RiverAccident – पटना में गंगा घाटों पर 4 लोगों के डूबने की घटनाओं से मचा हड़कंप
RiverAccident – पटना में रविवार शाम गंगा नदी के विभिन्न घाटों पर डूबने की कई घटनाओं ने चिंता बढ़ा दी है। दीघा थाना क्षेत्र के अलग-अलग घाटों पर चार लोग नदी में समा गए, जिनमें एक युवक और तीन किशोर शामिल हैं। इनमें से दो के शव बरामद कर लिए गए हैं, जबकि अन्य की तलाश जारी है। घटनाओं के बाद स्थानीय लोगों में नाराजगी भी देखने को मिली, खासकर राहत कार्य में देरी को लेकर दीघा घाट पर लोगों ने विरोध जताया।

दीघा के अलग-अलग घाटों पर हादसे
पहली घटना दीघा के पाटीपुल घाट पर हुई, जहां एक युवक अपने दोस्त को बचाने के दौरान खुद गंगा में डूब गया। बाद में उसका शव बरामद कर लिया गया, लेकिन उसका साथी अभी भी लापता बताया जा रहा है। दूसरी घटना जेपी सेतु घाट की है, जहां नहाने के दौरान एक किशोर गहरे पानी में चला गया और उसकी जान नहीं बचाई जा सकी। तीसरी घटना मीनार घाट के पास हुई, जहां परिवार के साथ आए एक अन्य किशोर के डूबने की सूचना है, जिसकी तलाश अब भी जारी है।
अथमलगोला में भी एक किशोर की मौत
पटना से सटे अथमलगोला इलाके में भी गंगा स्नान के दौरान एक किशोर की डूबने से मौत हो गई। वह अपने दोस्तों के साथ नदी में नहाने गया था, लेकिन अचानक गहराई में चला गया। मौके पर मौजूद लोगों ने उसे बचाने की कोशिश की, लेकिन सफल नहीं हो सके। पुलिस ने आवश्यक प्रक्रिया पूरी कर शव परिजनों को सौंप दिया है।
मनेर में तीन बच्चे डूबे, एक लापता
मनेर क्षेत्र में भी एक अलग घटना सामने आई, जहां परिवार के साथ नदी किनारे गए तीन बच्चे स्नान के दौरान डूबने लगे। स्थानीय लोगों की तत्परता से दो बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया, लेकिन एक बालक अभी भी लापता है। गोताखोरों और स्थानीय प्रशासन की टीम उसकी तलाश में जुटी हुई है।
राहत और बचाव कार्य जारी
घटनाओं की सूचना मिलते ही बचाव दलों को मौके पर भेजा गया। एसडीआरएफ की टीम भी नदी में लापता लोगों की तलाश कर रही है। हालांकि, कुछ स्थानों पर राहत कार्य में देरी को लेकर लोगों ने नाराजगी जाहिर की। प्रशासन ने भरोसा दिलाया है कि खोज अभियान तेज कर दिया गया है और जल्द ही लापता लोगों का पता लगाने की कोशिश की जा रही है।
सुरक्षा को लेकर उठे सवाल
लगातार हो रही इन घटनाओं के बाद गंगा घाटों पर सुरक्षा इंतजामों को लेकर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई घाटों पर पर्याप्त निगरानी और चेतावनी व्यवस्था नहीं है, जिससे इस तरह के हादसे होते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि नदी किनारे सुरक्षा उपायों को मजबूत करने और लोगों को सतर्क करने की जरूरत है, ताकि ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।