Shahrukh Khan and Sharad Sankla Story: किंग खान भी रह गए थे हक्के-बक्के, जब ‘अब्दुल’ ने शाहरुख के सामने लूट ली थी महफिल…
Shahrukh Khan and Sharad Sankla Story: साल 1999 की ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘बादशाह’ आज भी सिनेप्रेमियों के दिलों में एक खास जगह रखती है। शाहरुख खान और ट्विंकल खन्ना की इस फिल्म ने महज 14.87 करोड़ के बजट में बनकर बॉक्स ऑफिस पर 31 करोड़ से ज्यादा की कमाई की थी। लेकिन इस फिल्म के पीछे (Cinematic Legacy) का एक ऐसा रोचक किस्सा छुपा है, जिसका संबंध टीवी के सबसे लोकप्रिय शो ‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’ से है। बहुत कम लोग जानते हैं कि इस फिल्म में गोकुलधाम सोसाइटी के चहेते ‘अब्दुल’ ने शाहरुख खान को एक सीन में कड़ी टक्कर दी थी।

छोटे रोल में बड़ा धमाका करने वाले शरद संकला
हम बात कर रहे हैं अभिनेता शरद संकला की, जिन्हें आज दुनिया ‘अब्दुल’ के नाम से जानती है। भले ही शाहरुख खान की फिल्म में उनका किरदार बहुत लंबा नहीं था, लेकिन अपनी कॉमिक टाइमिंग और (Acting Prowess) के दम पर उन्होंने सीमित समय में ही दर्शकों और क्रू का ध्यान खींच लिया। शरद ने एक इंटरव्यू में खुलासा किया था कि उस दौर में शाहरुख जैसे सुपरस्टार के सामने खुद को साबित करना किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं था, लेकिन उन्होंने इसे बखूबी निभाया।
जब शाहरुख खान ने खुद पूछा- यह लड़का कौन है?
शरद संकला ने अपनी पुरानी यादों को ताजा करते हुए बताया कि फिल्म ‘बाजीगर’ के दौरान भी उन्होंने किंग खान के साथ काम किया था। उस वक्त शाहरुख ने (Co Star Experience) को लेकर अपनी हैरानी जताई थी और निर्देशकों से पूछा था कि यह लड़का कौन है जिसने सीन में सारा फोकस अपनी तरफ खींच लिया। शाहरुख खान को इस बात का अहसास हो गया था कि शरद एक मंझे हुए कलाकार हैं जो छोटे से शॉट को भी यादगार बना सकते हैं।
अब्बास-मस्तान की जोड़ी और वो ऐतिहासिक सीन
बादशाह फिल्म की शूटिंग जुहू के होराइजन होटल में चल रही थी, जहाँ एक पार्टी सीक्वेंस शूट किया जाना था। शरद ने बताया कि उस समय शाहरुख खान को कहीं जल्दी निकलना था, इसलिए (Film Direction Strategy) के तहत निर्देशकों ने पहले शाहरुख के क्लोज शॉट्स पूरे कर लिए। इसके बाद शरद और उनके साथी कलाकारों की बारी आई, जिन्हें अपना हुनर दिखाने के लिए बहुत ही कम समय दिया गया था।
आधे घंटे की मेहनत और राजू श्रीवास्तव का साथ
शरद संकला के साथ उस सीन में मशहूर कॉमेडियन राजू श्रीवास्तव भी मौजूद थे। शरद ने याद करते हुए कहा कि उनके पास अपनी परफॉर्मेंस के लिए (Creative Performance Time) के तौर पर केवल आधा घंटा बचा था। उस सीमित समय में उन्होंने अपनी पूरी ऊर्जा झोंक दी और बेहतरीन कॉमिक एक्ट पेश किया। उन्हें अंदाजा भी नहीं था कि उनका यह छोटा सा प्रयास फिल्म के निर्देशकों को इतना प्रभावित कर देगा कि वे उनकी तुलना दुनिया के महानतम कलाकार से कर देंगे।
डायरेक्टर ने दी चार्ली चैप्लिन से उपमा
जब शरद ने अपना शॉट पूरा किया, तो फिल्म के निर्देशक अब्बास-मस्तान उनके पास आए और उनकी जमकर तारीफ की। शरद के अनुसार, निर्देशक ने उनसे कहा कि “मैंने अपनी जिंदगी में बहुत सारे (Charlie Chaplin Impression) देखे हैं, लेकिन तेरे जैसा टैलेंट आज तक नहीं देखा।” निर्देशक का खुद आकर शाबाशी देना शरद के करियर का सबसे गौरवशाली क्षण बन गया। यह उनकी कड़ी मेहनत और अभिनय के प्रति समर्पण का ही नतीजा था कि उन्होंने सुपरस्टार की मौजूदगी में अपनी पहचान बनाई।
हेरा फेरी से लेकर तारक मेहता तक का सफर
शरद संकला केवल बादशाह तक ही सीमित नहीं रहे, बल्कि उन्होंने ‘हेरा फेरी’ जैसी कल्ट क्लासिक फिल्मों में भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। हालांकि, उन्हें असली पहचान और घर-घर में प्रसिद्धि (Television Stardom) के जरिए मिली जब वे ‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’ से जुड़े। आज भले ही वे टीवी के बड़े सितारे हैं, लेकिन शाहरुख खान के साथ बिताए वे पल और उनकी शाबाशी आज भी शरद के दिल के बेहद करीब हैं।
शाहरुख खान का बड़प्पन और शरद का टैलेंट
फिल्म जगत में अक्सर देखा जाता है कि बड़े स्टार्स के सामने छोटे कलाकार दब जाते हैं, लेकिन शाहरुख खान ने हमेशा प्रतिभा का सम्मान किया। शरद संकला का (Bollywood Anecdotes) वाला यह किस्सा साबित करता है कि अगर कलाकार में दम हो, तो वह सुपरस्टार के सामने भी अपनी चमक बिखेर सकता है। शरद की यह कहानी आज के संघर्षशील कलाकारों के लिए एक बड़ी प्रेरणा है कि स्क्रीन टाइमिंग से ज्यादा परफॉर्मेंस की क्वालिटी मायने रखती है।
गोकुलधाम के अब्दुल की फिल्मी विरासत
आज जब हम ‘अब्दुल’ को सोडा शॉप पर देखते हैं, तो यकीन करना मुश्किल होता है कि इस कलाकार ने कभी बॉलीवुड के ‘बादशाह’ को भी टक्कर दी थी। शरद संकला का यह (Career Journey) दर्शाता है कि एक कलाकार की यात्रा कितनी विविधतापूर्ण हो सकती है। शाहरुख खान द्वारा उन्हें ‘सीन खाने वाला लड़का’ कहना, उनके लिए किसी भी ऑस्कर या बड़े अवॉर्ड से कम नहीं था। शरद आज भी उस दौर को अपनी अभिनय यात्रा का सबसे कीमती हिस्सा मानते हैं।



