Thyroid Awareness Month 2026: गर्भावस्था में भारी पड़ सकता है थायरॉइड का लोचा, जान लें ये जरूरी बातें
Thyroid Awareness Month 2026: हर साल जनवरी के महीने को दुनिया भर में थायरॉइड जागरूकता माह के रूप में मनाया जाता है। इस मुहिम का सबसे बड़ा उद्देश्य लोगों को थायरॉइड ग्रंथि के कार्यों और उससे जुड़ी पेचीदगियों के प्रति शिक्षित करना है। हमारी गर्दन के ठीक सामने स्थित यह छोटी सी ग्रंथि शरीर के मेटाबॉलिज्म को नियंत्रित करने वाले महत्वपूर्ण हॉर्मोन बनाती है। (Endocrine System Functions) को सुचारू रूप से चलाने के लिए थायरॉइड का संतुलित रहना अनिवार्य है, क्योंकि इसकी थोड़ी सी भी गड़बड़ी शरीर के कई अंगों की कार्यक्षमता को प्रभावित कर सकती है।

गर्भावस्था में थायरॉइड हॉर्मोन की बढ़ती मांग
गर्भावस्था एक ऐसा समय है जब महिला के शरीर में व्यापक हॉर्मोनल बदलाव होते हैं। इस दौरान मां और गर्भ में पल रहे शिशु के विकास के लिए थायरॉइड हॉर्मोन की जरूरत पहले के मुकाबले काफी बढ़ जाती है। (Pregnancy Hormonal Changes) के इस दौर में थायरॉइड स्टिमुलेटिंग हॉर्मोन (TSH) का स्तर ऊपर-नीचे होना सामान्य बात है, लेकिन यदि यह असंतुलन अधिक हो जाए, तो यह मां और बच्चे दोनों के लिए जोखिम पैदा कर सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, थायरॉइड ग्रंथि का सही संचालन ही एक स्वस्थ गर्भावस्था की नींव रखता है।
हाइपो और हाइपरथायरॉइडिज्म का मां पर असर
गाइनोकॉलोजिस्ट डॉ. लिपि शर्मा के मुताबिक, गर्भावस्था में थायरॉइड असंतुलन दो प्रकार का हो सकता है। जब हॉर्मोन कम बनता है तो उसे हाइपोथायरॉइडिज्म कहते हैं और जब अधिक बनता है तो उसे हाइपरथायरॉइडिज्म कहा जाता है। (Maternal Health Risks) की बात करें तो इसकी वजह से मां में एनीमिया, अत्यधिक थकान, जोड़ों में दर्द और हाई ब्लड प्रेशर जैसी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं। यदि समय रहते इसका इलाज न किया जाए, तो डिलीवरी के बाद डिप्रेशन (Postpartum Depression) का खतरा भी कई गुना बढ़ जाता है।
शिशु के दिमागी विकास पर पड़ सकता है बुरा प्रभाव
मां के शरीर में थायरॉइड का स्तर सीधा असर गर्भ में पल रहे शिशु पर डालता है। हॉर्मोन की कमी के कारण गर्भपात, समय से पहले जन्म या बच्चे का कम वजन के साथ पैदा होने का खतरा बढ़ जाता है। (Fetal Brain Development) के लिए थायरॉइड हॉर्मोन सबसे महत्वपूर्ण तत्व माना जाता है। इसकी कमी से भविष्य में बच्चे को सीखने में परेशानी, मानसिक विकास में देरी और अन्य शारीरिक विकास संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है, इसलिए गर्भावस्था के शुरुआती हफ्तों में ही इसकी जांच अनिवार्य है।
शुरुआती महीनों में हाइपरथायरॉइडिज्म के पीछे का विज्ञान
गर्भावस्था के पहले तीन से चार महीनों के दौरान अक्सर महिलाओं में हाइपरथायरॉइडिज्म के लक्षण देखे जाते हैं। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि प्रेगनेंसी हॉर्मोन का उच्च स्तर थायरॉइड ग्रंथि को अधिक थायरॉक्सिन बनाने के लिए उत्तेजित करता है। (Thyroxine Hormone Regulation) की यह स्थिति अक्सर अस्थाई होती है और अपने आप ठीक हो जाती है। हालांकि, यदि महिला को जुड़वा गर्भ है या बहुत ज्यादा उल्टियां हो रही हैं, तो विशेषज्ञ की देखरेख में विशेष उपचार की जरूरत पड़ सकती है।
समय पर पहचान और प्रभावी उपचार की राह
थायरॉइड की समस्या का पता चलते ही डॉक्टर या तो कमी वाले हॉर्मोन की पूर्ति के लिए दवाएं देते हैं या बढ़े हुए हॉर्मोन को नियंत्रित करने का प्रयास करते हैं। इलाज के दौरान समय-समय पर (Blood Test Monitoring) करना बहुत जरूरी होता है ताकि दवाओं की खुराक को जरूरत के अनुसार एडजस्ट किया जा सके। राहत की बात यह है कि सही समय पर उपचार मिलने से डिलीवरी की प्रक्रिया या तरीके पर थायरॉइड का कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ता और बच्चा पूरी तरह स्वस्थ पैदा हो सकता है।
डिलीवरी के बाद थायरॉइडाइटिस का बढ़ता जोखिम
बच्चे के जन्म के बाद भी थायरॉइड का खतरा खत्म नहीं होता। डिलीवरी के बाद शुरुआती 12 महीनों के भीतर ‘थायरॉइडाइटिस’ नामक ऑटोइम्यून सूजन हो सकती है। (Autoimmune Thyroid Conditions) का शिकार वे महिलाएं ज्यादा होती हैं जिनके परिवार में थायरॉइड का इतिहास रहा हो। यदि डिलीवरी के बाद बहुत ज्यादा थकान या उदासी महसूस हो, तो इसे केवल कमजोरी न समझें। यह थायरॉइड की गड़बड़ी का संकेत हो सकता है, जिसकी जांच तुरंत करानी चाहिए ताकि भविष्य में होने वाली समस्याओं से बचा जा सके।
स्वस्थ भविष्य के लिए डॉक्टर की विशेष सलाह
गर्भावस्था में थायरॉइड की जांच कोई महंगा सौदा नहीं है, लेकिन यह मां और बच्चे के जीवन को सुरक्षित बनाने का सबसे सरल तरीका है। (Iodine Rich Diet) का सेवन करना और डॉक्टर द्वारा बताई गई दवाओं को नियमित रूप से लेना ही इस समस्या का एकमात्र समाधान है। जल्दी पहचान और सही मैनेजमेंट के जरिए हम अगली पीढ़ी को मानसिक और शारीरिक रूप से मजबूत बना सकते हैं। याद रखें, जागरूकता ही थायरॉइड जैसी बीमारियों के खिलाफ सबसे बड़ा हथियार है, जिसे अपनाकर एक खुशहाल मातृत्व का आनंद लिया जा सकता है।



