बिहार

CyberFraud – टेलीग्राम पर बढ़ता ठगी का जाल, मुजफ्फरपुर में करोड़ों की चपत

CyberFraud – मुजफ्फरपुर जिले में साइबर ठगों ने टेलीग्राम एप को अपना सबसे मजबूत हथियार बना लिया है। साल 2025 के दौरान जिले में ऑनलाइन ठगी के जितने भी मामले सामने आए, उनमें सबसे अधिक घटनाएं इसी प्लेटफॉर्म से जुड़ी पाई गईं। अब तक 70 से ज्यादा लोग ठगी का शिकार हो चुके हैं और कुल नुकसान दो करोड़ रुपये से अधिक आंका जा रहा है। ठग टेलीग्राम पर अलग-अलग ग्रुप बनाकर लोगों को जोड़ते हैं, भरोसा जीतते हैं और फिर निवेश के नाम पर रकम हड़प लेते हैं। पीड़ित जब तक सच्चाई समझ पाते हैं, तब तक ग्रुप और चैट पूरी तरह गायब कर दी जाती है।

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टेलीग्राम ग्रुप बनाकर बिछाया जा रहा जाल

साइबर अपराधी पहले अंजान लोगों को किसी आकर्षक नाम वाले ग्रुप में जोड़ते हैं। यहां वर्क फ्रॉम होम, ऑनलाइन टास्क या निवेश के जरिए मोटी कमाई का दावा किया जाता है। शुरुआत में छोटे फायदे दिखाकर भरोसा बनाया जाता है। इसके बाद धीरे-धीरे बड़ी रकम निवेश करने के लिए दबाव डाला जाता है। जैसे ही पैसा ट्रांसफर होता है, कुछ ही समय में ग्रुप डिलीट कर दिया जाता है, जिससे साक्ष्य जुटाना बेहद मुश्किल हो जाता है।

शिक्षक से 17 लाख से अधिक की ठगी

जवाहर नवोदय विद्यालय में कार्यरत शिक्षक दीपांशु कुमार को भी इसी तरह एक अनजान टेलीग्राम ग्रुप में जोड़ा गया। ग्रुप में वर्क फ्रॉम होम के जरिए कमाई का लालच दिया गया और बाद में ऑनलाइन निवेश से ज्यादा मुनाफे का दावा किया गया। अलग-अलग टास्क के नाम पर उनसे कुल 17.35 लाख रुपये ट्रांसफर करा लिए गए। ठगी का एहसास होने पर उन्होंने 26 अप्रैल 2025 को एफआईआर दर्ज कराई। उन्होंने पुलिस को यूपीआई और बैंक ट्रांजेक्शन से जुड़े सभी दस्तावेज सौंपे, लेकिन टेलीग्राम से जुड़ा कोई डिजिटल साक्ष्य अब तक नहीं मिल सका है।

साक्ष्य मिटाने में माहिर हैं साइबर ठग

साइबर डीएसपी हिमांशु कुमार के अनुसार, टेलीग्राम जैसे प्लेटफॉर्म पर ठगी के बाद अपराधी तुरंत चैट, ग्रुप और प्रोफाइल डिलीट कर देते हैं। इससे तकनीकी जांच में बड़ी बाधा आती है। कई मामलों में फिशिंग लिंक के जरिए भी लोगों को निवेश के लिए उकसाया जाता है। उन्होंने आम लोगों को चेतावनी देते हुए कहा कि तेज और आसान कमाई के दावों से सतर्क रहने की जरूरत है।

वर्क फ्रॉम होम के नाम पर 7.40 लाख की चपत

नगर थाना क्षेत्र के बड़ी करबला मोहल्ला निवासी विकास कुमार को भी इसी पैटर्न पर फंसाया गया। टेलीग्राम ग्रुप में शामिल कर उन्हें वर्क फ्रॉम होम से बेहतर आमदनी का भरोसा दिलाया गया। शुरुआत में कुछ रुपये उनके खाते में भेजे गए, जिससे विश्वास मजबूत हुआ। इसके बाद निवेश से जुड़े टास्क देकर उनसे कुल 7.40 लाख रुपये ले लिए गए। 20 अगस्त 2025 को उन्होंने साइबर थाने में शिकायत दर्ज कराई, लेकिन अब तक आरोपियों का कोई सुराग नहीं मिला है।

व्यवसायी से 19.60 लाख रुपये की ठगी

सरैयागंज निवासी व्यवसायी गणेश कुमार से टेलीग्राम पर साइरा नाम की युवती ने संपर्क किया। बातचीत के दौरान ऑनलाइन निवेश से अधिक मुनाफे का झांसा दिया गया। धीरे-धीरे अलग-अलग खातों में पैसे ट्रांसफर कराए गए। कुल मिलाकर 19.60 लाख रुपये की ठगी की गई। गणेश कुमार ने 28 मार्च 2025 को बैंक ट्रांजेक्शन के पूरे विवरण के साथ एफआईआर दर्ज कराई, लेकिन मामले में अभी तक कोई ठोस सफलता नहीं मिल पाई है।

सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव

लगातार सामने आ रहे मामलों से साफ है कि टेलीग्राम पर सक्रिय साइबर ठग बेहद संगठित तरीके से काम कर रहे हैं। पुलिस लोगों से अपील कर रही है कि किसी भी अनजान ग्रुप, लिंक या निवेश प्रस्ताव पर भरोसा न करें। थोड़ी सी सतर्कता बड़े नुकसान से बचा सकती है।

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