LPGPrice – मिडिल ईस्ट तनाव के बीच महंगा हुआ गैस सिलेंडर
LPGPrice – मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का असर अब भारत के घरेलू और व्यावसायिक गैस बाजार पर साफ दिखाई देने लगा है। हाल के दिनों में एलपीजी की आपूर्ति प्रभावित होने से कीमतों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। खासतौर पर कॉमर्शियल सिलेंडर की कीमतों में अप्रैल की शुरुआत में हुई बढ़ोतरी ने कारोबारियों और उपभोक्ताओं दोनों की चिंता बढ़ा दी है। हालांकि घरेलू सिलेंडर की कीमतों में फिलहाल कोई नया बदलाव नहीं किया गया है, लेकिन बाजार की स्थिति पर लगातार नजर बनी हुई है।

कॉमर्शियल सिलेंडर की कीमतों में बढ़ोतरी
1 अप्रैल से 19 किलोग्राम वाले कॉमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमतों में 195 रुपये से लेकर 218 रुपये तक की बढ़ोतरी की गई। इसके साथ ही छोटे 5 किलोग्राम सिलेंडर के दाम में भी 51 रुपये का इजाफा हुआ है। नई दरों के लागू होने के बाद दिल्ली में कॉमर्शियल सिलेंडर की कीमत 2078.50 रुपये तक पहुंच गई, जबकि मुंबई में यह 2031 रुपये के स्तर पर है। अन्य शहरों में भी इसी तरह का असर देखने को मिला है, जिससे होटल, रेस्तरां और छोटे व्यवसायों की लागत बढ़ी है।
घरेलू सिलेंडर की कीमत फिलहाल स्थिर
जहां एक ओर कॉमर्शियल गैस महंगी हुई है, वहीं घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में फिलहाल कोई नई बढ़ोतरी नहीं की गई है। आखिरी बार 7 मार्च 2026 को घरेलू सिलेंडर के दाम में 60 रुपये की वृद्धि हुई थी। इसके बाद दिल्ली में घरेलू गैस सिलेंडर का रेट 913 रुपये हो गया था। फिलहाल उपभोक्ताओं को राहत मिली हुई है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों को देखते हुए भविष्य में बदलाव से इनकार नहीं किया जा सकता।
वैश्विक हालात का सीधा असर
एलपीजी की कीमतों में बढ़ोतरी के पीछे प्रमुख कारण मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष को माना जा रहा है। इस क्षेत्र से ऊर्जा आपूर्ति पर दबाव बढ़ा है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया है। बताया जा रहा है कि फरवरी के अंत से अब तक क्रूड ऑयल की कीमतों में करीब 50 प्रतिशत तक की वृद्धि हुई है। खासकर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे अहम समुद्री मार्ग प्रभावित होने से सप्लाई चेन बाधित हुई है।
भारत की निर्भरता बनी चुनौती
भारत अपनी एलपीजी जरूरतों का बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आयात करता है। ऐसे में वहां की स्थिति का सीधा असर घरेलू बाजार पर पड़ता है। हालिया घटनाक्रम के चलते बीते एक महीने में देश में एलपीजी टैंकरों की आवक सीमित रही है। इससे आपूर्ति पर दबाव बढ़ा है और कीमतों में उछाल देखने को मिला है। यह स्थिति सरकार और ऊर्जा क्षेत्र के लिए एक बड़ी चुनौती के रूप में सामने आई है।
सरकार ने उठाए एहतियाती कदम
स्थिति को नियंत्रित रखने के लिए केंद्र सरकार ने रिफाइनरी कंपनियों को उत्पादन और आपूर्ति बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि देश में गैस की कमी जैसी स्थिति न बने। साथ ही, बाजार पर नजर रखी जा रही है ताकि जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त कदम उठाए जा सकें। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वैश्विक हालात जल्द स्थिर होते हैं, तो कीमतों में राहत मिल सकती है।



