बिहार

RajyaSabhaElection – बिहार में आज वोटिंग, छह उम्मीदवारों की किस्मत दांव पर…

RajyaSabhaElection – बिहार में राज्यसभा की पांच सीटों के लिए सोमवार को मतदान होना है, जिसके साथ ही छह उम्मीदवारों की किस्मत का फैसला भी हो जाएगा। चुनावी प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक हलकों में हलचल तेज है और सभी दल अपने-अपने विधायकों को एकजुट रखने में जुटे हुए हैं। खासतौर पर कांग्रेस के विधायकों को लेकर राजनीतिक गलियारों में काफी चर्चा है, क्योंकि विधानसभा में उनकी संख्या सीमित है और कुछ विधायकों की राजनीतिक पृष्ठभूमि को लेकर अलग-अलग तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं।

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राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि इस चुनाव में हर वोट अहम होगा। ऐसे में विभिन्न दलों की रणनीति का केंद्र अपने विधायकों को एकजुट रखना और मतदान के दौरान किसी भी तरह की क्रॉस वोटिंग की संभावना को रोकना है।

कांग्रेस विधायकों पर टिकी राजनीतिक नजर

राज्यसभा चुनाव के बीच कांग्रेस के छह विधायकों को लेकर खास नजर रखी जा रही है। पार्टी के अंदर अभी तक विधायक दल के नेता और सचेतक का चयन नहीं हो सका है, जिसके कारण यह चुनाव कांग्रेस के लिए संगठनात्मक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

सूत्रों के अनुसार कांग्रेस के एक विधायक राष्ट्रीय लोक मोर्चा के नेता उपेंद्र कुशवाहा के करीबी बताए जाते हैं, जबकि एक अन्य विधायक पहले जनता दल यूनाइटेड से जुड़े रहे हैं। इसके अलावा पार्टी के शेष चार विधायकों में तीन हाल ही में विधानसभा पहुंचे नए चेहरे हैं।

इस स्थिति में कांग्रेस के विधायक बिना स्पष्ट नेतृत्व संरचना के ही मतदान प्रक्रिया में हिस्सा लेंगे। यही कारण है कि अन्य राजनीतिक दलों की नजर भी इन विधायकों की भूमिका पर बनी हुई है।

महागठबंधन ने विधायकों को एक साथ रखा

राज्यसभा चुनाव से पहले महागठबंधन ने अपने विधायकों को एकजुट रखने के लिए विशेष रणनीति अपनाई है। रविवार दोपहर से ही गठबंधन के विधायक पटना के एक होटल में एकत्रित होने लगे थे। इस कदम का उद्देश्य मतदान से पहले किसी भी तरह की राजनीतिक उठापटक को रोकना बताया जा रहा है।

सूत्रों के अनुसार शाम तक राजद और कांग्रेस के कुछ विधायक होटल नहीं पहुंचे थे, जिससे राजनीतिक चर्चाओं का दौर तेज हो गया। हालांकि गठबंधन के नेताओं ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सभी विधायक पार्टी के साथ हैं और चुनाव में गठबंधन के उम्मीदवार को पूरा समर्थन मिलेगा।

राजद के मुख्य प्रवक्ता शक्ति सिंह यादव ने दावा किया कि राजद, कांग्रेस और वामदलों के साथ-साथ अन्य सहयोगी दलों के विधायकों को मिलाकर महागठबंधन के पास पर्याप्त समर्थन मौजूद है।

तेजस्वी यादव लगातार संपर्क में

चुनाव से पहले महागठबंधन के विधायकों के साथ संवाद बनाए रखने की जिम्मेदारी नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी प्रसाद यादव ने संभाली हुई है। पार्टी सूत्रों के अनुसार वह लगातार विधायकों से संपर्क में रहे और होटल में मौजूद विधायकों से देर रात तक बातचीत भी करते रहे।

गठबंधन के नेताओं का कहना है कि इस तरह की बैठकों का उद्देश्य विधायकों के बीच आपसी संवाद को मजबूत रखना और मतदान से पहले किसी भी तरह की राजनीतिक अनिश्चितता को दूर करना है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राज्यसभा चुनाव के दौरान इस तरह की रणनीतियां आमतौर पर अपनाई जाती हैं, ताकि सभी विधायक पार्टी की तय रणनीति के अनुसार मतदान कर सकें।

एनडीए ने सभी सीटें जीतने का किया दावा

दूसरी ओर सत्तारूढ़ गठबंधन एनडीए ने भी इस चुनाव को लेकर जीत का भरोसा जताया है। बिहार सरकार में मंत्री और भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. प्रमोद चंद्रवंशी ने दावा किया कि एनडीए राज्यसभा की सभी पांच सीटों पर जीत हासिल करेगा।

उन्होंने कहा कि विपक्षी महागठबंधन के पास आवश्यक समर्थन नहीं है और उनके कई विधायक स्थिति को समझते हुए मतदान के दौरान अलग रुख भी अपना सकते हैं।

डॉ. चंद्रवंशी ने यह भी कहा कि राज्यसभा चुनाव में राजनीतिक समीकरणों के बावजूद अंततः वही उम्मीदवार सफल होगा जिसे पर्याप्त समर्थन प्राप्त होगा। अब सभी की नजर विधानसभा में होने वाली वोटिंग और उसके परिणाम पर टिकी हुई है, जिससे यह स्पष्ट हो जाएगा कि किस दल की रणनीति अधिक प्रभावी रही।

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