DieselPrice – वैश्विक संकट के बीच इंडस्ट्रियल डीजल के दामों में बड़ी बढ़ोतरी
DieselPrice – मध्य पूर्व में जारी तनाव और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी का असर अब देश के औद्योगिक ईंधन बाजार पर साफ दिखाई देने लगा है। सरकारी तेल कंपनियों ने इंडस्ट्रियल डीजल के दामों में एक बार फिर उल्लेखनीय बढ़ोतरी की है, जो 1 अप्रैल से लागू हो चुकी है। इस फैसले का असर मुख्य रूप से उन उद्योगों पर पड़ेगा जो बड़े पैमाने पर ईंधन का उपयोग करते हैं। हालांकि, आम उपभोक्ताओं के लिए फिलहाल राहत बनी हुई है क्योंकि खुदरा पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है।

हालिया बढ़ोतरी ने बढ़ाया लागत का दबाव
तेल कंपनियों के अनुसार, इंडस्ट्रियल डीजल की कीमत में करीब 28 रुपये प्रति लीटर से अधिक की वृद्धि की गई है। इससे इसकी कीमत 109.59 रुपये से बढ़कर 137.81 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गई है। इससे पहले 20 मार्च को भी कीमतों में 22 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी हुई थी। लगातार हो रही इस वृद्धि ने उद्योगों के लिए लागत बढ़ा दी है, खासकर उन क्षेत्रों में जहां ईंधन की खपत अधिक होती है।
फर्नेस ऑयल भी हुआ महंगा
इंडस्ट्रियल डीजल के साथ-साथ फर्नेस ऑयल की कीमतों में भी इजाफा किया गया है। कंपनियों ने इसमें लगभग 23.77 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि की है। इससे उन उद्योगों पर अतिरिक्त दबाव बढ़ सकता है जो इस ईंधन का उपयोग उत्पादन प्रक्रियाओं में करते हैं।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेजी का असर
विशेषज्ञों का मानना है कि यह बढ़ोतरी वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में उछाल का सीधा परिणाम है। हाल के दिनों में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई है। इसके पीछे भू-राजनीतिक तनाव और आपूर्ति को लेकर बनी अनिश्चितता को प्रमुख कारण माना जा रहा है।
आम उपभोक्ताओं के लिए राहत बरकरार
जहां एक ओर उद्योगों पर कीमतों का असर पड़ रहा है, वहीं आम लोगों के लिए फिलहाल कोई बदलाव नहीं किया गया है। पेट्रोल पंपों पर मिलने वाले डीजल और पेट्रोल की कीमतें स्थिर रखी गई हैं। इससे रोजमर्रा के उपभोक्ताओं को राहत मिली है और फिलहाल उन्हें अतिरिक्त आर्थिक बोझ का सामना नहीं करना पड़ रहा।
सप्लाई को लेकर सरकार का आश्वासन
तेल कंपनियों और सरकार दोनों ने स्पष्ट किया है कि देश में ईंधन की उपलब्धता पूरी तरह सामान्य है। रिफाइनरियां अपनी पूरी क्षमता के साथ काम कर रही हैं और पेट्रोल व डीजल का पर्याप्त भंडार मौजूद है। ऐसे में सप्लाई में किसी तरह की कमी की आशंका नहीं है।
निर्यात शुल्क से घरेलू आपूर्ति पर फोकस
सरकार ने बढ़ती वैश्विक कीमतों के बीच घरेलू जरूरतों को प्राथमिकता देने के लिए कुछ कदम उठाए हैं। डीजल और विमान ईंधन पर निर्यात शुल्क लगाया गया है, ताकि देश के भीतर इनकी उपलब्धता बनी रहे। यह कदम इस बात को सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है कि घरेलू बाजार में ईंधन की कमी न हो।
अफवाहों पर नजर, घबराहट से बचने की अपील
अधिकारियों ने यह भी बताया कि कुछ क्षेत्रों में अफवाहों के चलते लोग जरूरत से ज्यादा ईंधन खरीद रहे हैं, जिससे पंपों पर भीड़ देखी गई। सरकार ने लोगों से अपील की है कि वे किसी भी तरह की अफवाहों पर ध्यान न दें और सामान्य रूप से ईंधन की खरीद करें।
एलपीजी सप्लाई को प्राथमिकता देने के निर्देश
सरकार ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिए हैं कि घरेलू उपभोक्ताओं के लिए एलपीजी की आपूर्ति को प्राथमिकता दी जाए। साथ ही जमाखोरी और गलत सूचना फैलाने वालों पर सख्ती से कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए गए हैं, ताकि बाजार में स्थिरता बनी रहे।



