बिहार

Strike – बिहार में राजस्व अधिकारियों की हड़ताल से कई जिलों में कामकाज प्रभावित

Strike – बिहार में राजस्व विभाग से जुड़े अधिकारियों की हड़ताल का असर अब कई जिलों में दिखाई देने लगा है। बिहार राजस्व सेवा महासंघ के आह्वान पर अंचलाधिकारी और अन्य राजस्व अधिकारी आंदोलन पर हैं, जिससे जमीन से जुड़े कई महत्वपूर्ण काम प्रभावित हो रहे हैं। हालांकि सभी जिलों में स्थिति एक जैसी नहीं है। कई जगह नए अंचलाधिकारी हड़ताल में शामिल नहीं हुए हैं और वे कार्यालयों में बैठकर नियमित कामकाज निपटा रहे हैं।

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कई जिलों में पूरी तरह प्रभावित हुआ कामकाज

राज्य के करीब 22 जिलों में हड़ताल का असर अलग-अलग स्तर पर देखा जा रहा है। जिन अंचलों में अंचलाधिकारी आंदोलन में शामिल हैं, वहां जमीन से संबंधित सेवाएं लगभग ठप पड़ गई हैं। इनमें दाखिल-खारिज, परिमार्जन, ई-मापी, एलपीसी जारी करने और अभियान बसेरा जैसी प्रक्रियाएं शामिल हैं।

इन सेवाओं पर रोक लगने से लोगों को अपने जमीन से जुड़े कामों के लिए इंतजार करना पड़ रहा है। कई जगहों पर आवेदनों की लंबित फाइलें बढ़ने लगी हैं, जिससे आम नागरिकों की परेशानी भी बढ़ गई है।

नए अंचलाधिकारी नहीं हुए हड़ताल में शामिल

जानकारी के अनुसार लगभग 30 प्रतिशत अंचलाधिकारी इस हड़ताल में शामिल नहीं हैं। इनमें ज्यादातर हाल ही में नियुक्त किए गए अधिकारी हैं। ये अधिकारी अपने-अपने कार्यालयों में बैठकर काम कर रहे हैं, जिससे कुछ इलाकों में प्रशासनिक कामकाज जारी है।

बताया जा रहा है कि सात जिलों में सभी अंचलाधिकारी ड्यूटी पर हैं और वहां सामान्य रूप से काम हो रहा है। वहीं नौ जिलों में आंशिक असर देखने को मिल रहा है, जहां कुछ अधिकारी हड़ताल पर हैं जबकि कुछ नियमित काम कर रहे हैं।

कुछ जिलों में कार्यालयों में जारी है काम

मुजफ्फरपुर और समस्तीपुर जिलों में सभी अंचल कार्यालयों में अधिकारी काम कर रहे हैं। हालांकि इन जिलों में भी राजस्व कर्मचारियों के पहले से चल रहे आंदोलन के कारण कुछ प्रक्रियाएं प्रभावित हैं। विशेष रूप से परिमार्जन और दाखिल-खारिज से जुड़े कार्यों में देरी हो रही है।

इसी तरह सुपौल, सहरसा, कटिहार, जमुई और मुंगेर जैसे जिलों में भी कई अंचलाधिकारी ड्यूटी पर बने हुए हैं, जिससे वहां प्रशासनिक कामकाज पूरी तरह से नहीं रुका है।

कई जिलों में आंशिक असर

मधुबनी जिले में केवल पांच अंचलों को छोड़कर बाकी अधिकांश अंचलाधिकारी हड़ताल में शामिल हैं। पंडौल, खजौली, राजनगर, रहिका और बेनीपट्टी अंचल में अधिकारी काम कर रहे हैं। इनमें से अधिकांश पुराने अधिकारी हैं, जबकि पंडौल में हाल ही में नियुक्त अधिकारी भी हड़ताल से अलग रहे हैं।

नालंदा जिले में कुल 20 अंचल हैं, जिनमें से दस अंचलों में अधिकारी काम कर रहे हैं जबकि बाकी दस अंचलों में काम प्रभावित है। पटना जिले में भी बिहटा और मोकामा प्रखंड के अंचलाधिकारी हड़ताल में शामिल नहीं हुए हैं।

कुछ जिलों में सीमित अधिकारी ही हड़ताल से बाहर

कुछ जिलों में केवल एक या दो अंचलाधिकारी ही ड्यूटी पर बने हुए हैं। उदाहरण के तौर पर भोजपुर जिले के बड़हरा अंचल में अधिकारी काम कर रहे हैं। अररिया जिले में नरपतगंज को छोड़कर अन्य अधिकांश अंचलों में काम प्रभावित बताया जा रहा है। वहीं किशनगंज जिले में ठाकुरगंज और दिघलबैंक अंचल में अधिकारी ड्यूटी पर हैं।

इसके अलावा रोहतास, सीतामढ़ी और कैमूर जैसे जिलों में भी कुछ अधिकारी हड़ताल से अलग रहकर कार्य कर रहे हैं।

इन जिलों में अधिक प्रभावित हैं सेवाएं

राज्य के कई जिलों में राजस्व कार्यालयों का कामकाज काफी हद तक प्रभावित हुआ है। इनमें बक्सर, जहानाबाद, बेगूसराय, वैशाली, मधेपुरा, खगड़िया, पूर्णिया, लखीसराय और बांका प्रमुख हैं। इसके अलावा भागलपुर, पूर्वी चंपारण, पश्चिम चंपारण, दरभंगा, शिवहर, औरंगाबाद, गोपालगंज, नवादा, शेखपुरा, सारण, गया और अरवल जिलों में भी हड़ताल का असर देखा जा रहा है।

प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। आम लोगों की समस्याओं को देखते हुए आगे की रणनीति पर भी विचार किया जा सकता है।

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