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GovindNamdev – फिल्म सेट पर भेदभाव को लेकर खुला बयान

GovindNamdev – फिल्म इंडस्ट्री में कलाकारों और तकनीकी टीम के बीच असमान व्यवहार को लेकर बहस नई नहीं है, लेकिन वरिष्ठ अभिनेता गोविंद नामदेव के हालिया बयान ने इस मुद्दे को फिर चर्चा में ला दिया है। लंबे समय से सिनेमा जगत में सक्रिय गोविंद ने खुलकर कहा कि फिल्म सेट पर सिर्फ मेहनताना ही नहीं, बल्कि सुविधाओं और व्यवहार में भी स्पष्ट अंतर दिखाई देता है। हालांकि उन्होंने यह भी जोड़ा कि हर अनुभव एक जैसा नहीं होता और कुछ प्रोजेक्ट्स में माहौल सकारात्मक भी रहा है।

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सलाह लेने से कतराते बड़े सितारे

एक बातचीत के दौरान जब उनसे पूछा गया कि क्या बड़े कलाकार उनके अनुभव का लाभ लेने के लिए सलाह लेते हैं, तो उन्होंने साफ कहा कि ऐसा कम ही देखने को मिलता है। उनके मुताबिक, इंडस्ट्री में एक अनकहा ढांचा है, जहां स्थापित सितारे अक्सर अपने से जूनियर या चरित्र अभिनेताओं से राय लेने में संकोच करते हैं। गोविंद का मानना है कि कई बार यह धारणा बन जाती है कि सलाह लेने से उनकी छवि प्रभावित हो सकती है। इसलिए वे बराबरी के कलाकारों से ही चर्चा करना ज्यादा सहज समझते हैं।

भूमिकाओं के आधार पर बनती धारणाएं

गोविंद नामदेव ने कहा कि वे प्रायः खलनायक या मजबूत चरित्र भूमिकाओं में नजर आते हैं, लेकिन इससे उनकी पेशेवर समझ कम नहीं हो जाती। उनका कहना है कि इंडस्ट्री में एक तरह की श्रेणी व्यवस्था चलती है, जहां कलाकार की लोकप्रियता और फीस के आधार पर व्यवहार तय होता है। उन्होंने संकेत दिया कि यह सोच कई बार अनावश्यक दूरी पैदा कर देती है।

सुविधाओं में भी दिखता अंतर

अभिनेता ने यह भी बताया कि यह भेदभाव केवल संवाद तक सीमित नहीं रहता। वैनिटी वैन के आकार से लेकर अन्य सुविधाओं तक, सब कुछ कलाकार की स्थिति के अनुसार तय होता है। उन्होंने कहा कि अधिक फीस लेने वाले कलाकारों को बेहतर सुविधाएं मिलना स्वाभाविक माना जाता है, लेकिन कभी-कभी यह अंतर जरूरत से ज्यादा स्पष्ट हो जाता है।

खाने की व्यवस्था पर भी टिप्पणी

गोविंद नामदेव ने सेट पर भोजन व्यवस्था को लेकर भी अनुभव साझा किया। उनके अनुसार कई बार प्रमुख सितारों के लिए अलग तरह का भोजन तैयार किया जाता है, जबकि अन्य कलाकारों और तकनीकी स्टाफ के लिए अलग व्यवस्था होती है। हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट किया कि यह हर फिल्म में नहीं होता। उन्होंने फिल्म ‘ओह माय गॉड’ का उदाहरण देते हुए बताया कि उस दौरान सभी के लिए समान भोजन और सुविधाओं का इंतजाम किया गया था।

उनके अनुसार उस फिल्म की शूटिंग के समय अक्षय कुमार और निर्देशक उमेश शुक्ला ने सुनिश्चित किया था कि सभी लोग एक साथ और समान व्यवस्था में काम करें। यदि किसी की व्यक्तिगत खान-पान संबंधी जरूरत अलग हो तो वह अलग बात है, लेकिन सामान्य तौर पर किसी तरह का भेदभाव नहीं रखा गया। गोविंद ने कहा कि उस अनुभव ने उन्हें यह महसूस कराया कि सकारात्मक माहौल संभव है, यदि नेतृत्व करने वाले लोग पहल करें।

इंडस्ट्री में बराबरी की जरूरत

वरिष्ठ अभिनेता का मानना है कि सिनेमा सामूहिक प्रयास का परिणाम होता है। पर्दे पर दिखने वाली सफलता के पीछे कई लोगों की मेहनत होती है, इसलिए सम्मान और व्यवहार में संतुलन जरूरी है। उनका बयान किसी विवाद को जन्म देने के बजाय कार्यस्थल की संस्कृति पर गंभीर चर्चा की ओर संकेत करता है।

फिलहाल उनके इस बयान ने फिल्म जगत में काम करने के तौर-तरीकों पर फिर से बहस छेड़ दी है। कई लोग इसे सकारात्मक बदलाव की दिशा में उठाया गया कदम मान रहे हैं।

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