NIAInvestigation – सोशल मीडिया के जरिये आईएस विचारधारा फैलाने का खुलासा
NIAInvestigation – देश में प्रतिबंधित आतंकी संगठन आईएसआईएस की विचारधारा फैलाने के आरोप में राष्ट्रीय जांच एजेंसी को अहम सुराग मिले हैं। रांची स्थित एनआईए की टीम ने अपनी जांच में पाया है कि मध्यप्रदेश के रतलाम निवासी राहुल सेन, जिसने धर्म परिवर्तन के बाद उमर बहादुर नाम अपनाया, सोशल मीडिया के विभिन्न मंचों पर कई फर्जी पहचान से सक्रिय था। एजेंसी के अनुसार, वह अलग-अलग नामों से प्रोफाइल बनाकर उन पर कट्टरपंथ से जुड़े वीडियो और सामग्री साझा करता था।

कई नामों से संचालित किए खाते
जांच में सामने आया है कि आरोपी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कई नामों से खाते बनाए और उनका संचालन स्वयं करता था। इन खातों के जरिये वह आईएसआईएस से जुड़ी सामग्री अपलोड करता और युवाओं तक उसे पहुंचाने की कोशिश करता था। एनआईए के मुताबिक, वह वीडियो को संपादित कर उन्हें इस तरह प्रस्तुत करता था कि वे अधिक प्रभावी और आकर्षक लगें।
जांच एजेंसी को उसके मोबाइल फोन से कई चैट और डिजिटल साक्ष्य मिले हैं, जिनमें कथित तौर पर युवाओं को संगठन से जुड़ने के लिए प्रेरित करने की बातें दर्ज हैं।
अलग-अलग राज्यों में संपर्क
एनआईए की पड़ताल में यह भी सामने आया कि आरोपी ने महाराष्ट्र, गोवा, कर्नाटक, मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश, पंजाब और बिहार जैसे राज्यों में संपर्क स्थापित करने की कोशिश की थी। एजेंसी का मानना है कि यह नेटवर्क विचारधारा के प्रचार-प्रसार के उद्देश्य से तैयार किया जा रहा था।
14 सितंबर 2023 से वह न्यायिक हिरासत में है और मामले की सुनवाई जारी है। जांच एजेंसी डिजिटल साक्ष्यों की फॉरेंसिक जांच भी करवा रही है।
अंतरराष्ट्रीय संपर्क की पुष्टि
जांच के दौरान यह तथ्य भी सामने आया कि राहुल उर्फ उमर का संपर्क कथित रूप से सीरिया में सक्रिय आईएस से जुड़े एक व्यक्ति से था, जिसे अबू उमर के नाम से जाना जाता है। एजेंसी के अनुसार दोनों सोशल मीडिया के माध्यम से जुड़े थे। पूछताछ में आरोपी ने विदेश जाकर संगठन से जुड़ने की इच्छा जताई थी।
इससे पहले उसके एक सहयोगी के विदेशी संपर्कों की भी पुष्टि जांच में हो चुकी है। एजेंसी का कहना है कि इन सभी पहलुओं को जोड़कर पूरे नेटवर्क की तस्वीर स्पष्ट की जा रही है।
डिजिटल मंचों का इस्तेमाल
एनआईए के अनुसार, आरोपी ने विभिन्न नामों से इंस्टाग्राम और टेलीग्राम पर चैनल बनाए थे। इन मंचों के माध्यम से ऑडियो, वीडियो और दस्तावेज साझा किए जाते थे। जांच में यह भी संकेत मिला है कि कुछ चैनलों पर हथियारों के साथ तस्वीरें साझा की गई थीं, जिन्हें कथित रूप से प्रचार के उद्देश्य से इस्तेमाल किया गया।
एजेंसी का कहना है कि आईएसआईएस जैसे संगठन अब सीधे हमलों की बजाय डिजिटल माध्यमों से युवाओं को प्रभावित करने की रणनीति पर अधिक जोर दे रहे हैं।
युवाओं को बहकाने की कोशिश
मामले में जिन युवाओं से पूछताछ की गई, उनमें से कई ने बताया कि उन्हें धार्मिक और आर्थिक प्रलोभन देकर प्रभावित करने की कोशिश की गई थी। एनआईए ने इस सिलसिले में 38 लोगों के बयान दर्ज किए हैं।
जांच में यह भी सामने आया कि कुछ लोगों को कथित रूप से विदेश में बेहतर जीवन, धार्मिक पुरस्कार और आर्थिक लाभ का लालच दिया गया था। एजेंसी इन दावों की पुष्टि के लिए सभी साक्ष्यों की बारीकी से जांच कर रही है।
फिलहाल एनआईए मामले की विस्तृत जांच में जुटी है और अदालत में आरोपपत्र दाखिल करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।



