Jharkhand government fund Scam: झारखंड में 116 करोड़ का सरकारी धन घोटाला, अब ईडी कसेगी शिकंजा
Jharkhand government fund Scam: झारखंड में सरकारी खजाने की लूट का एक बड़ा मामला सामने आया है, जिसमें अब प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की एंट्री हो चुकी है। बिजली और पर्यटन विभाग से जुड़े लगभग 116 करोड़ रुपये के इस बहुचर्चित घोटाले में सीआईडी की जांच के बाद अब मनी लाउंड्रिंग के तहत कार्रवाई शुरू की गई है। इस बड़े (Financial Fraud) मामले ने राज्य की राजनीति और प्रशासनिक गलियारे में हलचल पैदा कर दी है, क्योंकि सरकारी धन के दुरुपयोग को लेकर ईडी ने कड़ा रुख अपनाया है।

ईडी की नई चार्जशीट और आरोपियों की बढ़ती मुश्किलें
प्रवर्तन निदेशालय ने इस मामले में मनी लाउंड्रिंग का केस दर्ज करते हुए अपनी जांच की दिशा तय कर ली है। ईडी की इस सक्रियता के बाद घोटाले के मुख्य आरोपियों की नींद उड़ गई है, क्योंकि अब अवैध संपत्ति और धन के हस्तांतरण की गहराई से (Money Laundering) जांच की जाएगी। सीआईडी इस मामले में पहले ही पांच चार्जशीट दाखिल कर चुकी है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि घोटाले की जड़ें काफी गहरी हैं और इसमें कई प्रभावशाली लोग शामिल हो सकते हैं।
जेल में बंद आरोपियों से शुरू होगी पूछताछ
इस घोटाले के मुख्य आरोपी वर्तमान में रांची की होटवार जेल में बंद हैं, जिनसे पूछताछ के लिए ईडी ने विशेष अदालत से अनुमति प्राप्त कर ली है। जांच एजेंसी उन रास्तों का पता लगाएगी जिनके जरिए सरकारी फंड को निजी खातों में (PMLA Court) स्थानांतरित किया गया था। आरोपियों में बैंक मैनेजर लोलस लकड़ा और बिचौलिया रोशन चतुर्वेदी जैसे नाम शामिल हैं, जिनसे पूछताछ के दौरान कई नए और चौंकाने वाले खुलासे होने की पूरी संभावना जताई जा रही है।
साल 2026 का पहला बड़ा आर्थिक अपराध मामला
हैरानी की बात यह है कि ईडी ने इस मामले को साल 2026 के पहले बड़े आर्थिक अपराध के रूप में दर्ज किया है। ईसीआईआर संख्या 1/2026 के तहत दर्ज इस मामले में आने वाले दिनों में कुछ (Enforcement Directorate) अधिकारियों की गिरफ्तारियां भी संभव हैं। जांच का दायरा केवल जेल में बंद लोगों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि उन सफेदपोश चेहरों तक भी पहुंचेगा जिन्होंने पर्दे के पीछे रहकर इस पूरी साजिश को अंजाम देने में मदद की थी।
घोटाले में शामिल बैंक अधिकारियों और बिचौलियों का नेटवर्क
इस पूरे खेल में केवल सरकारी कर्मचारी ही नहीं, बल्कि बैंकिंग क्षेत्र के कुछ अधिकारियों की मिलीभगत भी उजागर हुई है। जेटीडीसीएल के अधिकारियों के साथ मिलकर केनरा बैंक और सेंट्रल बैंक के प्रबंधकों ने कथित तौर पर नियमों को ताक पर रखकर (Banking Sector Integrity) काम किया। फर्जी दस्तावेज और जाली खातों के जरिए करोड़ों रुपये की हेराफेरी की गई, जिसमें संदीप कुमार और लोकेश्वर साह जैसे बिचौलियों ने अहम भूमिका निभाई थी।
बिजली और पर्यटन विभाग को बनाया गया निशाना
आरोपियों ने बहुत ही सुनियोजित तरीके से झारखंड टूरिज्म डेवलपमेंट कॉरपोरेशन और झारखंड ऊर्जा उत्पादन निगम लिमिटेड जैसी महत्वपूर्ण संस्थाओं को अपना निशाना बनाया। पर्यटन विभाग से करीब 10.40 करोड़ और बिजली विभाग के मास्टर ट्रस्ट से 106 करोड़ रुपये की (Public Asset Misappropriation) हेराफेरी की गई है। 2024 में धुर्वा थाना में दर्ज हुई प्राथमिकी के बाद अब यह मामला एक ऐसे मोड़ पर है जहां दोषियों का बचना नामुमकिन नजर आ रहा है।



