Silver Investment Trends: चाँदी ने चाँद पर लगाई छलांग, छू सकती है ₹2,00,000 का असंभव टारगेट
Silver Investment Trends: इस साल चांदी (silver investment) ने निवेशकों को चौंकाते हुए सोने से भी बेहतर रिटर्न दिया है। आंकड़ों के अनुसार 2025 में चांदी की कीमतों में 114% से अधिक की जबरदस्त बढ़ोतरी देखी गई, जबकि सोने में 68% का उछाल ही रहा। इस साल सोना 1,30,000 रुपये प्रति 10 ग्राम के पार चला गया, वहीं चांदी ने 1,92,000 रुपये प्रति किलोग्राम के नए रिकॉर्ड स्तर को छू लिया। विशेषज्ञों का अनुमान है कि साल 2025 खत्म होने से पहले चांदी 2,00,000 रुपये प्रति किलो के आंकड़े को भी पार कर सकती है।

मुद्रास्फीति और डॉलर का असर
जानकारों ने कहा कि बुधवार को सोने में मामूली बढ़त (precious metals investment) अमेरिकी डॉलर की कमजोरी और फेडरल रिजर्व के ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद से आई। वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं ने भी निवेशकों को कीमती धातुओं की ओर आकर्षित किया। इस साल चांदी की कीमतों में तेजी का एक बड़ा कारण अमेरिकी और अंतरराष्ट्रीय बाजार में निवेशकों का सुरक्षित विकल्प की तलाश करना भी है।
वायदा बाजार में चांदी की रफ्तार
वायदा बाजार में चांदी (silver trading) 1.53% बढ़कर 61.60 डॉलर प्रति औंस के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई। इससे पहले मंगलवार को यह धातु 2.66 डॉलर बढ़कर 60.82 डॉलर प्रति औंस पर थी। पिछले दो कारोबारी सत्रों में चांदी की कीमतों में कुल 5.91% की वृद्धि दर्ज की गई, जो निवेशकों के लिए आकर्षक संकेत है।
मांग ज्यादा, उत्पादन कम
चांदी (silver prices) की बढ़ती कीमतों के पीछे उसकी मांग और कम उत्पादन भी एक प्रमुख कारण है। पिछले कुछ वर्षों में उद्योग क्षेत्रों में चांदी की मांग में वृद्धि हुई है। तकनीकी विकास ने चांदी की खपत को बढ़ाया है, खासकर सोलर पैनल और इलेक्ट्रिक वाहनों में। जैसे-जैसे इलेक्ट्रिक कारों की मांग बढ़ेगी, वैसे-वैसे चांदी की मांग और कीमतें भी ऊंची जाएंगी।
वैश्विक तनाव और निवेश का असर
दरअसल, दुनिया भर में बढ़ते तनाव और आर्थिक अनिश्चितताओं ने सोने और चांदी (investment metals) को सुरक्षित निवेश के रूप में आकर्षक बना दिया है। निवेशक शेयर मार्केट की बजाय इनमें निवेश कर रहे हैं। अमेरिकी टैरिफ और अंतरराष्ट्रीय व्यापार दबावों ने भी चांदी की कीमतों को सहारा दिया। इसके अलावा, सेंट्रल बैंक और ईटीएफ में लगातार निवेश बढ़ने से चांदी की मांग और तेजी से बढ़ी है।
क्या चांदी दो लाख के आंकड़े को पार करेगी?
दी (silver market trends) 2,00,000 रुपये प्रति किलो के आंकड़े को पार कर सकती है। 2026 में इसकी कीमत 2,10,000 से 2,25,000 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंचने की संभावना जताई जा रही है। निवेशकों के लिए यह उच्च रिटर्न का अवसर हो सकता है।
दिल्ली में रिकॉर्ड बढ़त
अंतरराष्ट्रीय बाजार के संकेतों और मजबूत घरेलू मांग के बीच, बुधवार को दिल्ली में चांदी (silver rate India) की कीमतों में लगभग दो महीनों में एक दिन की सबसे बड़ी तेजी आई। चांदी के दाम 11,500 रुपये बढ़कर 1,92,000 रुपये प्रति किलोग्राम के नए शिखर पर पहुंच गए। सोने की कीमत भी 800 रुपये बढ़कर 1,32,400 रुपये प्रति 10 ग्राम हो गई।
ऑल इंडिया सर्राफा एसोसिएशन के आंकड़े
ऑल इंडिया सर्राफा एसोसिएशन के अनुसार, 31 दिसंबर 2024 से अब तक चांदी (silver price rise) की कीमतों में 89,700 रुपये से 1,02,300 रुपये प्रति किलोग्राम या 114.04% की बढ़ोतरी हुई है। मंगलवार को चांदी पहली बार 60 डॉलर प्रति औंस से ऊपर गई और एक नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई।
फेड की नीतियां और निवेशकों की प्रतिक्रिया
अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में कटौती (federal reserve silver impact) ने चांदी की रैली को और बल दिया। मांग में वृद्धि, आपूर्ति में कमी और एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड में निवेश से चांदी के दाम लगातार बढ़ रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि निवेशकों को इस रुझान पर ध्यान देना चाहिए क्योंकि यह सुरक्षित और लाभदायक विकल्प बन गया है।



