GutHealth – रोजमर्रा की तीन आदतें सुधारें पाचन तंत्र naturally
GutHealth – आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में पेट से जुड़ी दिक्कतें तेजी से बढ़ रही हैं। अनियमित दिनचर्या, तनाव, देर रात तक जागना और बाहर का तला-भुना भोजन हमारी पाचन प्रणाली पर सीधा असर डालते हैं। गैस, पेट फूलना, एसिडिटी या कब्ज जैसी समस्याएं अब आम हो चुकी हैं। इन परेशानियों के चलते न केवल शरीर थका हुआ महसूस करता है, बल्कि काम करने की ऊर्जा और मनोदशा भी प्रभावित होती है। अक्सर लोग तुरंत राहत के लिए दवाइयों या सप्लीमेंट्स का सहारा लेते हैं, जबकि विशेषज्ञ मानते हैं कि बेहतर पाचन की शुरुआत हमारी रसोई से ही हो सकती है।

पाचन बिगड़ने की बड़ी वजहें
डाइट और लाइफस्टाइल में गड़बड़ी पाचन समस्याओं की मुख्य जड़ मानी जाती है। पोषण विशेषज्ञों के अनुसार, जरूरत से ज्यादा मसालेदार खाना, पैकेटबंद खाद्य पदार्थ और फाइबर की कमी आंतों के संतुलन को बिगाड़ देती है। इसके अलावा पर्याप्त पानी न पीना और शारीरिक गतिविधि की कमी भी स्थिति को गंभीर बना सकती है। जब आंतों का प्राकृतिक संतुलन बिगड़ता है तो अच्छे और बुरे बैक्टीरिया का अनुपात प्रभावित होता है, जिससे अपच और सूजन की शिकायत बढ़ जाती है। ऐसे में जरूरी है कि रोजमर्रा की थाली में कुछ ऐसे खाद्य पदार्थ शामिल किए जाएं जो पाचन को स्वाभाविक रूप से दुरुस्त रखें।
घर का बना दही क्यों है फायदेमंद
ताजा दही को लंबे समय से पाचन के लिए उपयोगी माना जाता रहा है। यह प्राकृतिक प्रोबायोटिक का काम करता है और आंतों में लाभकारी बैक्टीरिया को बढ़ावा देता है। इससे गैस, अपच और एसिडिटी जैसी समस्याओं में राहत मिलती है। दही शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को भी मजबूत करने में मदद करता है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि बाजार के बजाय घर में जमाया गया ताजा दही अधिक प्रभावी होता है। दोपहर के भोजन में सादा दही शामिल किया जा सकता है या फिर इसे छाछ के रूप में लिया जा सकता है। ध्यान रहे कि दही बहुत ज्यादा खट्टा न हो, क्योंकि ताजगी ही इसके पोषण गुणों को बनाए रखती है।
भीगे हुए चिया बीज का असर
चिया बीज में घुलनशील फाइबर भरपूर मात्रा में पाया जाता है। पानी में भिगोने के बाद यह जेल जैसी संरचना बना लेता है, जो मल त्याग की प्रक्रिया को आसान बनाता है। खासकर कब्ज से जूझ रहे लोगों के लिए यह काफी लाभकारी माना जाता है। नियमित सेवन से पेट में भारीपन कम होता है और आंतों की सफाई बेहतर ढंग से होती है। इसे इस्तेमाल करना भी बेहद आसान है। एक चम्मच चिया बीज को रात में पानी में भिगोकर फ्रिज में रख दें। सुबह इसे गुनगुने पानी, दही या किसी स्मूदी में मिलाकर लिया जा सकता है। हालांकि, इसकी मात्रा सीमित रखना जरूरी है ताकि शरीर पर अतिरिक्त दबाव न पड़े।
ओट्स से मिलता है हल्का और संतुलित पाचन
ओट्स को हल्का और पेट के अनुकूल भोजन माना जाता है। इसमें मौजूद बीटा-ग्लूकान नामक फाइबर पाचन क्रिया को संतुलित ढंग से चलाने में मदद करता है। जिन लोगों को बार-बार एसिडिटी या कब्ज की शिकायत रहती है, उनके लिए ओट्स एक सुरक्षित विकल्प हो सकता है। इसे रात में पानी या दूध में भिगोकर रखा जा सकता है और सुबह हल्का पकाकर या ओवरनाइट ओट्स के रूप में खाया जा सकता है। यह न केवल पेट को आराम देता है, बल्कि लंबे समय तक ऊर्जा भी बनाए रखता है। नियमित सेवन से आंतों की कार्यप्रणाली सुधरती है और शरीर को जरूरी पोषक तत्व भी मिलते हैं।
धीरे-धीरे अपनाएं सही आदतें
पाचन से जुड़ी समस्याएं अचानक पैदा नहीं होतीं और न ही एक दिन में खत्म होती हैं। इसके लिए लगातार संतुलित आहार और सही जीवनशैली जरूरी है। दही, चिया बीज और ओट्स जैसे साधारण खाद्य पदार्थ आसानी से उपलब्ध और किफायती हैं। यदि इन्हें नियमित रूप से आहार में शामिल किया जाए तो लंबे समय में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल सकते हैं। हालांकि, यदि किसी को गंभीर या लगातार समस्या बनी रहती है तो चिकित्सक से सलाह लेना आवश्यक है। सही खानपान और थोड़ी सावधानी से पाचन तंत्र को स्वस्थ रखा जा सकता है।



