CongressCrisis – बिहार कांग्रेस में असंतोष, प्रदेश नेतृत्व बदलने की मांग तेज
CongressCrisis – बिहार कांग्रेस में अंदरूनी असंतोष खुलकर सामने आ गया है। मंगलवार को पटना के बोरिंग कैनाल रोड स्थित एक सभागार में पार्टी के असंतुष्ट नेताओं और कार्यकर्ताओं ने बैठक कर प्रदेश नेतृत्व के खिलाफ आवाज बुलंद की। इस दौरान मौजूदा नेतृत्व को हटाने और संगठन को मजबूत करने की बात कही गई। सम्मेलन में शामिल नेताओं ने केंद्रीय नेतृत्व और राहुल गांधी के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए राज्य स्तर पर बदलाव की जरूरत पर जोर दिया।

प्रदेश नेतृत्व पर गंभीर आरोप, बदलाव की मांग
सम्मेलन में कई वक्ताओं ने टिकट वितरण में गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए प्रदेश प्रभारी कृष्णा अल्लावरु और प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम की कार्यशैली पर सवाल उठाए। नेताओं का कहना था कि हाल के चुनावों में पार्टी का प्रदर्शन निराशाजनक रहा है, जिसकी जिम्मेदारी प्रदेश नेतृत्व को लेनी चाहिए। एआईसीसी से जुड़े रहे आनंद माधव ने कहा कि विधानसभा से लेकर राज्यसभा चुनाव तक के नतीजों ने कार्यकर्ताओं को निराश किया है और इससे पार्टी की छवि प्रभावित हुई है।
कार्यकर्ताओं ने दिल्ली कूच का किया ऐलान
बैठक में यह निर्णय लिया गया कि अगर प्रदेश स्तर पर बदलाव नहीं हुआ, तो कार्यकर्ता अपनी मांगों को लेकर दिल्ली जाएंगे। नेताओं ने कहा कि यह आंदोलन केवल विरोध के लिए नहीं, बल्कि संगठन को मजबूत बनाने के उद्देश्य से किया जाएगा। उनका मानना है कि जमीनी स्तर पर काम करने वाले कार्यकर्ताओं की अनदेखी की जा रही है, जिससे असंतोष बढ़ रहा है।
बिचौलियों के प्रभाव पर उठे सवाल
पूर्व युवा कांग्रेस अध्यक्ष राजकुमार राजन ने कहा कि संगठन में ऐसे लोग सक्रिय हो गए हैं, जो शीर्ष नेतृत्व तक सही जानकारी नहीं पहुंचने दे रहे हैं। उनका आरोप था कि कुछ बिचौलियों ने पार्टी की संरचना को प्रभावित किया है, जिसके कारण समर्पित कार्यकर्ताओं को पीछे धकेला जा रहा है। इस मुद्दे को लेकर कई अन्य नेताओं ने भी चिंता जताई और पारदर्शिता की मांग की।
सम्मेलन में विभिन्न जिलों के प्रतिनिधियों की भागीदारी
इस महासम्मेलन में राज्य के अलग-अलग जिलों से आए प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। इनमें एआईसीसी और पीसीसी के डेलीगेट, पूर्व जिला अध्यक्ष और मौजूदा पदाधिकारी शामिल थे। कई नेताओं ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि संगठन में संवाद की कमी है और फैसलों में पारदर्शिता नहीं दिखती। सभा की अध्यक्षता कर रहे नागेंद्र पासवान ‘विकल’ ने भी कहा कि समर्पित कार्यकर्ताओं को नजरअंदाज किया जा रहा है।
हालिया घटनाओं से बढ़ी नाराजगी
हाल ही में हुए राज्यसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस के तीन विधायकों की अनुपस्थिति ने भी इस असंतोष को और बढ़ा दिया है। मतदान में शामिल न होने वाले विधायकों में सुरेंद्र कुशवाहा, मनोज विश्वास और मनोहर सिंह के नाम सामने आए थे। इस मामले में प्रदेश अध्यक्ष ने अनुशासनात्मक कार्रवाई की बात कही थी, लेकिन इससे पहले ही संगठन के भीतर विरोध तेज हो गया।
आगे की रणनीति पर मंथन जारी
बैठक में शामिल नेताओं ने साफ किया कि उनका उद्देश्य पार्टी को कमजोर करना नहीं, बल्कि उसे फिर से मजबूत बनाना है। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते सुधार नहीं किया गया, तो इसका असर आगामी चुनावों पर भी पड़ सकता है। फिलहाल, प्रदेश कांग्रेस में यह असंतोष किस दिशा में जाएगा, इस पर सबकी नजर बनी हुई है।



