Dairy – बिहार में हर गांव में दुग्ध उत्पादन समिति और पंचायत में सुधा केंद्र खोले जाएंगे
Dairy – बिहार सरकार ने ग्रामीण विकास और कृषि क्षेत्र में एक नई दिशा देने की तैयारी कर ली है। राज्य के वित्त मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने मंगलवार को विधानमंडल में बजट पेश करते हुए घोषणा की कि हर गांव में दुग्ध उत्पादन समिति का गठन किया जाएगा और प्रत्येक पंचायत में सुधा बिक्री केंद्र स्थापित किए जाएंगे। यह कदम आत्मनिर्भर बिहार योजना के सात निश्चय-3 के तहत लिया गया है। मंत्री ने कहा कि डेयरी और मत्स्य पालन क्षेत्र पर विशेष ध्यान दिया जाएगा, ताकि किसानों और ग्रामीणों को सीधे लाभ मिल सके।

मत्स्य पालन में बिहार की उपलब्धियाँ और लक्ष्य
मंत्री ने बताया कि वर्तमान में राज्य में मत्स्य की उपलब्धता लगभग 12.21 किलोग्राम प्रति व्यक्ति है, जो राज्य की 60 प्रतिशत जनसंख्या के आधार पर मापी गई है। इस वर्ष राज्य में मत्स्य बीज का उत्पादन 2044 मिलियन तक पहुँच गया है। बिहार अब मत्स्य उत्पादन में देश में चौथे स्थान पर है। मधेपुरा जिले में एक नया शीतक केंद्र भी स्थापित किया जाएगा, जिसकी क्षमता 50 किलोलीटर प्रतिदिन होगी। यह केंद्र मत्स्य संरक्षण और वितरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
पशु चिकित्सा सेवाओं में आधुनिक तकनीक का उपयोग
बिजेंद्र प्रसाद यादव ने पशुधन सेवा की ओर भी ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने बताया कि पशु अस्पतालों में चौबीस घंटे चिकित्सा सेवा उपलब्ध रहेगी। इसके अलावा डिजिटल एक्स-रे मशीनों और अल्ट्रासाउंड उपकरणों की व्यवस्था की जाएगी ताकि पशुओं के रोगों का त्वरित और सही निदान किया जा सके। इसके तहत सीमेन और भ्रूण का उत्पादन, भंडारण, वितरण और कृत्रिम गर्भाधान की सेवाएँ भी उपलब्ध होंगी। राज्य में बिहार पशु प्रजनन विनियमन अधिनियम 2025 लागू किया गया है, जो इस पूरी प्रक्रिया को नियंत्रित करेगा।
बकरी और सूकर विकास योजनाएँ
बिहार सरकार ने बकरी और सूकर पालन पर भी विशेष ध्यान दिया है। बकरी विकास योजना के तहत बकरी प्रजनन अनुसंधान और प्रशिक्षण संस्थान स्थापित किया जा रहा है। इसके साथ ही बकरी सीमेन स्टेशन और बकरी फेडरेशन का गठन किया जाएगा। सूकर विकास योजना के अंतर्गत भी प्रजनन, अनुसंधान और प्रशिक्षण संस्थान बनाए जा रहे हैं। इस पहल का उद्देश्य पशुपालन क्षेत्र में वैज्ञानिक दृष्टिकोण और उच्च गुणवत्ता की नस्लों का विकास करना है।
गांवों में रोजगार और सशक्तीकरण
डेयरी और पशुपालन योजनाओं का एक और उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ाना है। समग्र गव्य विकास योजना के तहत लोन और अनुदान के जरिये ग्रामीणों को डेयरी फार्मिंग में सशक्त बनाया जाएगा। इससे न केवल किसानों की आय बढ़ेगी, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे। मंत्री ने बताया कि इस योजना के माध्यम से ग्रामीण महिलाएँ और युवा भी आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनेंगे।
भविष्य की योजना और व्यापक असर
इन पहलों से राज्य में कृषि और पशुपालन क्षेत्र में नई ऊर्जा आएगी। डेयरी समितियों और सुधा केंद्रों के माध्यम से दूध उत्पादन और वितरण में पारदर्शिता बढ़ेगी। मत्स्य पालन, बकरी और सूकर पालन योजनाओं से ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी। इसके साथ ही रोजगार के नए अवसर पैदा होने से गांवों में जीवन स्तर में सुधार होगा और बिहार की आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिलेगा।



