Hantavirus – रहस्यमयी मौतों के बाद फिर चर्चा में आया खतरनाक वायरस
Hantavirus – अंटार्कटिका की यात्रा पर निकले एक क्रूज जहाज में हुई संदिग्ध मौतों के बाद हंता वायरस को लेकर वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ गई है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार यह वायरस नया नहीं है, लेकिन इसका एक विशेष रूप वैज्ञानिकों के लिए गंभीर चिंता का विषय बना हुआ है। खास बात यह है कि इस संक्रमण की मृत्यु दर बेहद अधिक बताई जाती है और अब तक इसका कोई पक्का इलाज या वैक्सीन उपलब्ध नहीं है।

हाल के घटनाक्रम ने एक बार फिर दुनिया को यह याद दिलाया है कि संक्रामक बीमारियों को हल्के में लेना कितना खतरनाक साबित हो सकता है। कोरोना महामारी के बाद स्वास्थ्य एजेंसियां पहले से ज्यादा सतर्क हैं और किसी भी नए संक्रमण पर करीबी नजर रख रही हैं।
क्रूज यात्रा के दौरान बिगड़ी यात्रियों की हालत
रिपोर्ट्स के मुताबिक, अप्रैल 2026 में अर्जेंटीना से अंटार्कटिका के लिए रवाना हुए एक क्रूज जहाज पर कई देशों के यात्री और क्रू सदस्य मौजूद थे। यात्रा की शुरुआत सामान्य रही, लेकिन कुछ दिनों बाद एक बुजुर्ग यात्री की तबीयत अचानक बिगड़ गई। तेज बुखार, सिरदर्द और सांस लेने में परेशानी के बाद उसकी मौत हो गई।
इसके कुछ समय बाद उसकी पत्नी की भी हालत खराब हुई और बाद में उनकी भी जान चली गई। जहाज पर मौजूद अन्य लोगों में भी संक्रमण जैसे लक्षण दिखाई देने लगे। इसके बाद अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य एजेंसियों ने मामले की जांच शुरू की। जांच में हंता वायरस संक्रमण की पुष्टि होने के बाद स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चिंता बढ़ गई।
क्या है हंता वायरस
हंता वायरस वायरसों का एक समूह है, जो मुख्य रूप से चूहों और अन्य कृंतक जीवों के जरिए फैलता है। संक्रमित जानवरों के मल, मूत्र या लार के संपर्क में आने पर इंसानों में संक्रमण हो सकता है।
यह वायरस शरीर पर गंभीर असर डाल सकता है। कुछ मामलों में यह किडनी को प्रभावित करता है, जबकि कुछ प्रकार फेफड़ों पर हमला करते हैं। फेफड़ों में संक्रमण बढ़ने पर मरीज को सांस लेने में गंभीर दिक्कत हो सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार कुछ प्रकारों में मृत्यु दर काफी अधिक देखी गई है।
एंडीज स्ट्रेन ने बढ़ाई चिंता
वैज्ञानिकों का कहना है कि हंता वायरस का एक विशेष रूप, जिसे एंडीज स्ट्रेन कहा जाता है, अन्य प्रकारों से अलग माना जाता है। यह स्ट्रेन सीमित परिस्थितियों में इंसान से इंसान में भी फैल सकता है। यही कारण है कि इसे लेकर ज्यादा सतर्कता बरती जा रही है।
हालांकि विशेषज्ञ यह भी स्पष्ट कर रहे हैं कि यह वायरस कोरोना या फ्लू की तरह सामान्य हवा के जरिए तेजी से नहीं फैलता। संक्रमण फैलने के लिए संक्रमित व्यक्ति के साथ करीबी और लंबे समय तक संपर्क होना जरूरी माना जाता है।
कैसे फैलता है संक्रमण
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, बंद जगहों में चूहों की मौजूदगी संक्रमण का बड़ा कारण बन सकती है। पुराने गोदाम, बंद कमरे, कचरा क्षेत्र या ऐसी जगहें जहां कृंतक जीव अधिक हों, वहां संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।
जांच एजेंसियों का मानना है कि क्रूज पर सवार कुछ यात्री यात्रा शुरू होने से पहले ऐसे इलाके में गए थे जहां संक्रमित चूहों की मौजूदगी हो सकती थी। वहीं से संक्रमण फैलने की आशंका जताई जा रही है।
बचाव ही सबसे बड़ा उपाय
विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल इस वायरस से बचाव के लिए सावधानी ही सबसे प्रभावी तरीका है। घरों और स्टोरेज क्षेत्रों को साफ रखना, चूहों की एंट्री रोकना और संदिग्ध जगहों पर मास्क व दस्ताने का इस्तेमाल करना जरूरी माना जा रहा है।
स्वास्थ्य एजेंसियां लोगों से अपील कर रही हैं कि किसी भी असामान्य बुखार या सांस संबंधी परेशानी को नजरअंदाज न करें। समय पर जांच और चिकित्सकीय सलाह गंभीर स्थिति से बचाने में मदद कर सकती है।