CorruptionAction – मुजफ्फरपुर में रिश्वत लेते पकड़ा गया दारोगा बर्खास्त
CorruptionAction – बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में रिश्वतखोरी के एक पुराने मामले में कड़ी कार्रवाई करते हुए एक दारोगा को सेवा से हटा दिया गया है। तिरहुत रेंज के डीआईजी चंदन कुशवाहा ने विभागीय जांच के आधार पर यह निर्णय लिया। संबंधित अधिकारी, सदरे आलम, वर्तमान में वैशाली जिले में तैनात थे। उनके खिलाफ जारी बर्खास्तगी का आदेश संबंधित अधिकारियों को भेज दिया गया है।

घूस लेते हुए रंगेहाथ हुई थी गिरफ्तारी
यह मामला वर्ष 2021 का है, जब निगरानी विभाग की टीम ने सदरे आलम को घूस लेते हुए पकड़ा था। बताया गया कि जीरोमाइल चौक के पास एक चाय दुकान पर उन्होंने एक महिला से 11 हजार रुपये की रिश्वत ली थी। महिला ने आरोप लगाया था कि उसके बेटे को एक मामले में राहत देने के बदले पैसे मांगे गए थे। शिकायत मिलने के बाद निगरानी टीम ने पहले सत्यापन किया और फिर जाल बिछाकर आरोपी दारोगा को मौके से गिरफ्तार कर लिया।
जमानत के बाद भी जारी रही विभागीय कार्रवाई
गिरफ्तारी के बाद सदरे आलम को जेल भेजा गया था, जहां से उन्हें बाद में जमानत मिल गई। इसके बाद उन्होंने फिर से सेवा ज्वाइन कर ली थी। हालांकि उनके खिलाफ विभागीय जांच लगातार जारी रही। इस दौरान उनका तबादला वैशाली जिले में कर दिया गया। जांच प्रक्रिया पूरी होने में लगभग पांच वर्ष का समय लगा, जिसके बाद अंतिम निर्णय लिया गया।
जांच रिपोर्ट के आधार पर लिया गया फैसला
विभागीय जांच में आरोपों की पुष्टि होने के बाद डीआईजी ने सख्त रुख अपनाया। आदेश में स्पष्ट किया गया कि भ्रष्टाचार के आरोप सिद्ध होने के बाद संबंधित अधिकारी को सेवा में बनाए रखना उचित नहीं है। दो अप्रैल 2026 से प्रभावी इस निर्णय के तहत उन्हें पुलिस सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है।
वरिष्ठ अधिकारियों ने जताई कड़ी आपत्ति
डीआईजी ने अपने आदेश में यह भी कहा कि ऐसे कर्मियों की मौजूदगी से न केवल विभाग की छवि खराब होती है, बल्कि अन्य पुलिसकर्मियों और आम जनता पर भी गलत असर पड़ता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पुलिस सेवा में ईमानदारी और पारदर्शिता सबसे महत्वपूर्ण है और इस तरह के मामलों में सख्ती जरूरी है।
घटना से विभाग को मिला स्पष्ट संदेश
इस कार्रवाई को पुलिस विभाग में अनुशासन बनाए रखने के लिए अहम कदम माना जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि यह मामला अन्य कर्मचारियों के लिए भी एक चेतावनी है कि किसी भी तरह की अनियमितता या भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। लंबे समय तक चली जांच के बाद लिया गया यह फैसला विभाग की जवाबदेही और पारदर्शिता को दर्शाता है।



