HeatwaveAlert – फागुन में गंगा का जलस्तर घटा, बढ़ी चिंता
HeatwaveAlert – बिहार में इस साल गर्मी सामान्य से अधिक पड़ने की आशंका जताई जा रही है। इसकी शुरुआती झलक फागुन महीने में ही दिखाई देने लगी है। आमतौर पर गंगा का जलस्तर वैशाख या जेठ में कम होता है, लेकिन इस बार शहरी इलाकों से नदी का पानी काफी पीछे हट चुका है। कई स्थानों पर गंगा की धारा पहले की तुलना में दूर चली गई है, जिससे आने वाले महीनों के लिए पानी को लेकर चिंता बढ़ने लगी है। पशुपालकों का कहना है कि मवेशियों को इन दिनों अधिक प्यास लग रही है और चारे की खपत में भी बदलाव दिख रहा है, जिसे ग्रामीण इलाके गर्मी की आहट से जोड़कर देख रहे हैं।

इंटकवेल तक पानी पहुंचाने में आई दिक्कत
भागलपुर के बरारी स्थित इंटकवेल से शहर को जलापूर्ति होती है। पिछले वर्ष फरवरी में जहां से गंगा की धारा से सीधे पानी मिल रहा था, इस बार उसी स्थान से पानी नहीं मिल सका। विभाग को अतिरिक्त पाइप जोड़कर करीब 100 फीट आगे से पानी लेना पड़ रहा है। यह बदलाव संकेत देता है कि नदी का प्रवाह सामान्य से कम हो रहा है। जलापूर्ति बाधित न हो, इसके लिए अतिरिक्त पाइप पहले से मंगाने की तैयारी की जा रही है, ताकि आगे की स्थिति संभाली जा सके।
पीएचईडी विभाग ने बढ़ाई सतर्कता
संभावित जल संकट को देखते हुए लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग ने निगरानी तेज कर दी है। विभागीय अभियंताओं से विभिन्न इलाकों के भूजल स्तर की ताजा रिपोर्ट मांगी गई है। कार्यपालक अभियंता दिलीप कुमार ने बताया कि जूनियर इंजीनियरों को साप्ताहिक अवलोकन करने के निर्देश दिए गए हैं। उद्देश्य यह है कि यदि भूजल स्तर में तेजी से गिरावट दर्ज हो तो समय रहते राज्य सरकार को अवगत कराया जा सके और आवश्यक कदम उठाए जा सकें।
केंद्रीय एजेंसी की रिपोर्ट में भी संकेत
केंद्रीय भूमि जल बोर्ड की प्री-मानसून बुलेटिन में भी भागलपुर समेत गंगा किनारे बसे कई शहरों और गांवों में भूजल स्तर घटने की बात सामने आई थी। जनवरी और फरवरी में किए गए निरीक्षण के दौरान जलस्तर में गिरावट की पुष्टि हुई है। बोर्ड ने सभी प्रखंडों का आंकड़ा संकलित किया है, जिसकी विस्तृत रिपोर्ट मई या जून में सार्वजनिक की जाएगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते वर्षा सामान्य नहीं हुई तो गर्मी के चरम पर जल संकट और गहरा सकता है।
गंगा किनारे जिलों में घटता भूजल स्तर
डायनामिक ग्राउंड वाटर रिसोर्स ऑफ इंडिया के आंकड़ों के अनुसार, गंगा से सटे कई जिलों में भूजल स्तर में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है। बक्सर, पटना, लखीसराय, बेगूसराय, मुंगेर और भागलपुर जैसे जिलों में पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष उपलब्ध जल संसाधन घटे हैं। विशेषज्ञ इसे जलवायु परिवर्तन, कम वर्षा और बढ़ते दोहन से जोड़कर देख रहे हैं। हालांकि अंतिम निष्कर्ष विस्तृत रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होगा।
आगे की चुनौती और संभावित समाधान
जल विशेषज्ञों का कहना है कि गर्मी की शुरुआत से पहले जल संरक्षण की दिशा में ठोस कदम उठाना जरूरी है। वर्षा जल संचयन, भूजल रिचार्ज और जल के विवेकपूर्ण उपयोग पर जोर दिया जा रहा है। प्रशासन का दावा है कि हालात पर लगातार नजर रखी जा रही है और जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त संसाधन उपलब्ध कराए जाएंगे।
फिलहाल फागुन में ही गंगा का पीछे हटना और भूजल स्तर में गिरावट, आने वाले मौसम की गंभीरता का संकेत दे रहे हैं। यदि आने वाले महीनों में तापमान तेजी से बढ़ता है, तो जल प्रबंधन सबसे बड़ी प्राथमिकता बन सकता है



