BiharPolicy – सड़क परियोजनाओं में स्थानीय ठेकेदारों को प्राथमिकता का फैसला
BiharPolicy – बिहार सरकार ने राज्य में सड़क निर्माण से जुड़े कार्यों को लेकर एक अहम नीतिगत निर्णय लिया है। नई व्यवस्था के तहत 25 लाख रुपये से लेकर 50 करोड़ रुपये तक की लागत वाली परियोजनाओं में स्थानीय ठेकेदारों को प्राथमिकता दी जाएगी। इस फैसले को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में मंजूरी मिली। सरकार का मानना है कि इस कदम से राज्य के भीतर काम करने वाले संवेदकों को अधिक अवसर मिलेंगे और स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा।

कैबिनेट बैठक में प्रस्ताव को मिली मंजूरी
बुधवार शाम आयोजित मंत्रिमंडल की बैठक में इस प्रस्ताव पर सहमति जताई गई। इसके तहत बिहार लोक निर्माण संहिता में आवश्यक संशोधन किए जाएंगे, ताकि नई नीति को प्रभावी तरीके से लागू किया जा सके। सरकार के अनुसार, इस बदलाव से राज्य स्तरीय ठेकेदारों की भागीदारी बढ़ेगी और उन्हें बड़े पैमाने पर परियोजनाओं में शामिल होने का मौका मिलेगा।
स्थानीय स्तर पर बढ़ेंगे रोजगार के अवसर
इस निर्णय का सीधा असर स्थानीय रोजगार पर पड़ने की उम्मीद जताई जा रही है। छोटे और मध्यम स्तर के ठेकेदार, जो पहले बड़े टेंडरों में प्रतिस्पर्धा करने में कठिनाई महसूस करते थे, अब उन्हें अधिक अवसर मिल सकेंगे। साथ ही, इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलने की संभावना है, क्योंकि निर्माण कार्यों में जुड़े अन्य क्षेत्रों को भी लाभ होगा।
बजट में पहले ही किया गया था प्रावधान
राज्य सरकार ने पहले ही 2026-27 के बजट में सड़क निर्माण और ग्रामीण विकास के लिए बड़ी राशि निर्धारित की थी। उस समय पथ निर्माण विभाग और ग्रामीण कार्य विभाग के लिए 18,716 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया था। विधानसभा में चर्चा के दौरान यह भी बताया गया था कि बेहतर कनेक्टिविटी राज्य के विकास के लिए जरूरी है और इसी दिशा में कई नई योजनाओं को स्वीकृति दी गई है।
नई परियोजनाओं को मिल चुकी है मंजूरी
सरकार की ओर से यह भी जानकारी दी गई थी कि सड़क और पुल निर्माण से जुड़ी कई बड़ी परियोजनाओं को मंजूरी दी जा चुकी है। इनमें जेपी गंगा पथ के विस्तार सहित कई योजनाएं शामिल हैं। इन परियोजनाओं पर हजारों करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं, जिससे राज्य में बुनियादी ढांचे को मजबूत बनाने का लक्ष्य रखा गया है।
वित्तीय संसाधनों का विविध स्रोत
सड़क निर्माण परियोजनाओं के लिए केवल राज्य बजट पर निर्भरता नहीं है। सरकार विभिन्न वित्तीय संस्थानों जैसे एडीबी, विश्व बैंक और नाबार्ड से भी संसाधन जुटाती है। वहीं, राष्ट्रीय राजमार्गों का निर्माण केंद्र सरकार के सहयोग से किया जाता है। इस बहुस्तरीय वित्तीय व्यवस्था के कारण बड़े पैमाने पर परियोजनाओं को गति मिल रही है।
विकास योजनाओं की प्रगति पर जोर
सरकार ने यह भी बताया कि पिछले कुछ समय में बड़ी संख्या में परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है और उनमें से कई पर काम चल रहा है। कई योजनाएं निर्माण के अलग-अलग चरणों में हैं, जबकि कुछ को ठेकेदारों को सौंप दिया गया है। इस पूरी प्रक्रिया का उद्देश्य राज्य में बेहतर सड़क नेटवर्क तैयार करना और विकास को गति देना है।
नीति से जुड़े व्यापक संकेत
विशेषज्ञ मानते हैं कि इस तरह के फैसले से स्थानीय उद्योग और ठेकेदारी क्षेत्र को मजबूती मिल सकती है। साथ ही, यह कदम राज्य के भीतर संसाधनों के बेहतर उपयोग की दिशा में भी अहम माना जा रहा है। आने वाले समय में इस नीति के प्रभाव का आकलन परियोजनाओं की प्रगति और स्थानीय भागीदारी के आधार पर किया जाएगा।