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TradePolicy – 16 देशों की व्यापारिक नीतियों पर अमेरिका की नई जांच शुरू, भारत भी दायरे में…

TradePolicy – अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व वाली सरकार ने अपने प्रमुख व्यापारिक साझेदार देशों की व्यापारिक नीतियों और औद्योगिक गतिविधियों की समीक्षा शुरू कर दी है। इस पहल के तहत कुल 16 देशों को जांच के दायरे में रखा गया है। अमेरिकी प्रशासन का मानना है कि इन देशों की कुछ व्यापारिक प्रथाएं अमेरिकी उद्योगों और रोजगार के लिए प्रतिकूल हो सकती हैं। इस कदम के बाद भारत सहित कई देशों पर अतिरिक्त टैरिफ या अन्य आर्थिक कदम उठाए जाने की संभावना बन सकती है। यह निर्णय ऐसे समय आया है जब अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने पहले लगाए गए कुछ टैरिफ उपायों को रद्द कर दिया था, जिसके बाद प्रशासन नए विकल्पों पर काम कर रहा है।

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जांच में भारत समेत कई प्रमुख अर्थव्यवस्थाएं शामिल

अमेरिका द्वारा शुरू की गई इस प्रक्रिया में भारत के अलावा यूरोपीय संघ, चीन, जापान और अन्य बड़ी अर्थव्यवस्थाएं भी शामिल हैं। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि कुछ देशों में औद्योगिक उत्पादन क्षमता जरूरत से अधिक बढ़ गई है, जिसका असर वैश्विक बाजार और अमेरिकी उद्योगों पर पड़ सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस जांच के बाद कड़े व्यापारिक कदम उठाए जाते हैं तो इससे अमेरिका और उसके प्रमुख व्यापारिक साझेदारों के बीच आर्थिक संबंधों में तनाव बढ़ सकता है। अंतरराष्ट्रीय व्यापार से जुड़े विश्लेषकों के अनुसार, ऐसी कार्रवाइयों का असर वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला और निर्यात आधारित उद्योगों पर भी पड़ सकता है।

अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि का बयान

समाचार एजेंसी एएफपी के अनुसार, अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीर ने बताया कि प्रशासन दो अलग-अलग पहलुओं पर जांच शुरू कर रहा है। पहली जांच उन क्षेत्रों से जुड़ी है जहां उत्पादन क्षमता वास्तविक मांग से अधिक बताई जा रही है, जबकि दूसरी जांच उन वस्तुओं के आयात को लेकर है जिनके निर्माण में कथित तौर पर जबरन श्रम का इस्तेमाल किया गया हो सकता है।

ग्रीर ने कहा कि अमेरिका का उद्देश्य घरेलू रोजगार और उद्योगों की रक्षा करना है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि यदि स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो आने वाले महीनों में कुछ देशों के खिलाफ नए टैरिफ लागू किए जा सकते हैं। उनके अनुसार चीन, यूरोपीय संघ, भारत, जापान, दक्षिण कोरिया और मैक्सिको उन देशों में शामिल हैं जिन पर इस तरह के कदम पर विचार किया जा सकता है।

कई एशियाई और यूरोपीय देशों के नाम भी सूची में

अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक जांच में ताइवान, वियतनाम, थाइलैंड, मलेशिया, कंबोडिया, सिंगापुर, इंडोनेशिया, बांग्लादेश, स्विट्जरलैंड और नॉर्वे जैसे देशों को भी शामिल किया गया है। दिलचस्प बात यह है कि अमेरिका के प्रमुख व्यापारिक साझेदारों में से एक कनाडा को फिलहाल इस प्रक्रिया से बाहर रखा गया है।

ग्रीर ने कहा कि अमेरिका यह सुनिश्चित करना चाहता है कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार पूरी तरह निष्पक्ष हो और अमेरिकी कंपनियों को वैश्विक प्रतिस्पर्धा में समान अवसर मिले। हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि संभावित टैरिफ या आर्थिक कदम सभी देशों के लिए समान होंगे या अलग-अलग।

चीन की इलेक्ट्रिक वाहन क्षमता पर भी नजर

अमेरिकी प्रशासन ने चीन की इलेक्ट्रिक वाहन उद्योग क्षमता को भी इस जांच का एक महत्वपूर्ण पहलू बताया है। ग्रीर के अनुसार चीन में इलेक्ट्रिक वाहनों का उत्पादन घरेलू मांग से काफी अधिक है। इसके बावजूद चीनी कंपनी बीवाईडी जैसे बड़े निर्माता विभिन्न देशों में अपने उत्पादन नेटवर्क का विस्तार कर रहे हैं।

उदाहरण के तौर पर बीवाईडी ने उज्बेकिस्तान, थाइलैंड, ब्राजील, हंगरी और तुर्की में कारखाने स्थापित करने की योजनाएं शुरू की हैं और यूरोप में भी विस्तार पर काम कर रही है। अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि इस तरह की औद्योगिक रणनीतियों से वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा का संतुलन प्रभावित हो सकता है।

यूरोप और अन्य क्षेत्रों से जुड़े व्यापारिक आंकड़े

जांच में यूरोप के कुछ देशों के व्यापारिक आंकड़ों को भी आधार बनाया जा रहा है। अमेरिकी विश्लेषकों के अनुसार जर्मनी और आयरलैंड का बड़ा व्यापार अधिशेष यूरोपीय संघ में अतिरिक्त औद्योगिक क्षमता का संकेत माना जा रहा है।

इसके अलावा सिंगापुर में सेमीकंडक्टर उत्पादन क्षमता और नॉर्वे से ईंधन व समुद्री खाद्य पदार्थों के बड़े पैमाने पर निर्यात को भी वैश्विक बाजार पर प्रभाव डालने वाले कारकों के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि इन देशों की सरकारों की ओर से इस पर अलग-अलग दृष्टिकोण सामने आते रहे हैं।

जबरन मजदूरी से जुड़े आरोपों की भी जांच

दूसरी जांच कथित जबरन श्रम से जुड़े उत्पादों के आयात को लेकर की जा रही है। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि के अनुसार यह जांच लगभग 60 व्यापारिक साझेदार देशों तक फैल सकती है। यदि ऐसा होता है तो इसका प्रभाव वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर भी पड़ सकता है।

अमेरिका पहले ही उइगर फोर्स्ड लेबर प्रोटेक्शन एक्ट के तहत चीन के शिनजियांग क्षेत्र से आने वाले कुछ उत्पादों पर कार्रवाई कर चुका है। अमेरिकी प्रशासन का आरोप है कि वहां के कुछ उद्योगों में उइगर और अन्य मुस्लिम अल्पसंख्यकों से जबरन श्रम कराया जाता है, हालांकि चीन इन आरोपों को खारिज करता रहा है।

ट्रंप और शी जिनपिंग की प्रस्तावित बैठक से पहले फैसला

यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब अमेरिका और चीन के बीच उच्चस्तरीय वार्ता की तैयारी चल रही है। जानकारी के अनुसार अप्रैल में बीजिंग में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की संभावित मुलाकात प्रस्तावित है।

विश्लेषकों का मानना है कि नई व्यापारिक जांच और संभावित टैरिफ से दोनों देशों के बीच होने वाली बातचीत का माहौल प्रभावित हो सकता है। आने वाले हफ्तों में यह स्पष्ट होगा कि जांच के नतीजे वैश्विक व्यापार व्यवस्था और विभिन्न देशों के साथ अमेरिका के आर्थिक संबंधों को किस तरह प्रभावित करते हैं।

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