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HisHouseReview – धीमी रफ्तार और गहरी कहानी वाली अलग तरह की हॉरर फिल्म

HisHouseReview – अगर आप इस छुट्टी में नेटफ्लिक्स पर कोई डरावनी फिल्म देखने की सोच रहे हैं, तो ‘हिज हाउस’ का नाम आपके सामने जरूर आया होगा। रेटिंग्स के लिहाज से यह फिल्म मजबूत दिखाई देती है—आईएमडीबी पर इसे 6.4 और रोटन टोमैटोज पर 100% स्कोर मिला है। हालांकि, हर दर्शक के लिए यह फिल्म सही चुनाव साबित हो, ऐसा जरूरी नहीं है। यह फिल्म पारंपरिक हॉरर से अलग रास्ता अपनाती है, जो कुछ लोगों को पसंद आ सकता है, जबकि कुछ को निराश भी कर सकता है।

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पारंपरिक हॉरर से अलग है फिल्म का अंदाज

अगर आप ‘द कॉन्ज्यूरिंग’ या ‘एनाबेल’ जैसी फिल्मों के आदी हैं, जहां अचानक डराने वाले दृश्य और तेज गति कहानी का हिस्सा होते हैं, तो ‘हिज हाउस’ आपको धीमी लग सकती है। इस फिल्म में डर कम और भावनात्मक परतें ज्यादा हैं। कहानी धीरे-धीरे खुलती है और दर्शक को सोचने के लिए मजबूर करती है। यही वजह है कि यह हर किसी की उम्मीदों पर खरी नहीं उतरती।

ओपन एंडिंग से रह जाता है सवाल

फिल्म का अंत पारंपरिक ढंग से नहीं किया गया है। कई दर्शकों को इसका क्लाइमैक्स अधूरा महसूस हो सकता है क्योंकि इसमें सभी सवालों के सीधे जवाब नहीं मिलते। कहानी एक ऐसे मोड़ पर खत्म होती है जहां दर्शक खुद निष्कर्ष निकालने के लिए स्वतंत्र होता है। इस तरह का अंत उन लोगों को पसंद आता है जो फिल्मों में गहराई और व्याख्या की गुंजाइश तलाशते हैं, लेकिन हर किसी के लिए यह संतोषजनक नहीं होता।

डर से ज्यादा भारीपन का एहसास

यह फिल्म आपको चौंकाने या डराने से ज्यादा भीतर तक उदास कर सकती है। आमतौर पर लोग हॉरर फिल्मों से रोमांच और डर की उम्मीद रखते हैं, लेकिन यहां माहौल गंभीर और भावनात्मक है। फिल्म का टोन ऐसा है जो मनोरंजन के बजाय मानसिक दबाव और बेचैनी पैदा करता है। ऐसे में हल्के-फुल्के मूड में देखने वालों के लिए यह सही विकल्प नहीं हो सकती।

किन दर्शकों को नहीं आएगी पसंद

जो दर्शक तेज रफ्तार और डरावने सीन्स से भरपूर फिल्में पसंद करते हैं, उनके लिए यह फिल्म थोड़ा अलग अनुभव हो सकती है। अगर आप चाहते हैं कि फिल्म देखते वक्त आपके रोंगटे खड़े हो जाएं और डर का असर लंबे समय तक बना रहे, तो ‘हिज हाउस’ आपकी अपेक्षाओं पर पूरी तरह खरी नहीं उतरेगी।

किनके लिए है यह फिल्म

वहीं, अगर आपको ऐसी फिल्में पसंद हैं जो सामाजिक मुद्दों को हॉरर के जरिए सामने लाती हैं, तो यह फिल्म आपके लिए खास हो सकती है। ‘गेट आउट’ और ‘अस’ जैसी फिल्मों की तरह इसमें भी डर के साथ एक गहरी कहानी छिपी हुई है। यह फिल्म सिर्फ मनोरंजन नहीं करती, बल्कि आपको सोचने पर भी मजबूर करती है।

कहानी और अभिनय बनते हैं फिल्म की ताकत

फिल्म की सबसे बड़ी खासियत इसकी कहानी है, जो एक शरणार्थी दंपति के संघर्ष को दिखाती है। साउथ सूडान से भागकर ब्रिटेन पहुंचे इस जोड़े के अतीत को जिस तरह से प्रस्तुत किया गया है, वह इसे साधारण हॉरर से अलग बनाता है। यहां असली डर किसी भूत का नहीं, बल्कि बीते हुए समय और यादों का है।

कलाकारों ने निभाई मजबूत भूमिका

सोप डिरीसु और वनमी मोसाकु ने अपने किरदारों को बेहद सच्चाई के साथ निभाया है। उनके अभिनय में डर, अपराधबोध और बेबसी साफ झलकती है। यह फिल्म ‘जंप स्केयर’ पर निर्भर नहीं करती, बल्कि धीरे-धीरे एक ऐसा माहौल बनाती है जो अंत तक दर्शक को बांधे रखता है। दीवारों के पीछे छिपे रहस्य और मन के भीतर चल रही उथल-पुथल कहानी को और भी प्रभावी बनाते हैं।

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