MiddleEastTension – खाड़ी संघर्ष के बीच यूएई पर गुप्त हमले की रिपोर्ट से मची हलचल
MiddleEastTension – खाड़ी संघर्ष के बीच यूएई पर गुप्त हमले की रिपोर्ट से हलचलपश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच एक नई रिपोर्ट ने भू-राजनीतिक हलकों में हलचल बढ़ा दी है। अमेरिका और इजरायल की ओर से ईरान पर किए गए सैन्य हमलों के बाद शुरू हुआ संघर्ष अब कई महीनों बाद भी थमता नजर नहीं आ रहा। इसी बीच एक अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया है कि संयुक्त अरब अमीरात ने भी हालिया युद्ध के दौरान ईरान के एक महत्वपूर्ण तेल प्रतिष्ठान को निशाना बनाया था। हालांकि इस दावे की अब तक किसी भी पक्ष ने आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।

वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के अनुसार, यह कथित हमला अप्रैल महीने में उस समय हुआ था जब क्षेत्र में युद्धविराम को लेकर कूटनीतिक प्रयास तेज हो रहे थे। रिपोर्ट में कहा गया है कि यूएई ने ईरान के लवन द्वीप स्थित तेल रिफाइनरी पर गुप्त कार्रवाई की थी। यह रिफाइनरी ईरान के प्रमुख ऊर्जा केंद्रों में शामिल मानी जाती है और यहां प्रतिदिन लगभग 60 हजार बैरल कच्चे तेल का उत्पादन होता है।
हमले के समय को लेकर बढ़ी चर्चा
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि यह हमला 8 अप्रैल की सुबह हुआ था। उसी दिन ईरानी सरकारी प्रसारक IRIB ने लवन द्वीप के तेल प्रतिष्ठानों पर हमले की जानकारी दी थी। हालांकि उस वक्त हमलावर देश का नाम सार्वजनिक नहीं किया गया था। ईरान ने तब इसे “कायराना कार्रवाई” बताते हुए जवाबी कदम उठाने की चेतावनी दी थी।
इसके कुछ घंटों बाद क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया था। ईरान की ओर से यूएई और कुवैत की दिशा में मिसाइल और ड्रोन दागे जाने की खबरें सामने आई थीं। यूएई ने दावा किया था कि उसके ऊपर कई मिसाइलों और दर्जनों ड्रोन से हमला किया गया। उस दौरान खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर थीं और कई देशों ने अपने एयरस्पेस की निगरानी बढ़ा दी थी।
खाड़ी देशों की भूमिका पर उठे सवाल
अब तक माना जा रहा था कि खाड़ी देश इस संघर्ष में प्रत्यक्ष रूप से शामिल होने से बच रहे हैं। सऊदी अरब, यूएई, कतर और कुवैत जैसे देशों ने सार्वजनिक तौर पर संयम की अपील की थी और युद्ध को फैलने से रोकने की बात कही थी। ऐसे में यह रिपोर्ट सामने आने के बाद क्षेत्रीय राजनीति को लेकर नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि रिपोर्ट सही साबित होती है तो इससे पश्चिम एशिया की रणनीतिक स्थिति पर बड़ा असर पड़ सकता है। यह भी माना जा रहा है कि तेल आपूर्ति और समुद्री सुरक्षा को लेकर खाड़ी देशों की चिंताएं लगातार बढ़ रही हैं। इसी कारण कई देश पर्दे के पीछे अपनी सुरक्षा रणनीति मजबूत करने में जुटे हैं।
सीजफायर पर मंडराया संकट
अमेरिका और इजरायल की मध्यस्थता से कुछ समय पहले लागू हुआ सीमित युद्धविराम भी अब कमजोर पड़ता दिख रहा है। ईरान और उसके विरोधी देशों के बीच लगातार आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं। क्षेत्र में ड्रोन गतिविधियों और सैन्य तैयारियों में भी बढ़ोतरी देखी जा रही है।
फिलहाल यूएई, ईरान और अमेरिका की ओर से इस रिपोर्ट पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। लेकिन इस खुलासे के बाद पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियां भी हालात पर करीबी नजर बनाए हुए हैं।