Mallikarjun Kharge Attack on PM Modi: खरगे का मोदी पर प्रचंड प्रहार, बोले- ‘चायवाला’ सिर्फ वोट पाने का ढोंग…
Mallikarjun Kharge Attack on PM Modi: कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने केंद्र की सत्ता के शीर्ष नेतृत्व पर सीधा और तीखा हमला बोलते हुए राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के (Political Accountability in India) पुराने दावों को कटघरे में खड़ा करते हुए आरोप लगाया कि खुद को ‘चायवाला’ बताना केवल जनता की सहानुभूति और वोट बटोरने का एक जरिया मात्र था। खरगे ने प्रधानमंत्री की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि जो व्यक्ति वास्तव में जमीनी संघर्ष से निकला हो, वह गरीबों के प्रति ऐसी नीतियां कभी नहीं बना सकता।

चाय की केतली और चुनावी नाटक का सच
कांग्रेस अध्यक्ष ने अपने संबोधन के दौरान प्रधानमंत्री के अतीत से जुड़े दावों को चुनौती देते हुए कई कड़े सवाल पूछे। खरगे ने तंज कसते हुए कहा कि (Leadership Transparency and Authenticity) क्या प्रधानमंत्री ने कभी वास्तव में चाय बनाई है या वह कभी केतली लेकर रेल के डिब्बों में यात्रियों को चाय पिलाने गए हैं। उनके अनुसार, यह पूरी कहानी एक सोची-समझी पटकथा का हिस्सा है जिसका उद्देश्य गरीबों को गुमराह करना है, जबकि सच्चाई यह है कि वर्तमान सरकार की नीतियां केवल आम आदमी को सताने और पूंजीपतियों को लाभ पहुंचाने वाली हैं।
मनरेगा के अस्तित्व पर मंडराता हुआ खतरा
खरगे ने केंद्र सरकार के ‘विकसित भारत-जी राम जी अधिनियम’ को लेकर गंभीर चिंता जताते हुए इसे ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए आत्मघाती कदम बताया है। उन्होंने ‘मनरेगा बचाओ मोर्चा’ के मंच से हुंकार भरते हुए कहा कि (Rural Employment Guarantee Scheme) महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी कानून को कमजोर करना या खत्म करना गरीबों को ‘बंधुआ मजदूर’ बनाने की एक गहरी साजिश है। खरगे का मानना है कि यदि मनरेगा जैसी सुरक्षा कवच वाली योजना को हटाया गया, तो ग्रामीण भारत के मजदूरों के पास जीवन यापन का कोई सम्मानजनक साधन नहीं बचेगा।
बजट सत्र में सरकार को घेरने की रणनीति
आगामी 28 जनवरी से शुरू हो रहे संसद के बजट सत्र को लेकर मुख्य विपक्षी दल ने अपनी कमर पूरी तरह कस ली है। कांग्रेस अध्यक्ष ने स्पष्ट कर दिया है कि (Parliamentary Budget Session Strategy) मनरेगा के मुद्दे पर सदन के भीतर सरकार से जवाब मांगा जाएगा और इस पर किसी भी तरह का समझौता नहीं होगा। कांग्रेस इस सत्र में सरकार को रोजगार के मोर्चे पर विफल बताने और ग्रामीण विकास की अनदेखी करने जैसे विषयों पर पुरजोर तरीके से घेरने की तैयारी कर रही है, ताकि जनता के बुनियादी अधिकारों की रक्षा की जा सके।
नेहरू के विजन और वर्तमान बुनियादी ढांचे की तुलना
भाषण के दौरान खरगे ने देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू के योगदान को याद करते हुए वर्तमान सरकार की उपलब्धियों को शून्य करार दिया। उन्होंने सवाल किया कि (Public Infrastructure Development Issues) मोदी सरकार ने पिछले दस वर्षों में ऐसा कौन सा ऐतिहासिक प्रोजेक्ट शुरू किया है जिसकी तुलना नेहरू काल के बड़े बांधों या संस्थानों से की जा सके। खरगे का तर्क है कि सत्ताधारी दल केवल पुराने कार्यों का श्रेय लेने और उद्घाटन समारोहों में व्यस्त रहता है, जबकि धरातल पर नया निर्माण न के बराबर है।
मोदी-शाह की जोड़ी और चुनावी मशीनीकरण का आरोप
कांग्रेस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर खरगे के भाषण के उन अंशों को भी प्रमुखता से साझा किया है जिसमें उन्होंने देश के शासन तंत्र पर निशाना साधा है। खरगे ने कहा कि (National Governance and Policy Making) देश को केवल दो लोग चला रहे हैं—नरेंद्र मोदी और अमित शाह—और उनका पूरा ध्यान केवल चुनाव प्रचार पर रहता है। उनके अनुसार, यह जोड़ी देश के विकास के लिए काम करने के बजाय हर समय चुनावी मोड में रहती है, जिससे जनता के वास्तविक मुद्दे पीछे छूटते जा रहे हैं।
बुलेट ट्रेन के दावों और रेल पटरियों की हकीकत
रेलवे के आधुनिकीकरण और बुलेट ट्रेन जैसे महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट्स पर भी कांग्रेस अध्यक्ष ने जमकर तंज कसे। उन्होंने कहा कि (Railway Sector Challenges in India) सरकार बुलेट ट्रेन लाने के बड़े-बड़े दावे तो करती है, लेकिन हकीकत यह है कि पुरानी पटरियों को बदलने और नई पटरियां बिछाने तक का काम समय पर पूरा नहीं हो पा रहा है। खरगे ने आरोप लगाया कि रेल सुरक्षा और सुविधाओं पर ध्यान देने के बजाय प्रधानमंत्री केवल नई ट्रेनों को हरी झंडी दिखाने की तस्वीरों तक सीमित रह गए हैं।
मजदूरों के दर्द और सत्ता की संवेदनहीनता
आर्टिकल के अंतिम भाग में खरगे ने मजदूरों के प्रति सरकार के रवैये को संवेदनहीन बताया और कहा कि अगर प्रधानमंत्री ने कभी स्वयं मजदूरी की होती, तो उन्हें मेहनतकश लोगों की पीड़ा समझ आती। उन्होंने कहा कि (Social Welfare Policy Gaps) गरीबों के कल्याण के नाम पर केवल खोखली घोषणाएं की जा रही हैं, जबकि वास्तविकता में मजदूरों का शोषण बढ़ रहा है। खरगे ने आह्वान किया कि अब समय आ गया है जब देश की जनता को इस चुनावी नाटक और वास्तविक विकास के बीच के अंतर को समझना होगा



