Semiconductor – केंद्रीय बजट से बिहार के औद्योगिक सपनों को नई गति मिलने की उम्मीद
Semiconductor – केंद्रीय बजट में किए गए ताज़ा प्रावधानों ने बिहार की औद्योगिक संभावनाओं को एक नई दिशा दी है। सेमीकंडक्टर निर्माण, परमाणु ऊर्जा इकाइयों की स्थापना और पुराने औद्योगिक क्लस्टरों के पुनर्जीवन से राज्य में निवेश और रोजगार के नए अवसर बनने की संभावना जताई जा रही है। आने वाले पांच वर्षों में केंद्र सरकार के एक करोड़ रोजगार सृजन के लक्ष्य में बिहार की भूमिका मजबूत हो सकती है।

सेमीकंडक्टर सेक्टर में बिहार की बड़ी तैयारी
बिहार सरकार पहले ही सेमीकंडक्टर उद्योग को भविष्य की आवश्यकता मानते हुए इस दिशा में कदम बढ़ा चुकी है। राज्य मंत्रिमंडल से सेमीकंडक्टर इकाई को सैद्धांतिक मंजूरी मिल चुकी है और अब केंद्रीय बजट में घोषित सहयोगी प्रावधानों से इस योजना को गति मिलने की उम्मीद है। बिहार ने इस क्षेत्र में लगभग 25 हजार करोड़ रुपये के निवेश का लक्ष्य तय किया है, जिससे करीब दो लाख प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित होने का अनुमान है।
पूर्वी भारत के टेक्नोलॉजी हब की ओर कदम
सेमीकंडक्टर के क्षेत्र में बिहार को पूर्वी भारत के उभरते टेक्नोलॉजी हब के रूप में विकसित करने की रणनीति पर काम हो रहा है। केंद्र सरकार के सेमीकंडक्टर मिशन के तहत बजट में 40 हजार करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इसका सीधा लाभ उन राज्यों को मिलेगा, जो पहले से स्पष्ट कार्ययोजना के साथ आगे बढ़ रहे हैं। बिहार ने इस अवसर को देखते हुए नीतिगत और संरचनात्मक तैयारियां तेज कर दी हैं।
सेमीकंडक्टर नीति 2026 से निवेश को बढ़ावा
हाल ही में राज्य सरकार ने बिहार सेमीकंडक्टर नीति 2026 को मंजूरी दी है। इस नीति का उद्देश्य वर्ष 2030 तक बिहार को टेक्नोलॉजी और नवाचार के केंद्र के रूप में स्थापित करना है। नीति के तहत सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन, चिप पैकेजिंग, डिस्प्ले फैब, कंपाउंड सेमीकंडक्टर और डिजाइन यूनिट्स में निवेश को प्रोत्साहित किया जाएगा। इसके माध्यम से युवाओं के लिए उच्च तकनीकी और कुशल रोजगार के अवसर पैदा होने की संभावना है।
निवेशकों के लिए सुविधाओं का विस्तार
नई नीति के अंतर्गत निवेशकों को पूंजी अनुदान, भूमि उपलब्धता, बिजली और जल आपूर्ति, ब्याज अनुदान, एसजीएसटी प्रतिपूर्ति, पेटेंट सहायता और कौशल विकास से जुड़े प्रोत्साहन देने का प्रावधान किया गया है। सरकार का मानना है कि इन सुविधाओं से निजी निवेश को आकर्षित किया जा सकेगा और राज्य की औद्योगिक क्षमता में दीर्घकालिक वृद्धि होगी।
पुराने औद्योगिक क्लस्टरों के पुनर्जीवन की योजना
केंद्रीय बजट में पुराने औद्योगिक क्लस्टरों को पुनर्जीवित करने की घोषणा भी बिहार के लिए अहम मानी जा रही है। राज्य में कई ऐसे क्लस्टर हैं, जो वर्षों से संसाधनों और निवेश के अभाव में पिछड़ गए थे। इनके पुनरुद्धार से स्थानीय स्तर पर उत्पादन, आपूर्ति श्रृंखला और रोजगार को नई ऊर्जा मिल सकती है।
विभिन्न क्षेत्रों में बढ़ता औद्योगिक आधार
पिछले कुछ वर्षों में बिहार में इथनॉल, सीमेंट, टेक्सटाइल, जूता-चप्पल, पेपर, प्लास्टिक, रबड़, खाद्य प्रसंस्करण और इंजीनियरिंग जैसे क्षेत्रों में नई इकाइयां स्थापित हुई हैं। इसके साथ ही आईटी, आईटीईएस, पर्यटन और स्वास्थ्य सेवाओं में भी निवेश की रफ्तार बढ़ी है। सरकार का प्रयास है कि इन क्षेत्रों को संगठित औद्योगिक ढांचे से जोड़कर स्थायी विकास सुनिश्चित किया जाए।
तकनीकी शहरों और औद्योगिक गलियारों की योजना
राज्य सरकार ने एआई और सेमीकंडक्टर क्लस्टर, मेगा टेक सिटी, फिनटेक सिटी और स्मार्ट सिटी जैसी परियोजनाओं की रूपरेखा भी तैयार की है। मोबाइल, ड्रोन और रक्षा उपकरणों में उपयोग होने वाले चिप निर्माण को दीर्घकालिक लक्ष्य के रूप में देखा जा रहा है। बेहतर औद्योगिक गलियारे, विश्वसनीय बिजली आपूर्ति और प्रशिक्षित मानव संसाधन को निवेश के लिए अनुकूल माहौल माना जा रहा है।



