MohammedRafi – स्टूडियो में हुआ अपमान, किशोर कुमार ने जताई नाराजगी
MohammedRafi – हिंदी सिनेमा के स्वर्णिम दौर में मोहम्मद रफी का नाम उन आवाजों में शामिल था, जिन्होंने हर भाव को सुरों में ढालकर अमर बना दिया। उनकी गायकी में ऐसी गहराई थी कि दर्द भरे गीत सुनते ही श्रोता भावुक हो उठते थे। एक समय ऐसा भी रहा जब बड़े-बड़े फिल्मकार अपनी फिल्मों के लिए सबसे पहले रफी को ही चुनते थे। लेकिन वक्त के साथ इंडस्ट्री का रुख बदला और नए दौर में पसंद भी बदलने लगी। इसी बदलाव के बीच एक ऐसी घटना सामने आई, जिसने संगीत जगत में चर्चा को जन्म दिया।

बदलते दौर में बदली पसंद
सत्तर के दशक की शुरुआत होते-होते फिल्म इंडस्ट्री में किशोर कुमार का दबदबा बढ़ने लगा था। उनके अलग अंदाज और आवाज ने दर्शकों को तेजी से आकर्षित किया, जिसके चलते कई निर्माता-निर्देशक उनकी ओर झुकने लगे। वहीं, जो फिल्मकार पहले मोहम्मद रफी के साथ काम करने को प्राथमिकता देते थे, वे अब किशोर कुमार को ज्यादा मौके देने लगे। हालांकि इस दौरान कई गीत ऐसे भी बने, जिनमें दोनों महान गायकों ने साथ काम किया और उन्हें दर्शकों ने खूब सराहा।
एक फिल्म के गाने से जुड़ा किस्सा
साल 1977 में रिलीज हुई फिल्म ‘दूसरा आदमी’ के एक गाने को लेकर यह घटना जुड़ी बताई जाती है। इस फिल्म में ऋषि कपूर, राखी, नीतू कपूर और शशि कपूर प्रमुख भूमिकाओं में थे। फिल्म का संगीत राजेश रोशन ने तैयार किया था और गीतकार मजरूह सुल्तानपुरी थे। एक खास गाने के लिए दो पुरुष और एक महिला आवाज की जरूरत थी। शुरुआत में यह विचार था कि मुख्य हिस्से के लिए किशोर कुमार और लता मंगेशकर की आवाज ली जाए और बाकी हिस्से के लिए किसी अन्य गायक को शामिल किया जाए।
संगीतकार के आग्रह पर बदला फैसला
म्यूजिक डायरेक्टर राजेश रोशन का मानना था कि गाने की खूबसूरती को बनाए रखने के लिए मोहम्मद रफी की आवाज जरूरी है। उनके सुझाव के बाद रफी को भी इस गीत के लिए शामिल किया गया, भले ही उनका हिस्सा अपेक्षाकृत छोटा था। रफी ने बिना किसी हिचकिचाहट के इस प्रस्ताव को स्वीकार किया और रिकॉर्डिंग के लिए स्टूडियो पहुंचे। उस दिन तीनों महान आवाजें—लता मंगेशकर, किशोर कुमार और मोहम्मद रफी—एक साथ मौजूद थीं और गाने की रिकॉर्डिंग पूरी हुई।
स्टूडियो में घटी घटना ने किया आहत
रिकॉर्डिंग के बाद निर्माता की ओर से कलाकारों को सम्मान स्वरूप फूलों के गुलदस्ते दिए जाने थे। बताया जाता है कि पहले लता मंगेशकर को सम्मानित किया गया और उसके बाद क्रम में खड़े मोहम्मद रफी को नजरअंदाज करते हुए सीधे किशोर कुमार को गुलदस्ता दे दिया गया। यह दृश्य वहां मौजूद लोगों के लिए असहज करने वाला था। किशोर कुमार ने इस पर तुरंत प्रतिक्रिया दी और सवाल उठाया कि रफी को क्यों छोड़ा गया।
किशोर कुमार ने जताई नाराजगी
घटना से आहत होकर मोहम्मद रफी चुपचाप स्टूडियो से निकल गए। बताया जाता है कि इस व्यवहार से किशोर कुमार भी असंतुष्ट थे और उन्होंने अपनी नाराजगी जाहिर की। यह किस्सा अक्सर उस दौर की बदलती प्राथमिकताओं और कलाकारों के प्रति व्यवहार को लेकर चर्चा में आता है। हालांकि इन दिग्गज कलाकारों के बीच आपसी सम्मान और उनके योगदान को आज भी उतनी ही गंभीरता से याद किया जाता है।