NationalLokAdalat – धनबाद सिविल कोर्ट में 161 करोड़ की रिकवरी, लाखों मामलों का निपटारा
NationalLokAdalat – झारखंड के धनबाद में शनिवार को आयोजित नेशनल लोक अदालत में बड़ी संख्या में लंबित मामलों का समाधान किया गया। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देश पर जिला विधिक सेवा प्राधिकार की ओर से सिविल कोर्ट परिसर में इस लोक अदालत का आयोजन किया गया। पूरे दिन चली इस प्रक्रिया में कुल तीन लाख 34 हजार 710 मामलों का निपटारा किया गया। साथ ही विभिन्न मामलों में कुल 161 करोड़ 34 लाख 71 हजार रुपये की रिकवरी दर्ज की गई। अदालत में समझौते के आधार पर कई पुराने विवादों का समाधान हुआ, जिससे बड़ी संख्या में लोगों को राहत मिली।

दुर्घटना पीड़ित परिवारों को दी गई आर्थिक सहायता
लोक अदालत के दौरान सड़क दुर्घटनाओं से प्रभावित परिवारों को भी आर्थिक सहायता प्रदान की गई। सड़क हादसे में अपने माता-पिता को खो चुके प्रभु साव को प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकार के चेयरमैन निकेश कुमार सिन्हा ने एक करोड़ 38 लाख रुपये का मुआवजा चेक सौंपा। इसी तरह एक अन्य मामले में दुर्घटना में पति की मौत के बाद पीड़ित महिला को 82 लाख रुपये की सहायता दी गई। अधिकारियों का कहना है कि इस तरह के मामलों में समझौते के माध्यम से पीड़ित परिवारों को शीघ्र राहत देने का प्रयास किया जाता है।
हाईकोर्ट के न्यायाधीश ने किया उद्घाटन
नेशनल लोक अदालत का औपचारिक उद्घाटन ऑनलाइन माध्यम से किया गया। इस अवसर पर झारखंड हाईकोर्ट के न्यायाधीश सुजीत नारायण प्रसाद ने जमशेदपुर से कार्यक्रम का उद्घाटन किया। उन्होंने कहा कि लोक अदालत आम लोगों के लिए एक प्रभावी मंच है जहां लंबे समय से लंबित मामलों का आपसी सहमति से समाधान संभव होता है। इस व्यवस्था से न्यायालयों पर बढ़ते मामलों का बोझ भी कम होता है और लोगों को त्वरित न्याय मिल पाता है।
मामलों के निपटारे के लिए बनाई गईं विशेष बेंच
जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सचिव सह अवर न्यायाधीश मयंक तुषार टोपनो ने बताया कि लोक अदालत में विभिन्न प्रकार के मामलों के निपटारे के लिए कुल 13 बेंच का गठन किया गया था। इन बेंचों में न्यायिक अधिकारियों और संबंधित विभागों के प्रतिनिधियों ने मिलकर मामलों का समाधान किया। बैंक ऋण, दुर्घटना मुआवजा, पारिवारिक विवाद, बिजली बिल, श्रम मामलों सहित कई श्रेणियों के मामलों को सुनवाई के लिए शामिल किया गया था। बड़ी संख्या में पक्षकारों ने आपसी सहमति से समझौता कर अपने मामलों का समाधान कराया।
दिव्यांगों और बच्चों को भी मिला लाभ
लोक अदालत के दौरान सामाजिक सहायता से जुड़े कुछ कार्यक्रम भी आयोजित किए गए। दो दिव्यांग व्यक्तियों को मौके पर ही ट्राई साइकिल उपलब्ध कराई गई और उनके दिव्यांग प्रमाण पत्र बनवाने की प्रक्रिया भी पूरी की गई। इसके अलावा उन्हें स्पॉन्सरशिप योजना से भी जोड़ा गया। वहीं जिन बच्चों के माता-पिता नहीं हैं, ऐसे चार बच्चों को भी इस योजना के तहत जोड़ा गया और उनकी पढ़ाई के लिए चार हजार रुपये की सहायता राशि का चेक प्रदान किया गया।
श्रम विभाग की योजना से छात्रों को सहायता
कार्यक्रम के दौरान श्रम विभाग की ओर से भी जरूरतमंद बच्चों को सहायता दी गई। करीब 40 बच्चों को छात्रवृत्ति योजना का लाभ दिलाया गया। अधिकारियों ने बताया कि इन योजनाओं का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को पढ़ाई के लिए प्रोत्साहन देना है। लोक अदालत के मंच का उपयोग कर कई सामाजिक योजनाओं से लोगों को जोड़ने का प्रयास किया गया, जिससे जरूरतमंदों तक सरकारी सहायता सीधे पहुंच सके।