UGCPromotionRules – बिहार के विश्वविद्यालयों में प्रमोशन प्रक्रिया में हुआ बदलाव
UGCPromotionRules -बिहार के सभी विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों के लिए पदोन्नति व्यवस्था में बड़े बदलाव की तैयारी चल रही है। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की नई गाइडलाइन के अनुरूप राज्य में भी नियमों को संशोधित करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। लोकभवन ने इसके लिए एक विशेष स्टैच्यूट कमेटी गठित की है, जो करियर एडवांसमेंट स्कीम के तहत मिलने वाले प्रमोशन के प्रावधानों की समीक्षा कर रही है।

बताया जा रहा है कि इस संबंध में दो दौर की बैठकें हो चुकी हैं और विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलपति इसमें अपनी राय रख रहे हैं। प्रस्तावित बदलावों का उद्देश्य प्रमोशन प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और प्रदर्शन आधारित बनाना है।
पीएचडी और एपीआई स्कोर पर रहेगा जोर
नई व्यवस्था में शिक्षकों के प्रमोशन के लिए पीएचडी को अनिवार्य शर्त के रूप में रखा गया है। इसके साथ ही एपीआई स्कोर और शोध कार्य का मूल्यांकन भी अहम भूमिका निभाएगा। यानी अब केवल सेवा अवधि के आधार पर पदोन्नति नहीं मिलेगी, बल्कि पूरे वर्ष के शैक्षणिक योगदान और शोध गतिविधियों का आकलन किया जाएगा।
तीन वर्ष पहले भी राज्य में प्रमोशन नियमों में बदलाव हुआ था, जिसमें एपीआई स्कोर से जुड़े प्रावधानों को संशोधित किया गया था। अब एक बार फिर व्यापक सुधार की दिशा में कदम बढ़ाया जा रहा है।
प्रोबेशन अवधि में एकरूपता की पहल
कमेटी के संयोजक और जेपी विश्वविद्यालय छपरा के कुलपति प्रो. प्रमेंद्र वाजपेयी ने संकेत दिया है कि सहायक प्राध्यापकों की प्रोबेशन अवधि सभी विश्वविद्यालयों में समान करने का प्रस्ताव है। इसे एक वर्ष तय करने पर सहमति बन रही है।
वर्तमान में राज्य के अलग-अलग विश्वविद्यालयों में प्रोबेशन अवधि भिन्न है। उदाहरण के तौर पर, बीआरए बिहार विश्वविद्यालय में यह अवधि एक वर्ष है, जबकि मिथिला और मुंगेर विश्वविद्यालय में दो वर्ष की व्यवस्था है। नई नीति लागू होने पर पूरे राज्य में एक समान नियम प्रभावी हो सकता है।
मेरिट योजना की वापसी पर विचार
विश्वविद्यालय सूत्रों के अनुसार, पदोन्नति प्रक्रिया में मेरिट आधारित प्रणाली को फिर से लागू करने पर भी चर्चा हो रही है। पहले शिक्षकों को समयबद्ध प्रमोशन, मेरिट स्कीम और करियर एडवांसमेंट स्कीम के तहत पदोन्नति मिलती थी।
बाद में सरकार ने समयबद्ध प्रमोशन को समाप्त कर दिया और मेरिट स्कीम भी बंद कर दी गई। वर्तमान में केवल करियर एडवांसमेंट स्कीम के जरिए ही पदोन्नति दी जाती है। अब प्रदर्शन आधारित मूल्यांकन को और मजबूत करने के लिए मेरिट तत्व को पुनः शामिल करने पर विचार किया जा रहा है।
शिक्षकों के लिए क्या मायने
यदि प्रस्तावित बदलाव लागू होते हैं, तो शिक्षकों को शोध, प्रकाशन और शैक्षणिक गतिविधियों पर अधिक ध्यान देना होगा। इससे उच्च शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार की उम्मीद की जा रही है।
राज्य सरकार और विश्वविद्यालय प्रशासन का मानना है कि एक समान और स्पष्ट नियमों से प्रमोशन प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी। साथ ही यह सुनिश्चित होगा कि योग्य और सक्रिय शिक्षकों को समय पर पदोन्नति मिले।
फिलहाल मसौदे पर विचार-विमर्श जारी है। अंतिम निर्णय के बाद ही संशोधित नियमों की अधिसूचना जारी की जाएगी।



