RevenueStrike – विजय कुमार सिन्हा ने हड़ताल पर राजस्व अधिकारियों को 24 घंटे में काम पर लौटने की दी चेतावनी
RevenueStrike – बिहार में राजस्व विभाग से जुड़े अधिकारियों की हड़ताल को लेकर राज्य सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है। उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने अंचलाधिकारी और अन्य राजस्व अधिकारियों से अपील की है कि वे 24 घंटे के भीतर अपने कार्यस्थल पर लौट आएं। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि अधिकारी तय समय सीमा के अंदर ड्यूटी पर वापस आ जाते हैं तो उनके खिलाफ किसी प्रकार की अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी। सरकार ने यह भी संकेत दिया है कि हड़ताल की अवधि को सेवा अवधि में समायोजित करने पर भी विचार किया जा सकता है।

मार्च माह में राजस्व कार्यों की अहमियत
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि वित्तीय वर्ष का अंतिम महीना होने के कारण मार्च राजस्व विभाग के लिए बेहद महत्वपूर्ण समय होता है। इस अवधि में कई ऐसी सरकारी योजनाएं और अभियान चल रहे हैं जो सीधे आम जनता से जुड़े हुए हैं।
उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री की समृद्धि यात्रा के साथ-साथ राजस्व महाअभियान के अंतर्गत प्राप्त करीब 46 लाख आवेदनों के निपटारे का काम जारी है। इसके अलावा मुख्यमंत्री के निर्देश पर ई-मापी अभियान भी चलाया जा रहा है। इन सभी कार्यक्रमों को 31 मार्च तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। ऐसे में यदि अंचल कार्यालयों का काम प्रभावित होता है तो इससे आम नागरिकों को परेशानी हो सकती है।
जमीन और प्रमाण पत्र से जुड़े काम प्रभावित होने की आशंका
सरकार का कहना है कि अंचल कार्यालयों के माध्यम से भूमि से संबंधित कई महत्वपूर्ण सेवाएं संचालित होती हैं। इनमें जमीन से जुड़े दस्तावेज, प्रमाण-पत्र जारी करना और राजस्व से संबंधित अन्य प्रशासनिक कार्य शामिल हैं।
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि इन सेवाओं का सीधा संबंध आम लोगों की जरूरतों से है। इसलिए प्रशासनिक व्यवस्था को बाधित करना किसी भी दृष्टि से उचित नहीं माना जा सकता। उन्होंने यह भी कहा कि भूमि सुधार उपसमाहर्ता से जुड़ा मामला सामान्य प्रशासन विभाग के दायरे में आता है और यदि अधिकारी काम पर लौटते हैं तो उनकी मांगों पर सकारात्मक तरीके से विचार किया जा सकता है।
पटना में अधिकारियों की बैठक, मांगों पर अड़े
दूसरी ओर अपनी मांगों को लेकर राज्य के अंचलाधिकारी और राजस्व अधिकारी बीते 9 मार्च से सामूहिक अवकाश पर हैं। रविवार को पटना के अधिवेशन भवन में संघ के सदस्यों की बैठक भी आयोजित की गई, जिसमें अधिकारियों ने अपनी मांगों को फिर से दोहराया।
संघ का कहना है कि भूमि सुधार उपसमाहर्ता यानी डीसीएलआर के पद पर राजस्व सेवा से जुड़े अधिकारियों की नियुक्ति सुनिश्चित की जानी चाहिए। अधिकारियों का तर्क है कि बिहार राजस्व सेवा संवर्ग के गठन के समय ही इस पद पर राजस्व अधिकारियों की नियुक्ति का प्रावधान किया गया था।
बैठक के दौरान संघ के प्रतिनिधियों और सरकार के बीच अनौपचारिक बातचीत भी हुई। देर रात तक बातचीत का दौर चला, लेकिन हड़ताल समाप्त करने को लेकर कोई अंतिम निर्णय नहीं हो सका।
नियुक्तियों और पदोन्नति से जुड़े मुद्दे भी उठे
संघ के प्रतिनिधियों का कहना है कि राजस्व विभाग में बिहार प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों की तैनाती की जा रही है, जबकि राजस्व सेवा के अधिकारी लंबे समय से पदोन्नति और नियुक्ति से जुड़े मुद्दों के समाधान की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
उनका कहना है कि कई मामलों में कम अनुभव वाले अधिकारियों को भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी जा रही हैं, जबकि विभागीय अनुभव रखने वाले राजस्व अधिकारियों को अपेक्षित अवसर नहीं मिल पा रहा है। इसके अलावा सेवा शर्तों, वित्तीय अधिकारों, मानव संसाधन व्यवस्था और प्रशासनिक स्वतंत्रता से जुड़े कई मुद्दे भी लंबे समय से लंबित बताए जा रहे हैं।
भूमि सर्वे में नई तकनीक का उपयोग
इसी बीच राज्य सरकार राजस्व प्रशासन को आधुनिक बनाने की दिशा में भी कदम उठा रही है। भूमि सर्वेक्षण और बंदोबस्ती से जुड़े कार्यों में अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तकनीक के उपयोग की योजना बनाई जा रही है।
भू-अभिलेख एवं परिमाप निदेशालय की ओर से जारी निर्देशों के अनुसार जिलों के बंदोबस्त कार्यालयों में एआई सेल स्थापित किए जाएंगे। यह सेल विशेष सर्वेक्षण और बंदोबस्त से जुड़े कार्यों में नई तकनीक के संभावित उपयोग पर काम करेगा।
इस सेल की अध्यक्षता संबंधित बंदोबस्त पदाधिकारी करेंगे। इसके अलावा इसमें आईटी प्रबंधक, विशेष सर्वेक्षण सहायक बंदोबस्त पदाधिकारी, कानूनगो और सर्वे अमीन को भी सदस्य के रूप में शामिल किया जाएगा। अधिकारियों का मानना है कि नई तकनीक के इस्तेमाल से भूमि सर्वेक्षण से जुड़े काम अधिक सटीक और समयबद्ध तरीके से पूरे किए जा सकेंगे।



