अंतर्राष्ट्रीय

GeoPolitics – ईरान युद्ध के बीच पाकिस्तान की भूमिका पर उठे नए सवाल

GeoPolitics – अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच पाकिस्तान की भूमिका को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। एक अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इस्लामाबाद ने संघर्ष के दौरान ईरानी सैन्य विमानों को अपने एयरबेस पर ठहरने की अनुमति दी थी। इस खुलासे के बाद अमेरिकी राजनीतिक हलकों में पाकिस्तान की कूटनीतिक स्थिति और उसकी तटस्थता पर सवाल उठने लगे हैं।

pakistan role under scrutiny in iran war

CBS News की रिपोर्ट के मुताबिक, अप्रैल में संघर्ष के दौरान ईरान ने अपने कुछ सैन्य विमानों को पाकिस्तान के नूर खान एयरबेस पर स्थानांतरित किया था। बताया गया है कि इन विमानों में एक आरसी-130 निगरानी और खुफिया विमान भी शामिल था। रिपोर्ट में अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से कहा गया है कि यह कदम उस समय उठाया गया जब क्षेत्र में संभावित अमेरिकी सैन्य कार्रवाई की आशंका बनी हुई थी।

अमेरिकी नेताओं ने मांगी समीक्षा

रिपोर्ट सामने आने के बाद अमेरिकी सांसदों की प्रतिक्रियाएं भी तेज हो गई हैं। रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने पाकिस्तान की मध्यस्थ भूमिका की समीक्षा की मांग की है। उन्होंने सोशल मीडिया मंच X पर कहा कि यदि रिपोर्ट सही साबित होती है तो अमेरिका को पाकिस्तान की भूमिका को नए सिरे से देखना होगा।

उन्होंने यह भी कहा कि क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों में पारदर्शिता जरूरी है। कुछ अमेरिकी विश्लेषकों का मानना है कि यदि पाकिस्तान ने वास्तव में ईरानी विमानों को शरण दी है तो इससे वाशिंगटन और इस्लामाबाद के संबंधों पर असर पड़ सकता है।

पाकिस्तान ने आरोपों को नकारा

इन दावों के बाद पाकिस्तान की ओर से भी प्रतिक्रिया सामने आई है। एक वरिष्ठ पाकिस्तानी अधिकारी ने रिपोर्ट को निराधार बताया है। अधिकारी के अनुसार नूर खान एयरबेस घनी आबादी वाले क्षेत्र में स्थित है और वहां किसी विदेशी सैन्य गतिविधि को लंबे समय तक छिपाकर रखना संभव नहीं है।

पाकिस्तानी पक्ष का कहना है कि देश किसी भी क्षेत्रीय संघर्ष में संतुलित नीति अपनाने की कोशिश कर रहा है और उसकी प्राथमिकता तनाव कम करना है। हालांकि इस बयान के बावजूद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चाएं जारी हैं।

अफगानिस्तान को लेकर भी सामने आए दावे

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि संघर्ष के दौरान कुछ ईरानी नागरिक विमान अफगानिस्तान के हवाई अड्डों पर भी पहुंचे थे। एक अफगान विमानन अधिकारी के हवाले से दावा किया गया कि ईरानी एयरलाइन का विमान युद्ध शुरू होने के बाद काबुल में रुका रहा।

हालांकि तालिबान प्रशासन ने इन खबरों को गलत बताया है। तालिबान प्रवक्ता जबीउल्लाह मुजाहिद ने कहा कि ईरान को ऐसी किसी व्यवस्था की आवश्यकता नहीं थी और इस तरह की जानकारी तथ्यात्मक नहीं है।

सीजफायर के बावजूद जारी है तनाव

वर्तमान में अमेरिका और ईरान के बीच घोषित युद्धविराम के बावजूद तनाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। दोनों देशों के बीच बयानबाजी लगातार जारी है। ईरान ने हाल में बातचीत की इच्छा जताई, लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरानी प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया।

विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया की स्थिति अभी भी बेहद संवेदनशील बनी हुई है। ऐसे में पाकिस्तान और अन्य क्षेत्रीय देशों की भूमिका पर वैश्विक नजर बनी रहेगी।

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