HealthTips – सेहत पर बुरा असर डाल सकती हैं घर में इस्तेमाल होने वाली ये चीजें
HealthTips – स्वस्थ रहने के लिए लोग अक्सर संतुलित आहार, व्यायाम और नियमित दिनचर्या पर ध्यान देते हैं। लेकिन कई बार घर में इस्तेमाल होने वाली रोजमर्रा की चीजें भी स्वास्थ्य पर असर डाल सकती हैं। कुछ उत्पाद ऐसे होते हैं जो सामान्य दिखते हैं, मगर लंबे समय तक उनका उपयोग वातावरण और शरीर दोनों के लिए ठीक नहीं माना जाता।

इसी संदर्भ में जनरल फिजिशियन और डायबिटोलॉजिस्ट डॉ. कोमल कुलकर्णी का कहना है कि उन्होंने अपने घर में कुछ वस्तुओं के इस्तेमाल से दूरी बना रखी है। उनका मानना है कि कई बार छोटे-छोटे बदलाव भी घर के माहौल को अधिक सुरक्षित और स्वच्छ बनाने में मदद कर सकते हैं। आइए जानते हैं ऐसे कुछ उत्पादों के बारे में जिनके उपयोग को लेकर विशेषज्ञ सावधानी बरतने की सलाह देते हैं।
अगरबत्ती के धुएं से हो सकती हैं सांस से जुड़ी परेशानियां
कई घरों में रोजाना पूजा के दौरान अगरबत्ती जलाना सामान्य परंपरा है। इसकी खुशबू घर के वातावरण को सुगंधित बनाती है, लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार इससे निकलने वाला धुआं संवेदनशील लोगों के लिए समस्या पैदा कर सकता है।
डॉ. कोमल के अनुसार अगरबत्ती के धुएं में ऐसे तत्व मौजूद हो सकते हैं जो एलर्जी या अस्थमा जैसी समस्याओं को बढ़ा सकते हैं। लगातार धुएं के संपर्क में रहने से सांस से जुड़ी परेशानियां बढ़ने का खतरा रहता है। इसी कारण वह अपने घर में अगरबत्ती का उपयोग नहीं करतीं और इसकी जगह हवा को स्वाभाविक तरीके से ताजा रखने की सलाह देती हैं।
खुले कूड़ेदान से फैल सकते हैं बैक्टीरिया
घर में सफाई बनाए रखने के लिए कूड़ेदान का इस्तेमाल जरूरी होता है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि खुला डस्टबिन रखने से कई तरह की समस्याएं पैदा हो सकती हैं। खुले कूड़ेदान से दुर्गंध फैलने के साथ-साथ बैक्टीरिया और कीटाणुओं के बढ़ने की संभावना भी रहती है।
डॉ. कोमल बताती हैं कि खुला कूड़ेदान मक्खियों और अन्य कीड़ों को आकर्षित कर सकता है, जिससे घर का वातावरण प्रभावित हो सकता है। ऐसे में ढक्कन वाला डस्टबिन इस्तेमाल करना बेहतर माना जाता है, ताकि कचरे से निकलने वाले जीवाणुओं का फैलाव कम किया जा सके।
किचन स्पंज में जल्दी पनप सकते हैं जर्म्स
रसोई में बर्तन साफ करने के लिए इस्तेमाल होने वाले स्पंज देखने में साफ लग सकते हैं, लेकिन इनमें नमी के कारण बैक्टीरिया तेजी से बढ़ सकते हैं। यह अक्सर लंबे समय तक गीले रहते हैं, जिससे कीटाणुओं के पनपने की संभावना बढ़ जाती है।
डॉ. कोमल के मुताबिक, यही कारण है कि वह अपने घर में पारंपरिक स्पंज का कम इस्तेमाल करती हैं। यदि स्पंज का उपयोग किया जाए तो उसे नियमित रूप से बदलना और अच्छी तरह साफ करना जरूरी है, ताकि किचन में स्वच्छता बनी रहे।
प्लास्टिक के कटिंग बोर्ड से जुड़ी सावधानी
किचन में सब्जियां या फल काटने के लिए प्लास्टिक के चॉपिंग बोर्ड आमतौर पर इस्तेमाल किए जाते हैं। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि बार-बार चाकू चलने से इसकी सतह पर छोटे-छोटे निशान बन जाते हैं।
इन दरारों में भोजन के कण फंस सकते हैं और यदि सफाई सही तरीके से न हो तो वहां बैक्टीरिया पनपने की आशंका रहती है। इसके अलावा कुछ मामलों में माइक्रोप्लास्टिक के संपर्क का भी खतरा बताया जाता है। ऐसे में कई लोग लकड़ी या अन्य सुरक्षित विकल्पों को प्राथमिकता देते हैं।
पुराने तकिए को समय-समय पर बदलना जरूरी
घर में इस्तेमाल होने वाली चीजों में तकिया भी एक ऐसी वस्तु है जिसे अक्सर लंबे समय तक बदला नहीं जाता। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि समय के साथ इसमें धूल, पसीना, मृत त्वचा और सूक्ष्म जीव जमा हो सकते हैं।
इन कारणों से त्वचा संबंधी समस्याएं, एलर्जी या सांस से जुड़ी दिक्कतें होने की संभावना बढ़ सकती है। डॉ. कोमल की सलाह है कि बेहतर स्वच्छता बनाए रखने के लिए लगभग दो साल के अंतराल पर तकिए को बदल देना चाहिए।
बेडशीट और पिलो कवर की नियमित सफाई जरूरी
सोने के दौरान शरीर से निकलने वाला पसीना, धूल और अन्य कण बिस्तर की चादर और तकिए के कवर पर जमा हो सकते हैं। यदि इन्हें लंबे समय तक बिना धोए इस्तेमाल किया जाए तो इनमें बैक्टीरिया और फंगल संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार दो सप्ताह से अधिक समय तक एक ही बेडशीट या पिलो कवर का उपयोग करना उचित नहीं माना जाता। नियमित अंतराल पर इन्हें धोने और बदलने से घर में स्वच्छता बनी रहती है और त्वचा तथा श्वसन से जुड़ी समस्याओं का जोखिम भी कम हो सकता है।
नोट: यह लेख सामान्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार किया गया है। इसे किसी भी प्रकार की पेशेवर चिकित्सा सलाह का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए। किसी भी स्वास्थ्य समस्या से संबंधित निर्णय लेने से पहले विशेषज्ञ डॉक्टर से परामर्श लेना आवश्यक है।



