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मनोरंजन

Musical Industry Controversy 2026: ए आर रहमान के ‘पावर शिफ्ट’ वाले बयान पर अनूप जलोटा ने किया तगड़ा पलटवार, बोले- अगर मुस्लिम होने से…

Musical Industry Controversy 2026: भारतीय संगीत जगत के दो दिग्गज कलाकार इन दिनों अपने काम को लेकर नहीं, बल्कि एक तीखे वैचारिक मतभेद के कारण चर्चा के केंद्र में हैं। ऑस्कर विजेता ए आर रहमान ने हाल ही में एक सनसनीखेज दावा किया था कि पिछले आठ वर्षों में उनके पास काम की कमी आई है, जिसके पीछे उन्होंने देश की बदलती राजनीतिक व्यवस्था को जिम्मेदार ठहराया। इस (Musical Career Challenges) पर अब भजन सम्राट अनूप जलोटा ने बेहद कड़ा और सीधा जवाब दिया है, जिसने सोशल मीडिया से लेकर बॉलीवुड गलियारों तक एक नई बहस छेड़ दी है।

Musical Industry Controversy 2026
Musical Industry Controversy 2026

रहमान का इशारा और कम्युनल एंगल का तड़का

ए आर रहमान ने एक इंटरव्यू के दौरान इस बात का संकेत दिया था कि हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में अब पावर का केंद्र बदल चुका है। उन्होंने बीबीसी एशियन नेटवर्क से बात करते हुए कहा कि शायद सांप्रदायिक कारणों की वजह से उन्हें प्रोजेक्ट्स से दूर रखा जा रहा है। रहमान के अनुसार, (Political Power Shift) की वजह से अब वे लोग फैसले ले रहे हैं जो रचनात्मक नहीं हैं। उन्होंने यह भी साझा किया कि कई बार उन्हें बुक करने के बाद म्यूजिक कंपनियां दूसरे संगीतकारों को चुन लेती हैं, जिससे उन्हें काफी निराशा होती है।

अनूप जलोटा की ‘घर वापसी’ वाली नसीहत

रहमान के इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए अनूप जलोटा ने एक निजी चैनल को दिए इंटरव्यू में अपनी बात बेबाकी से रखी। जलोटा ने याद दिलाया कि रहमान पहले हिंदू थे और बाद में उन्होंने इस्लाम अपनाया, जिसके बाद उन्होंने अपार सफलता हासिल की। जलोटा ने तंज कसते हुए कहा कि अगर रहमान को लगता है कि उनके (Religious Identity Crisis) के कारण फिल्में नहीं मिल रही हैं, तो उन्हें फिर से हिंदू धर्म अपना लेना चाहिए। उन्होंने सलाह दी कि धर्म बदलकर देखें कि क्या वाकई उन्हें फिर से काम मिलना शुरू हो जाता है।

सफलता के आंकड़ों पर जलोटा का तर्क

अनूप जलोटा ने केवल नसीहत ही नहीं दी, बल्कि रहमान की पिछली सफलताओं का हवाला देते हुए उनके दावों को खारिज करने की कोशिश भी की। जलोटा के मुताबिक, रहमान ने पिछले कुछ सालों में इतना काम किया है जितना कोई कलाकार 25 साल में भी नहीं कर पाता। उनके अनुसार, (Professional Work Ethic) और प्रतिभा के दम पर रहमान ने बहुत नाम कमाया है और लोगों के दिलों में जगह बनाई है, ऐसे में काम की कमी की बात करना या उसे धर्म से जोड़ना पूरी तरह से गलत और अतार्किक लगता है।

फिल्म इंडस्ट्री में बढ़ता भेदभाव या महज इत्तेफाक

ए आर रहमान का कहना है कि 90 के दशक में उन्हें कभी भी भेदभाव का अहसास नहीं हुआ, लेकिन पिछले कुछ सालों में स्थितियां बदली हैं। उन्होंने बताया कि अब म्यूजिक कंपनियां अक्सर (Music Industry Competition) का हवाला देकर एक ही फिल्म के लिए कई कंपोजर्स को हायर कर लेती हैं। रहमान ने इसे कम्युनल थिंग से जोड़ते हुए कहा कि हालांकि उनके सामने कोई कुछ नहीं कहता, लेकिन पर्दे के पीछे कई चीजें उनके खिलाफ चल रही हैं, जिससे वे अपने परिवार के साथ समय बिताना ही बेहतर समझते हैं।

क्रिएटिविटी बनाम पावर का नया द्वंद्व

रहमान के बयानों ने इंडस्ट्री के भीतर छिपे उस पावर स्ट्रक्चर पर सवाल उठाए हैं जो अब केवल टैलेंट के आधार पर नहीं चलता। उनका मानना है कि (Creative Freedom Issues) अब उन लोगों के हाथों में है जो संगीत की गहरी समझ नहीं रखते। जलोटा का मानना है कि रहमान जैसे कद के व्यक्ति को ऐसी बातें शोभा नहीं देतीं क्योंकि उन्होंने खुद इस इंडस्ट्री से बहुत कुछ हासिल किया है। यह विवाद अब पूरी तरह से रचनात्मकता बनाम विचारधारा की लड़ाई में तब्दील होता नजर आ रहा है।

सोशल मीडिया पर छिड़ा समर्थकों का युद्ध

जैसे ही अनूप जलोटा का यह बयान सामने आया, इंटरनेट पर लोग दो गुटों में बंट गए हैं। कुछ लोग जलोटा की बात को सीधा और सटीक बता रहे हैं, तो वहीं रहमान के प्रशंसक इसे (Social Media Backlash) का नाम दे रहे हैं और जलोटा पर संकीर्ण सोच रखने का आरोप लगा रहे हैं। लोग याद दिला रहे हैं कि संगीत का कोई धर्म नहीं होता और ए आर रहमान ने हमेशा अपनी धुनों से देश का नाम पूरी दुनिया में रोशन किया है, इसलिए उन्हें इस तरह की टिप्पणी से नहीं तौला जाना चाहिए।

विवादों के बीच संगीत की गरिमा पर सवाल

इस पूरे प्रकरण ने यह स्पष्ट कर दिया है कि आज के दौर में कला और कलाकार भी सामाजिक-राजनीतिक बदलावों से अछूते नहीं हैं। जहाँ एक तरफ रहमान अपनी (Artistic Contribution Recognition) में कमी महसूस कर रहे हैं, वहीं जलोटा इसे केवल एक बहाना मान रहे हैं। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या रहमान जलोटा की इस चुभती हुई सलाह पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया देते हैं या फिर अपनी खामोशी से ही इस विवाद को शांत करने की कोशिश करेंगे।

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