DinnerTiming – रात के खाने का समय सेहत पर क्यों डालता है असर…
DinnerTiming – दिनभर की भागदौड़ के बाद ज्यादातर लोग रात के खाने में हल्का और सुकून देने वाला भोजन पसंद करते हैं। कई लोग सूप, सलाद या कम मसाले वाला खाना चुनते हैं ताकि पाचन पर ज्यादा बोझ न पड़े। लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि केवल क्या खा रहे हैं, यह पर्याप्त नहीं है; कब खा रहे हैं, यह भी उतना ही अहम है। गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉ. सौरभ सेठी ने हाल ही में साझा जानकारी में बताया कि डिनर का समय शरीर की कार्यप्रणाली पर सीधा असर डालता है।

देर से खाने पर शरीर में क्या बदलाव होते हैं
डॉ. सेठी के अनुसार, यदि रात का भोजन बहुत देर से किया जाए तो शरीर की insulin sensitivity लगभग 30 से 40 प्रतिशत तक कम हो सकती है। इसका मतलब है कि शरीर शर्करा को उतनी प्रभावी ढंग से उपयोग नहीं कर पाता। साथ ही fat burn की प्रक्रिया भी धीमी पड़ जाती है। देर रात भोजन करने से पाचन तंत्र को अतिरिक्त काम करना पड़ता है, जबकि उसी समय शरीर को मरम्मत और detox की प्रक्रिया में जुटना चाहिए। यही वजह है कि कई लोग पूरी नींद लेने के बावजूद सुबह भारीपन, पेट फूलना और थकान महसूस करते हैं।
रिसर्च क्या संकेत देती है
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का हवाला देते हुए डॉ. सेठी बताते हैं कि जो लोग शाम सात बजे से पहले रात का भोजन कर लेते हैं, उनमें कुछ सकारात्मक बदलाव देखे गए हैं। ऐसे लोगों में रात के समय glucose स्तर औसतन 15 प्रतिशत तक कम पाया गया। इसके अलावा insulin sensitivity बेहतर रहती है और sleep quality में भी सुधार देखा गया है। दिलचस्प बात यह है कि यह फर्क तब भी नजर आता है जब कुल कैलोरी की मात्रा समान रहती है।
सूर्यास्त के बाद शरीर की जैविक घड़ी
मानव शरीर की आंतरिक जैविक घड़ी सूर्य के साथ तालमेल में काम करती है। शाम ढलने के बाद melatonin का स्तर स्वाभाविक रूप से बढ़ने लगता है, जो नींद की तैयारी का संकेत देता है। इसी समय insulin का स्राव अपेक्षाकृत कम हो जाता है। यदि इस दौरान भारी भोजन लिया जाए तो शरीर को उसे पचाने में अधिक समय लगता है। इससे न केवल नींद प्रभावित होती है, बल्कि अतिरिक्त ऊर्जा वसा के रूप में संग्रहित हो सकती है।
सिर्फ दो घंटे का अंतर भी अहम
विशेषज्ञों के अनुसार, डिनर के समय में महज ढाई घंटे का अंतर भी असर डाल सकता है। उदाहरण के लिए, यदि कोई व्यक्ति शाम सात बजे भोजन करता है तो उसका शर्करा स्तर अपेक्षाकृत स्थिर रहता है और शरीर को मरम्मत की प्रक्रिया के लिए पर्याप्त समय मिलता है। वहीं यदि वही भोजन रात साढ़े नौ बजे किया जाए तो blood sugar लंबे समय तक ऊंचा रह सकता है और body repair की प्रक्रिया धीमी पड़ सकती है।
व्यस्त जीवनशैली में कैसे रखें संतुलन
आज की व्यस्त दिनचर्या में जल्दी खाना हर किसी के लिए संभव नहीं होता। ऐसे में विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि सोने से कम से कम दो से तीन घंटे पहले भोजन कर लिया जाए। साथ ही रात में बहुत भारी या तैलीय भोजन से बचना चाहिए। नियमित समय पर खाने की आदत शरीर की लय को संतुलित रखने में मदद करती है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि बेहतर पाचन, संतुलित metabolism और अच्छी नींद के लिए डिनर का समय उतना ही महत्वपूर्ण है जितना भोजन का चयन। छोटे बदलाव भी लंबे समय में सकारात्मक परिणाम दे सकते हैं।



