CabinetOath – बिहार में सीमित मंत्रिमंडल के साथ हुई सम्राट सरकार की शुरुआत
CabinetOath – बिहार में नई सरकार के गठन की प्रक्रिया के तहत आज एक अहम चरण पूरा होने जा रहा है। मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी संभालने जा रहे सम्राट चौधरी के साथ शपथ ग्रहण समारोह में केवल दो अन्य नेता शामिल होंगे। जानकारी के अनुसार, इस प्रारंभिक चरण में सीमित मंत्रिमंडल के साथ सरकार कामकाज शुरू करेगी। शपथ समारोह में राज्यपाल द्वारा जेडीयू के वरिष्ठ नेताओं को उपमुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाई जाएगी।

केवल दो डिप्टी सीएम के साथ शुरुआत
सूत्रों के मुताबिक, आज होने वाले कार्यक्रम में सम्राट चौधरी के साथ जेडीयू के बिजेंद्र प्रसाद यादव और विजय कुमार चौधरी उपमुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। यह फैसला दर्शाता है कि फिलहाल सरकार छोटे दायरे में शुरुआत कर रही है और बाकी मंत्रियों को बाद के चरण में शामिल किया जाएगा। आम तौर पर ऐसे मौकों पर बड़ी संख्या में मंत्री शपथ लेते हैं, लेकिन इस बार तस्वीर अलग नजर आ रही है।
कैबिनेट विस्तार बाद में होने के संकेत
सरकार का पूरा मंत्रिमंडल अभी तय नहीं हुआ है। माना जा रहा है कि विधानसभा में बहुमत साबित करने के बाद ही कैबिनेट विस्तार किया जाएगा। उस दौरान भाजपा, जेडीयू के अलावा अन्य सहयोगी दलों—जैसे लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास), हिन्दुस्तानी आवाम मोर्चा और राष्ट्रीय लोक मोर्चा—के नेताओं को भी मंत्री पद दिया जा सकता है। इससे गठबंधन के सभी दलों को प्रतिनिधित्व मिलने की संभावना है।
मंत्रियों की सूची पर अभी सहमति नहीं
राजनीतिक हलकों में यह चर्चा है कि मंत्रियों की सूची को लेकर गठबंधन के प्रमुख दलों के बीच अभी पूरी सहमति नहीं बन पाई है। यही वजह है कि पहले चरण में सीमित शपथ ग्रहण का फैसला लिया गया। कुछ नेताओं के बयानों से भी यह संकेत मिला था कि मंत्रिमंडल को लेकर बातचीत जारी है और अंतिम निर्णय अभी बाकी है।
बहुमत परीक्षण के बाद तेज होगी प्रक्रिया
सूत्र बताते हैं कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी जल्द ही विधानसभा सत्र बुलाकर अपना बहुमत साबित करेंगे। इसके बाद कैबिनेट विस्तार की प्रक्रिया तेज हो सकती है। संभावना जताई जा रही है कि मई के शुरुआती दिनों में, अन्य राज्यों के चुनाव परिणामों के बाद, मंत्रिमंडल को अंतिम रूप दिया जाएगा।
सहयोगी दलों की भूमिका अहम
एनडीए गठबंधन में शामिल दलों के बीच मंत्रालयों के बंटवारे को लेकर भी बातचीत चल रही है। भाजपा और जेडीयू के बीच शुरुआती सहमति बनने के बाद ही अन्य सहयोगी दलों से चर्चा आगे बढ़ेगी। इसके साथ ही विधानसभा अध्यक्ष के पद को लेकर भी राजनीतिक समीकरण बन सकते हैं, जो इस प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा होगा।
नई सरकार की कार्यशैली पर नजरें
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सीमित मंत्रिमंडल के साथ शुरुआत करना एक रणनीतिक कदम हो सकता है, जिससे सरकार पहले स्थिरता सुनिश्चित करे और फिर विस्तार की ओर बढ़े। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि नई सरकार किस दिशा में काम करती है और गठबंधन के भीतर तालमेल किस तरह स्थापित होता है।



