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US Sanctions on Iran: ईरान की बर्बरता पर अमेरिका ने किया तगड़ा प्रहार, टीम ने बिछाया प्रतिबंधों का जाल

US Sanctions on Iran: ईरान में जारी भारी उथल-पुथल और प्रदर्शनकारियों पर हो रहे अत्याचारों को देखते हुए अमेरिका ने एक बार फिर कड़े तेवर अपनाए हैं। अमेरिकी विदेश विभाग ने स्पष्ट रूप से कहा है कि ईरानी अधिकारियों ने अपने ही नागरिकों की बुनियादी और जायज मांगों का जवाब (human rights violations) बंदूक की गोलियों और क्रूर दमन से दिया है। अमेरिका ने इस हिंसा की घोर निंदा करते हुए साफ कर दिया है कि वह निर्दोषों के खून बहाए जाने को चुपचाप नहीं देखेगा। इसी कड़ी में उन अधिकारियों की पहचान की गई है जो दमनकारी नीतियों को लागू करने के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार माने गए हैं।

US Sanctions on Iran
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सुरक्षा अधिकारियों और जेलों पर गिरी गाज

अमेरिकी प्रशासन ने कार्रवाई की इस फेहरिस्त में ईरान के प्रभावशाली सुरक्षा अधिकारियों को निशाने पर लिया है। इनमें सुप्रीम काउंसिल फॉर नेशनल सिक्योरिटी के सचिव अली लारिजानी का नाम प्रमुखता से शामिल है, जिन्हें नई (economic sanctions) की सूची में जगह दी गई है। सिर्फ व्यक्ति ही नहीं, बल्कि बदनाम ‘फरदीस जेल’ पर भी प्रतिबंध लगा दिए गए हैं। यह जेल महिलाओं के साथ किए गए अमानवीय और अपमानजनक व्यवहार के लिए कुख्यात रही है, जहां मानवाधिकारों की धज्जियां उड़ाई गई थीं।

तेल के अवैध कारोबार और शैडो बैंकिंग पर प्रहार

ईरान की आर्थिक कमर तोड़ने के लिए अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने उसके गुप्त वित्तीय तंत्र पर बड़ा हमला किया है। विभाग ने ईरान के ‘शैडो बैंकिंग नेटवर्क’ से जुड़े 18 व्यक्तियों और विभिन्न संस्थाओं पर सख्त कार्रवाई की है, जो (money laundering) के जरिए तेल और पेट्रोकेमिकल की बिक्री से होने वाली मोटी कमाई को ठिकाने लगाते थे। यह नेटवर्क वैश्विक वित्तीय नियमों को ठेंगा दिखाकर ईरानी शासन को अवैध रूप से फंड मुहैया करा रहा था, जिसे अब पूरी तरह से ब्लॉक करने की तैयारी कर ली गई है।

ट्रंप प्रशासन की ईरानी शासन को सीधी चेतावनी

व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलाइन लेविट ने स्पष्ट किया है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनकी पूरी टीम ईरान की मौजूदा स्थिति पर पल-पल की नजर बनाए हुए है। प्रशासन ने ईरानी सत्ता को दो टूक शब्दों में (geopolitical tension) के बीच चेतावनी दी है कि यदि प्रदर्शनकारियों की हत्याओं का सिलसिला नहीं रुका, तो उन्हें इसके बेहद गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। ट्रंप का मानना है कि शासन को अंतरराष्ट्रीय मंच पर जवाबदेह ठहराना आवश्यक है ताकि भविष्य में ऐसी हिंसा की पुनरावृत्ति न हो।

प्रदर्शनकारियों के समर्थन में खड़ा हुआ अमेरिका

वाशिंगटन ने पूरी दुनिया के सामने यह दोहराया है कि वह ईरान के उन आम लोगों के साथ खड़ा है जो अपने हक की लड़ाई लड़ रहे हैं। अमेरिका का मुख्य उद्देश्य ईरानी शासन को (global financial system) से पूरी तरह अलग-थलग करना है ताकि उनकी दमनकारी मशीनरी को मिलने वाला पैसा रुक सके। व्हाइट हाउस का मानना है कि जब तक शासन को आर्थिक चोट नहीं पहुंचेगी, तब तक वे आम जनता की आवाज को दबाने की कोशिश करते रहेंगे।

सैन्य कार्रवाई सहित सभी विकल्प टेबल पर मौजूद

ईरान में बढ़ती महंगाई और आसमान छूती जीवनयापन की लागत ने जनता को सड़कों पर उतरने को मजबूर कर दिया है, लेकिन सरकार ने इंटरनेट पर पाबंदी लगाकर उनकी आवाज दबाने की कोशिश की है। इस तनावपूर्ण माहौल में अमेरिका ने संकेत दिया है कि स्थिति को नियंत्रित करने के लिए (military options) भी खुले रखे गए हैं। डोनाल्ड ट्रंप ने पहले भी कहा था कि वे स्थिति पर नजर रखेंगे और जरूरत पड़ने पर किसी भी हद तक जाने से परहेज नहीं करेंगे।

दशकों की सबसे भीषण हिंसा का गवाह बना ईरान

ईरान में दिसंबर से शुरू हुआ यह विरोध प्रदर्शन अब केवल आर्थिक मुद्दों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने एक बड़ी राजनीतिक क्रांति का रूप ले लिया है। सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई भीषण (violent clashes) में मरने वालों का आंकड़ा चौंकाने वाला है। अलग-अलग मानवाधिकार संगठनों की रिपोर्ट के मुताबिक, इस हिंसा में मृतकों की संख्या 3,000 से लेकर 12,000 के पार तक बताई जा रही है। इसे ईरान के इतिहास में पिछले कई दशकों का सबसे खूनी संघर्ष माना जा रहा है।

अधिकतम दबाव की नीति और भविष्य की रणनीति

ईरानी शासन ने हमेशा की तरह इन प्रदर्शनों का दोष बाहरी ताकतों, विशेषकर अमेरिका और इजरायल पर मढ़ने की कोशिश की है। हालांकि, ट्रंप प्रशासन अपनी (maximum pressure policy) पर अडिग है, जिसके तहत ईरान के तेल निर्यात को शून्य पर लाने और उसकी वित्तीय पहुंच को पूरी तरह रोकने का लक्ष्य रखा गया है। अमेरिका का मानना है कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय आक्रामकता को रोकने के लिए यह आर्थिक घेराबंदी सबसे कारगर हथियार साबित होगी।

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