Gopalganj Fraud Case: 21 किस्तों का जाल! अनाज दिलाने के नाम पर हुआ बड़ा खेल, RJD नेता प्रदीप देव अरेस्ट
Gopalganj Fraud Case: बिहार के गोपालगंज जिले में शनिवार देर रात उस वक्त सनसनी फैल गई, जब पुलिस ने शहर के लखपतिया मोड़ के पास से एक बड़े राजनीतिक चेहरे को गिरफ्तार कर लिया। राजद के अतिपिछड़ा प्रकोष्ठ के प्रदेश उपाध्यक्ष प्रदीप देव को ठगी के गंभीर आरोपों में हिरासत में लिया गया। यह गिरफ्तारी अचानक नहीं थी, बल्कि महीनों से चल रही जांच का नतीजा थी, जिसने (fraud investigation) को एक अहम मोड़ पर ला खड़ा किया।

एफसीआई के नाम पर 1.98 करोड़ की कथित ठगी
पुलिस के मुताबिक प्रदीप देव पर भारतीय खाद्य निगम से अनाज दिलाने का झांसा देकर करीब 1 करोड़ 98 लाख 17 हजार रुपये की ठगी करने का आरोप है। यह रकम एक या दो बार में नहीं, बल्कि लगभग 21 किस्तों में ली गई थी। आरोप है कि यह पूरा खेल भरोसे और राजनीतिक प्रभाव के नाम पर रचा गया। इस मामले ने (FCI grain scam) को लेकर आम लोगों के बीच भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
पटना निवासी कारोबारी ने दर्ज कराई थी प्राथमिकी
इस पूरे मामले की शुरुआत पटना निवासी पंकज कुमार सिंह की शिकायत से हुई थी। उन्होंने अगस्त 2024 में रोहतास जिले के नटवर बाजार थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। शिकायत में कहा गया था कि प्रदीप देव और उनके सहयोगियों ने एफसीआई से अनाज का कोटा दिलाने का भरोसा दिलाया, लेकिन पैसा लेने के बाद कोई काम नहीं हुआ। यह शिकायत (FIR registered) होने के बाद से ही पुलिस की नजर इस मामले पर टिकी हुई थी।
जांच में सही पाए गए आरोप, फिर हुई गिरफ्तारी
प्राथमिकी दर्ज होने के बाद रोहतास पुलिस ने मामले की विस्तृत जांच शुरू की। लेन-देन से जुड़े दस्तावेज, बैंक ट्रांजैक्शन और गवाहों के बयान जुटाए गए। जांच के दौरान आरोपों में प्रथम दृष्टया सच्चाई पाए जाने पर पुलिस ने कार्रवाई तेज की। शनिवार रात नगर थाने की पुलिस के सहयोग से छापेमारी कर प्रदीप देव को गिरफ्तार कर लिया गया। यह कार्रवाई (police raid) के रूप में काफी सुनियोजित बताई जा रही है।
दो घंटे की पूछताछ के बाद रोहतास ले जाया गया
गिरफ्तारी के बाद प्रदीप देव को गोपालगंज नगर थाने लाया गया, जहां करीब दो घंटे तक उनसे पूछताछ की गई। इसके बाद रोहतास पुलिस उन्हें अपने साथ लेकर रवाना हो गई। पुलिस सूत्रों के अनुसार, पूछताछ में कई अहम जानकारियां सामने आई हैं, जिनके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। यह पूरा घटनाक्रम (custodial questioning) के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
पुराना आपराधिक रिकॉर्ड भी आया सामने
यह पहली बार नहीं है जब प्रदीप देव का नाम ठगी के मामले में सामने आया हो। वर्ष 2019 में भी उत्तर प्रदेश पुलिस ने उन्हें ऑनलाइन ठगी के एक मामले में गिरफ्तार किया था। उस समय आरोप था कि वे अपने गुर्गों के साथ मिलकर डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए लोगों को ठग रहे थे। इस पुराने मामले के सामने आने से (criminal background) को लेकर पुलिस की जांच और सख्त हो गई है।
राजनीतिक गलियारों में मची खलबली
राजद के एक वरिष्ठ पदाधिकारी की गिरफ्तारी ने बिहार की राजनीति में हलचल पैदा कर दी है। विपक्षी दलों ने इस मुद्दे को लेकर राजद पर तीखे सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं, वहीं पार्टी की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस घटना का असर (political controversy) के रूप में आने वाले दिनों में और गहरा हो सकता है।
ठगी के तरीके पर उठे गंभीर सवाल
इस मामले ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि सरकारी संस्थानों के नाम पर लोग किस तरह भरोसा कर लेते हैं। एफसीआई जैसे बड़े संस्थान का नाम लेकर अनाज दिलाने का वादा करना और फिर किस्तों में पैसा लेना, एक सोची-समझी रणनीति की ओर इशारा करता है। पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि (financial fraud) में और कितने लोग शामिल हो सकते हैं।
पुलिस की नजर सहयोगियों पर भी
जांच एजेंसियों का कहना है कि यह ठगी अकेले किसी एक व्यक्ति द्वारा की गई हो, इसकी संभावना कम है। प्राथमिकी में प्रदीप देव के साथ अन्य सहयोगियों का भी जिक्र है। ऐसे में पुलिस अब उन सभी लोगों की भूमिका की जांच कर रही है, जिनके खातों में पैसा गया या जो सौदेबाजी में शामिल रहे। आने वाले दिनों में (arrest updates) और नाम सामने आ सकते हैं।
पीड़ित की मांग—जल्द मिले न्याय
मामले के शिकायतकर्ता पंकज कुमार सिंह का कहना है कि उन्होंने भरोसे के आधार पर इतनी बड़ी रकम दी थी। अब उनकी मांग है कि पैसे की रिकवरी हो और दोषियों को सख्त सजा मिले। यह मामला सिर्फ एक व्यक्ति की ठगी का नहीं, बल्कि भरोसे के साथ हुए खिलवाड़ का भी है। इसी वजह से (victim justice) को लेकर प्रशासन पर दबाव बढ़ता जा रहा है।
कानून के दायरे में राजनीति की परीक्षा
यह गिरफ्तारी एक बार फिर दिखाती है कि कानून के सामने राजनीतिक पहचान भी आड़े नहीं आ सकती। अगर आरोप साबित होते हैं, तो यह मामला एक बड़ी मिसाल बन सकता है। वहीं अगर नए खुलासे होते हैं, तो बिहार की राजनीति में (accountability in politics) पर नई बहस छिड़ सकती है।



