स्वास्थ्य

Diabetes Kidney Health: डायबिटीज में ज़रा सी लापरवाही भारी! ये 4 गलतियां किडनी को आधा खराब कर सकती हैं…

Diabetes Kidney Health: डायबिटीज आज सिर्फ एक बीमारी नहीं, बल्कि बिगड़ती जीवनशैली का नतीजा बन चुकी है। गलत खानपान, शारीरिक गतिविधियों की कमी और लगातार बढ़ता तनाव इस समस्या को तेजी से बढ़ा रहे हैं। आमतौर पर लोग जानते हैं कि डायबिटीज दिल, आंखों और नर्व्स को नुकसान पहुंचाती है, लेकिन बहुत कम लोग यह समझ पाते हैं कि यह किडनी के लिए भी बेहद खतरनाक साबित हो सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार (diabetes complications) में किडनी डैमेज सबसे खामोश लेकिन गंभीर खतरा है, जो बिना स्पष्ट लक्षणों के धीरे-धीरे शरीर को कमजोर कर देता है।

Diabetes Kidney Health
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डायबिटीज और किडनी का गहरा लेकिन खतरनाक कनेक्शन

द्वारका के सीनियर डायबेटोलॉजिस्ट डॉ. बृजमोहन अरोड़ा के मुताबिक, डायबिटीज के मरीज अक्सर कुछ बुनियादी गलतियों को नजरअंदाज कर देते हैं, जो आगे चलकर किडनी फेलियर का कारण बन सकती हैं। किडनी शरीर का वह अंग है जो खून को फिल्टर करता है और अतिरिक्त टॉक्सिन्स बाहर निकालता है। जब लंबे समय तक शुगर कंट्रोल में नहीं रहती, तो किडनी के अंदर मौजूद छोटे फिल्टर खराब होने लगते हैं। यही प्रक्रिया (kidney damage) को जन्म देती है, जो धीरे-धीरे गंभीर रूप ले लेती है।


लंबे समय तक बढ़ा ब्लड प्रेशर, किडनी का सबसे बड़ा दुश्मन

डायबिटीज के मरीजों में हाई ब्लड प्रेशर एक आम लेकिन खतरनाक समस्या है। डॉ. बृजमोहन बताते हैं कि अगर किसी व्यक्ति का बीपी लंबे समय तक 140/90 mmHg से ऊपर रहता है, तो यह किडनी पर अतिरिक्त दबाव डालता है। इससे किडनी की रक्त नलिकाएं कमजोर होने लगती हैं और उनकी फिल्टर करने की क्षमता घट जाती है। कई मरीज इसे हल्के में लेते हैं, जबकि (high blood pressure) किडनी डैमेज की प्रक्रिया को कई गुना तेज कर सकता है।


HBA1C लेवल का लगातार 7% से ऊपर रहना क्यों है खतरनाक

HBA1C डायबिटीज कंट्रोल का सबसे अहम पैमाना माना जाता है। अगर यह लेवल लंबे समय तक 7% से ऊपर बना रहता है, तो इसका मतलब है कि ब्लड शुगर लगातार हाई है। विशेषज्ञों के अनुसार, हाई शुगर खून को गाढ़ा बना देती है, जिससे किडनी के नाजुक फिल्टर सिस्टम पर सीधा असर पड़ता है। समय के साथ यह फिल्टर क्षतिग्रस्त होने लगते हैं और (HbA1c level) बढ़ा रहने से किडनी की कार्यक्षमता तेजी से घटती जाती है।


फास्टिंग और पोस्ट मील शुगर का अनदेखा खतरा

सिर्फ HBA1C ही नहीं, बल्कि रोजमर्रा का ब्लड शुगर लेवल भी किडनी की सेहत में बड़ी भूमिका निभाता है। डॉ. बृजमोहन के अनुसार, अगर फास्टिंग शुगर लंबे समय तक 130–140 और पोस्ट मील शुगर 180–200 के आसपास रहती है, तो यह किडनी के लिए बेहद नुकसानदायक है। इससे शरीर में ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस बढ़ता है और माइक्रोवैस्कुलर इंजरी का खतरा पैदा होता है। यही कारण है कि (blood sugar control) को हल्के में लेना भारी पड़ सकता है।


जब रिपोर्ट नॉर्मल लगे, लेकिन किडनी आधी खराब हो चुकी हो

सबसे खतरनाक स्थिति तब होती है जब मरीज अपनी KFT रिपोर्ट देखकर निश्चिंत हो जाते हैं। डॉ. बृजमोहन बताते हैं कि जब तक क्रिएटिनिन लेवल 1.3 से ऊपर जाता है, तब तक लगभग 50% किडनी डैमेज हो चुकी होती है। यानी बीमारी अंदर ही अंदर बढ़ती रहती है और लक्षण सामने नहीं आते। यही वजह है कि (kidney function test) नॉर्मल दिखने के बावजूद खतरा बना रहता है और समय रहते इलाज न हो, तो स्थिति गंभीर हो सकती है।


छोटे बदलाव, बड़ी सुरक्षा: किडनी को हेल्दी कैसे रखें

किडनी को सुरक्षित रखने के लिए बड़े बदलावों की नहीं, बल्कि सही अनुशासन की जरूरत होती है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि HBA1C को 7% से नीचे रखें, फास्टिंग ब्लड शुगर 110 से कम और बीपी को 130/80 से नीचे रखने की कोशिश करें। इसके साथ ही हर साल यूरिन माइक्रोअलबुमिन टेस्ट कराना जरूरी है, ताकि शुरुआती स्टेज में ही समस्या पकड़ी जा सके। सही दवाइयों, डाइट और एक्सरसाइज के साथ (kidney health tips) अपनाकर किडनी को लंबे समय तक स्वस्थ रखा जा सकता है।


सचेत रहना ही है सबसे बड़ा इलाज

डायबिटीज के साथ जीना चुनौतीपूर्ण जरूर है, लेकिन सही जानकारी और नियमित मॉनिटरिंग से इसके खतरों को काफी हद तक कम किया जा सकता है। किडनी डैमेज एक धीमी प्रक्रिया है, जो समय रहते रोकी जा सकती है। जरूरी है कि मरीज अपने नंबरों को नजरअंदाज न करें और डॉक्टर की सलाह को गंभीरता से लें। जागरूकता और समय पर कदम ही (diabetes care) को प्रभावी बनाते हैं और जीवन की गुणवत्ता को बेहतर रखते हैं।

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