बिहार

LiquorBan – समस्तीपुर के राजकीय मेले में अवैध शराब बिक्री के मामले ने पकड़ा तूल

LiquorBan – बिहार में लागू पूर्ण शराबबंदी के बावजूद अवैध शराब कारोबार थमने का नाम नहीं ले रहा है। ताजा मामला समस्तीपुर जिले के हलई थाना क्षेत्र स्थित बाबा केवल धाम में आयोजित दो दिवसीय राजकीय मेले से जुड़ा है, जहां कथित तौर पर रात के समय खुलेआम शराब बिक्री का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से फैल रहा है। यह वीडियो सामने आने के बाद एक बार फिर कानून-व्यवस्था और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं।

samastipur fair illegal liquor video

वायरल वीडियो में संदिग्ध गतिविधियां नजर आईं
सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो में तीन अलग-अलग ब्रांड की विदेशी शराब की बोतलें खुले में रखी दिखाई दे रही हैं। बोतलों के पास एक गिलास भी रखा हुआ नजर आता है, जिससे यह अंदेशा जताया जा रहा है कि वहां चोरी-छिपे शराब परोसी जा रही थी। वीडियो में एक युवक बोतलों के समीप खीरा काटते हुए दिखता है, जो पूरे दृश्य को और संदिग्ध बनाता है। बताया जा रहा है कि मेले से लौट रहे कुछ लोगों की नजर इन बोतलों पर पड़ी, जिसके बाद उन्होंने इस पर सवाल भी उठाए। हालांकि मौके पर मौजूद अन्य लोगों की प्रतिक्रिया सामान्य ही रही, जिससे यह संकेत मिलता है कि ऐसी गतिविधियां संभवतः नई नहीं हैं।

मेले का उद्घाटन बड़े स्तर पर हुआ था
गौर करने वाली बात यह है कि इसी राजकीय मेले का उद्घाटन दिन में केंद्रीय राज्य मंत्री राजभूषण चौधरी, स्थानीय विधायक रणविजय साहू और जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में हुआ था। प्रशासनिक निगरानी के बीच आयोजित इस कार्यक्रम में रात के समय इस तरह की घटना सामने आना कई सवाल खड़े करता है। इससे यह भी स्पष्ट होता है कि दिन और रात की व्यवस्थाओं में अंतर हो सकता है, जिसका फायदा उठाकर अवैध गतिविधियां संचालित की जाती हैं।

प्रशासन की चुप्पी बनी चिंता का कारण
इस पूरे मामले में अभी तक प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। उत्पाद विभाग के अधिकारी भी वायरल वीडियो पर टिप्पणी करने से बचते नजर आए हैं। वहीं, पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है, लेकिन अब तक किसी ठोस कार्रवाई की जानकारी नहीं दी गई है। इस तरह की घटनाएं न केवल कानून के पालन पर सवाल उठाती हैं, बल्कि सरकार की शराबबंदी नीति की प्रभावशीलता पर भी चर्चा को जन्म देती हैं।

राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आईं
सूत्रों के अनुसार, पूर्व मंत्री मुकेश सहनी भी उसी शाम बाबा केवल धाम दर्शन के लिए पहुंचे थे। हालांकि इस वायरल वीडियो की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन स्थानीय स्तर पर यह मुद्दा चर्चा का विषय बना हुआ है। विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि इस तरह की घटनाओं पर समय रहते सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो शराबबंदी कानून की विश्वसनीयता पर असर पड़ सकता है।

बिहार में शराबबंदी एक महत्वपूर्ण सामाजिक और राजनीतिक निर्णय रहा है, जिसका उद्देश्य समाज में सुधार लाना था। लेकिन समय-समय पर सामने आने वाली ऐसी घटनाएं यह संकेत देती हैं कि जमीनी स्तर पर अभी भी कई चुनौतियां मौजूद हैं, जिनसे निपटने के लिए ठोस और निरंतर प्रयास जरूरी हैं।

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