Diabetes Friendly Snacks Guide: सावधान! मीठे के धोखे में न फंस जाए आपकी जान, क्या बिस्किट का पैकेट बन रहा है सेहत का अनजान दुश्मन…
Diabetes Friendly Snacks Guide: आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में डायबिटीज का नाम सुनते ही सबसे पहले मीठे पर पाबंदी लगा दी जाती है। आलू, चावल और गेहूं के आटे के साथ बिस्किट-नमकीन भी लिस्ट से बाहर हो जाते हैं। ऐसे में बाजार ने ‘शुगर फ्री’ का एक नया रास्ता निकाल लिया है, जिसे मरीज (Health Supplements Market) का वरदान मानकर बिना सोचे-समझे अपनाने लगे हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जिस बिस्किट को आप शुगर फ्री समझकर खा रहे हैं, वह वास्तव में आपके ब्लड शुगर के साथ क्या खिलवाड़ कर रहा है?

एमबीबीएस डॉक्टर अर्पित सैनी की चेतावनी
डायबिटीज के मरीजों के लिए अक्सर यह मान लेना आसान होता है कि ‘शुगर फ्री’ लेबल वाली चीजें बिल्कुल सुरक्षित हैं। लेकिन एमबीबीएस डॉक्टर अर्पित सैनी के अनुसार, यह धारणा (Medical Health Advice) के नजरिए से काफी खतरनाक हो सकती है। डॉक्टर सैनी का कहना है कि मरीज इन बिस्किट्स को सुरक्षित समझकर अधिक मात्रा में खाने लगते हैं, जबकि इनकी असलियत कुछ और ही होती है। इसे खाने से पहले इसके पीछे छिपे विज्ञान को समझना आपके स्वास्थ्य के लिए बेहद अनिवार्य है।
मैदे और रिफाइंड ऑयल का घातक मेल
शुगर फ्री बिस्किट के साथ सबसे बड़ी समस्या यह है कि इसमें चीनी भले न हो, लेकिन इसका मुख्य आधार मैदा ही होता है। मैदा एक हाई ग्लाइसेमिक इंडेक्स फूड है, जो शरीर में जाते ही (Insulin Spike Causes) का कारण बनता है। इसके साथ ही, इसमें इस्तेमाल होने वाला रिफाइंड ऑयल हृदय स्वास्थ्य के लिए भी नुकसानदेह है। अगर आप स्वस्थ हैं और वजन घटाने या फिट रहने के लिए इन बिस्किट्स का सेवन कर रहे हैं, तो सावधान हो जाइए क्योंकि यह आपको भविष्य में डायबिटीज का शिकार बना सकता है।
लेबल के पीछे छिपी सच्चाई को पहचानें
जब भी आप स्टोर से शुगर फ्री बिस्किट उठाएं, तो उसका लेबल पढ़ना सबसे जरूरी काम है। आपको यह देखना चाहिए कि कहीं इसमें माल्टोडेक्सट्रिन (Reading Food Labels) जैसे हानिकारक तत्व तो शामिल नहीं हैं। माल्टोडेक्सट्रिन का ग्लाइसेमिक इंडेक्स साधारण चीनी से भी अधिक होता है, जो शुगर लेवल को तेजी से बढ़ा सकता है। साथ ही, यह जरूर चेक करें कि बिस्किट मैदे से बना है या ‘होल व्हीट’ (साबुत गेहूं) से, क्योंकि फाइबर की मात्रा ही इसे थोड़ा सुरक्षित बना सकती है।
आर्टिफिशियल स्वीटनर का भ्रम और मात्रा
शुगर फ्री उत्पादों में मिठास पैदा करने के लिए अक्सर कृत्रिम मिठास यानी आर्टिफिशियल स्वीटनर का प्रयोग किया जाता है। डॉक्टर अर्पित सलाह देते हैं कि ऐसे बिस्किट (Managing Blood Glucose) के दौरान दिनभर में दो से ज्यादा कभी नहीं खाने चाहिए। इनका सेवन रोजाना करना एक बड़ी भूल साबित हो सकती है। इसे केवल कभी-कभी स्वाद बदलने के लिए ही इस्तेमाल करें, न कि अपनी डाइट का नियमित हिस्सा बनाएं।
चाय के साथ क्या हो स्वस्थ विकल्प
चाय के साथ बिस्किट खाना हमारी संस्कृति का हिस्सा बन चुका है, लेकिन शुगर के मरीजों को इस आदत को बदलने की जरूरत है। बिस्किट की जगह आप रोस्टेड मखाना, मूंगफली या काजू जैसे (Healthy Tea Snacks) का चुनाव कर सकते हैं। ये नट्स न केवल आपको प्रोटीन और अच्छे फैट्स देते हैं, बल्कि ये ब्लड शुगर को अचानक बढ़ने भी नहीं देते। सीड्स यानी बीजों का सेवन भी सुबह-शाम करना एक बेहतरीन विकल्प है।
मोटे अनाज की शक्ति को अपनाएं
डायबिटीज के प्रबंधन में ज्वार, बाजरा और रागी जैसे मोटे अनाज किसी औषधि से कम नहीं हैं। बिस्किट की लालसा होने पर आप घर पर बने (Traditional Millets Diet) के कुकीज खा सकते हैं, जिनमें रिफाइंड ऑयल की जगह शुद्ध घी और मैदे की जगह अनाज का उपयोग किया गया हो। ओट्स का नाश्ता भी शुगर लेवल को स्थिर रखने में काफी मददगार साबित होता है, जिससे आपको दिनभर ऊर्जा मिलती रहती है।
बिस्किट खरीदते समय विशेष चयन
बाजार में कुछ ऐसे विकल्प उपलब्ध हैं जो तुलनात्मक रूप से बेहतर माने जाते हैं, जैसे सुगर फ्री डिलाइट की चोको चिप कुकीज जो ओट्स और क्विनोआ से बनी होती हैं। इसके अलावा अजीस्ता के करेला बिस्किट या डायबीस्मार्ट के (Almond Flour Biscuits) का चुनाव किया जा सकता है। ये विकल्प फाइबर से भरपूर होते हैं और इनमें मैदे की मात्रा न के बराबर होती है, जिससे ये पाचन के लिए भी अच्छे रहते हैं और शुगर स्पाइक को कम करते हैं।
अंततः सावधानी ही सबसे बड़ा बचाव है
डायबिटीज एक ऐसी स्थिति है जिसे अनुशासन के साथ ही नियंत्रित किया जा सकता है। बाजार के विज्ञापनों और चमकदार पैकेजों के पीछे भागने के बजाय (Natural Diabetes Management) पर ध्यान देना चाहिए। प्राकृतिक खाद्यों का सेवन और नियमित व्यायाम ही आपको लंबे समय तक स्वस्थ रख सकता है। हमेशा याद रखें, लेबल पर लिखे ‘जीरो शुगर’ का मतलब ‘जीरो कैलोरी’ या ‘सुरक्षित’ नहीं होता, इसलिए विशेषज्ञ की सलाह हमेशा सर्वोपरि रखें।



