HighwayProjects – बिहार की छह राष्ट्रीय राजमार्ग योजनाएं मंजूरी के इंतजार में
HighwayProjects – बिहार में बुनियादी ढांचे को मजबूत करने वाली कई अहम सड़क परियोजनाएं फिलहाल अंतिम मंजूरी के अभाव में आगे नहीं बढ़ पा रही हैं। राज्य की छह राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाएं, जिनकी लागत 51 हजार करोड़ रुपये से अधिक बताई जा रही है, अभी केंद्रीय कैबिनेट की स्वीकृति का इंतजार कर रही हैं। हालांकि इन योजनाओं को वित्तीय स्तर पर मंजूरी मिल चुकी है, लेकिन अंतिम हरी झंडी न मिलने के कारण निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका है। इस देरी का असर राज्य के विकास और यातायात सुविधाओं पर पड़ता दिख रहा है।

कैबिनेट मंजूरी के बिना अटकी प्रक्रिया
जानकारी के अनुसार, इन परियोजनाओं को लोक-निजी भागीदारी मॉडल के तहत विकसित करने की सिफारिश की गई है। इस मॉडल में निर्माण एजेंसी को परियोजना की कुल लागत का बड़ा हिस्सा वहन करना होता है, जबकि शेष हिस्सा सरकार देती है। एजेंसियां अपनी लागत की भरपाई टोल के माध्यम से करती हैं। बावजूद इसके, जब तक केंद्रीय स्तर पर अंतिम मंजूरी नहीं मिलती, तब तक जमीन अधिग्रहण और अन्य जरूरी प्रक्रियाएं पूरी नहीं हो पा रही हैं।
जमीन अधिग्रहण बना बड़ी चुनौती
इन परियोजनाओं में देरी का एक प्रमुख कारण जमीन अधिग्रहण की धीमी रफ्तार भी है। संबंधित विभागों के बीच समन्वय की कमी और प्रशासनिक स्तर पर धीमी कार्यवाही के चलते काम अपेक्षित गति से आगे नहीं बढ़ पा रहा है। सूत्रों के मुताबिक, कई बार केंद्र और राज्य के बीच पत्राचार होने के बावजूद आवश्यक निर्णय समय पर नहीं हो पाते, जिससे परियोजनाएं फाइलों में ही अटकी रहती हैं।
पटना-पूर्णिया एक्सप्रेसवे पर नजर
इन परियोजनाओं में राज्य का पहला एक्सप्रेसवे, पटना से पूर्णिया के बीच प्रस्तावित मार्ग भी शामिल है। करीब 245 किलोमीटर लंबे इस मार्ग के निर्माण पर लगभग 32 हजार करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। इसके पूरा होने पर दोनों शहरों के बीच यात्रा समय में काफी कमी आएगी और व्यापारिक गतिविधियों को भी गति मिलने की उम्मीद है।
शहरी यातायात सुधारने की योजना
पटना शहर में यातायात दबाव को कम करने के लिए अनीसाबाद से दीदारगंज के बीच छह लेन एलिवेटेड सड़क का निर्माण भी प्रस्तावित है। यह परियोजना शहर के अंदर जाम की समस्या को कम करने में सहायक हो सकती है। इसके जरिए कई राष्ट्रीय राजमार्गों को जोड़ने की योजना है, जिससे शहर के भीतर और बाहर आवागमन अधिक सुगम होगा।
क्षेत्रीय संपर्क बढ़ाने वाली अन्य परियोजनाएं
इसके अलावा वाराणसी से रांची और कोलकाता को जोड़ने वाली सड़क परियोजना का भी हिस्सा इन योजनाओं में शामिल है। इस मार्ग के निर्माण से पूर्वी भारत में परिवहन नेटवर्क मजबूत होगा और औद्योगिक तथा व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही, बंदरगाहों से कनेक्टिविटी बेहतर होने से माल ढुलाई भी अधिक आसान हो सकेगी।
विकास की रफ्तार पर असर
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इन परियोजनाओं को जल्द मंजूरी मिल जाती है, तो राज्य के आर्थिक विकास को नई दिशा मिल सकती है। बेहतर सड़क नेटवर्क से न केवल यात्रा समय घटेगा, बल्कि निवेश और रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। फिलहाल सभी की नजरें केंद्रीय कैबिनेट के फैसले पर टिकी हैं, जिसके बाद इन परियोजनाओं की गति तय होगी।