य टीम के साथ रहने के बावजूद केवल 6 अंतरराष्ट्रीय मैच खेलना यह साबित करता है कि टीम मैनेजमेंट अभी भी उन पर पूरा भरोसा नहीं जता पा रहा है। यह स्थिति किसी भी उभरते हुए क्रिकेटर के मनोबल को तोड़ने के लिए काफी है।
भविष्य की राह और कड़े सवाल
आकाश चोपड़ा के इन तीखे सवालों ने बीसीसीआई के भीतर चल रही कार्यप्रणाली पर बहस छेड़ दी है। क्या भविष्य में हार्दिक पांड्या के विकल्प के रूप में कोई तैयार हो पाएगा? अगर (Player utilization strategies) में बदलाव नहीं किया गया, तो भारत कई बेहतरीन ऑलराउंडर्स को खो सकता है। अब देखना यह होगा कि क्या न्यूजीलैंड के खिलाफ बाकी बचे मैचों में आयुष बडोनी या नीतीश रेड्डी को अपनी प्रतिभा दिखाने का पूरा मौका मिलता है या फिर चयन और इस्तेमाल की यह पहेली आगे भी अनसुलझी ही रहेगी।



